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आतंकवादियों की गोली से शहीद हुआ कोसी का लाल
Updated Wed, 20 Jun 2018 08:21 PM IST
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डमी
- फोटो : डमी
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कोसीकलां (मथुरा)। गांव गढ़ी बरबारी का लाल कैलाश बैनीवाल देश सेवा में शहीद हो गया। बेटे के शहीद होने की खबर पर परिजनों में कोहराम मच गया। शहीद का पार्थिव शरीर गढ़ी बरबारी आएगा या बेढ़ा इस पर संशय बना हुआ है।
गांव गढ़ी बरबारी निवासी कैलाश बैनीवाल (22) पुत्र रमेश सिंह का सेना में दो वर्ष पूर्व सिपाही के पद चयन हुआ था। उस समय वह फिरोजपुर पंजाब में था। अब जम्मू कश्मीर में तैनात है। बताया गया कि मंगलवार रात वह अधिकारी और साथियों के साथ जम्मू कश्मीर में एक सर्च आपरेशन अभियान में शामिल था। तभी आतंकवादियों ने फायरिंग शुरू कर दी। गोली लगने से कैलाश शहीद हो गए। परिजनों के पास बुधवार की सुबह खबर पहुंची तो कोहराम मच गया।
गांव के लाल के सीमा पर शहीद होने से ग्रामीणों में शोक है और गर्व भी। शहीद कैलाश दो भाइयों में बड़ा था। वह मामा के पास जिला पलवल (हरियाणा) के होडल थाना के गांव बेढ़ा में रहकर तैयारी कर सेना में भर्ती हुआ था। कैलाश होली पर घर आए थे।
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घटना से कुछ समय पहले ही कैलाश की परिजनों से बात हुई थी। ग्रामीणों का कहना है कि शहीद कैलाश ने सेना में भर्ती होते समय अपना पता मामा के गांव का दिया था। इसलिए संशय बना हुआ है कि शहीद का शव गांव बेढ़ा पहुंचेगा या फिर गढ़ी बरबारी। यहां भी अंतिम संस्कार की तैयारी की जा रही हैं।
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गांव गढ़ी बरबारी निवासी कैलाश बैनीवाल (22) पुत्र रमेश सिंह का सेना में दो वर्ष पूर्व सिपाही के पद चयन हुआ था। उस समय वह फिरोजपुर पंजाब में था। अब जम्मू कश्मीर में तैनात है। बताया गया कि मंगलवार रात वह अधिकारी और साथियों के साथ जम्मू कश्मीर में एक सर्च आपरेशन अभियान में शामिल था। तभी आतंकवादियों ने फायरिंग शुरू कर दी। गोली लगने से कैलाश शहीद हो गए। परिजनों के पास बुधवार की सुबह खबर पहुंची तो कोहराम मच गया।
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गांव के लाल के सीमा पर शहीद होने से ग्रामीणों में शोक है और गर्व भी। शहीद कैलाश दो भाइयों में बड़ा था। वह मामा के पास जिला पलवल (हरियाणा) के होडल थाना के गांव बेढ़ा में रहकर तैयारी कर सेना में भर्ती हुआ था। कैलाश होली पर घर आए थे।
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घटना से कुछ समय पहले ही कैलाश की परिजनों से बात हुई थी। ग्रामीणों का कहना है कि शहीद कैलाश ने सेना में भर्ती होते समय अपना पता मामा के गांव का दिया था। इसलिए संशय बना हुआ है कि शहीद का शव गांव बेढ़ा पहुंचेगा या फिर गढ़ी बरबारी। यहां भी अंतिम संस्कार की तैयारी की जा रही हैं।