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37 साल में पांच चेयरमैन भी नहीं बनवा सके सब्जीमंडी
Updated Mon, 13 Nov 2017 11:39 PM IST
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किशनी। 37 साल में किशनी के लोगों ने पांच चेयरमैन बनाए लेकिन किशनी में सालों पुरानी मांग के बाद भी सब्जी मंडी नहीं बन सकी है। नगर पंचायत के मतदाताओं ने अधिकांशत: निर्दलीय प्रत्याशियों पर ही भरोसा जताया।
किशनी को शासन ने वर्ष 1979 में नगर पंचायत का दर्जा दिया था। 37 साल के नगर पंचायत के कार्यकाल में केवल एक बार ही सपा ने जीत हासिल की है। एक बार तो भाजपा प्रत्याशी तक नहीं उतार सकी। 16 अप्रैल 1979 को नगर पंचायत का गठन होने के बाद 1988 तक एसडीएम की देखरेख में नगर पंचायत के कामकाज का संचालन किया गया। वर्ष 1988 में पहली बार हुए चुनाव में राव कृष्णप्रताप सिंह ने निर्दलीय रूप से चुनाव में जीत हासिल की।
वर्ष 1995 में सपा प्रत्याशी के रूप में हाकिमलाल यादव भाजपा के कौशल किशोर को हराकर अध्यक्ष बने। वर्ष 2000 में हुए चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी रामभरोसे लाल भाजपा के राजीव कुमार गुप्ता को हराकर चेयरमैन बने। वर्ष 2006 में हुए चुनाव में निर्दलीय रूप से सरला चौहान ने सपा समर्थित जैसीराम यादव को हराकर अध्यक्ष की कुर्सी हासिल की। वर्ष 2012 में हुए चुनाव में निर्दलीय जैसीराम यादव ने जीत दर्ज की। जीतने के बाद अधकांश चेयरमैन सत्ताधारी दल में ही शामिल हो गए।
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समस्याओं से निजात पाने का इंतजार
किशनी। नगर पंचायत किशनी के लोगों को 37 साल बाद भी समस्याओं से निजात पाने का इंतजार है। वर्षों पुरानी सब्जी मंडी की मांग अधूरी ही है। पहले सदर बाजार में लगने वाली सब्जी मंडी अब कई सालों से हरचंदपुर मार्ग पर खुले में लग रही है। मोहल्ला गढ़ी का मुख्य मार्ग 37 साल बाद भी बदहाल है।
पहली बार सभी दल मैदान में
किशनी। लंबे समय के बाद पहली बार नगर पंचायत के चुनाव में सभी दलों के उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। राजनीतिक दलों के चुनाव चिन्ह वाले पोस्टर उनकी मौजूदगी का लोगों को अहसास करा रहे हैं। लोगों ने तीन दशक बाद कांग्रेस का चुनाव चिन्ह मैदान में देखा है।
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किशनी को शासन ने वर्ष 1979 में नगर पंचायत का दर्जा दिया था। 37 साल के नगर पंचायत के कार्यकाल में केवल एक बार ही सपा ने जीत हासिल की है। एक बार तो भाजपा प्रत्याशी तक नहीं उतार सकी। 16 अप्रैल 1979 को नगर पंचायत का गठन होने के बाद 1988 तक एसडीएम की देखरेख में नगर पंचायत के कामकाज का संचालन किया गया। वर्ष 1988 में पहली बार हुए चुनाव में राव कृष्णप्रताप सिंह ने निर्दलीय रूप से चुनाव में जीत हासिल की।
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वर्ष 1995 में सपा प्रत्याशी के रूप में हाकिमलाल यादव भाजपा के कौशल किशोर को हराकर अध्यक्ष बने। वर्ष 2000 में हुए चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी रामभरोसे लाल भाजपा के राजीव कुमार गुप्ता को हराकर चेयरमैन बने। वर्ष 2006 में हुए चुनाव में निर्दलीय रूप से सरला चौहान ने सपा समर्थित जैसीराम यादव को हराकर अध्यक्ष की कुर्सी हासिल की। वर्ष 2012 में हुए चुनाव में निर्दलीय जैसीराम यादव ने जीत दर्ज की। जीतने के बाद अधकांश चेयरमैन सत्ताधारी दल में ही शामिल हो गए।
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समस्याओं से निजात पाने का इंतजार
किशनी। नगर पंचायत किशनी के लोगों को 37 साल बाद भी समस्याओं से निजात पाने का इंतजार है। वर्षों पुरानी सब्जी मंडी की मांग अधूरी ही है। पहले सदर बाजार में लगने वाली सब्जी मंडी अब कई सालों से हरचंदपुर मार्ग पर खुले में लग रही है। मोहल्ला गढ़ी का मुख्य मार्ग 37 साल बाद भी बदहाल है।
पहली बार सभी दल मैदान में
किशनी। लंबे समय के बाद पहली बार नगर पंचायत के चुनाव में सभी दलों के उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। राजनीतिक दलों के चुनाव चिन्ह वाले पोस्टर उनकी मौजूदगी का लोगों को अहसास करा रहे हैं। लोगों ने तीन दशक बाद कांग्रेस का चुनाव चिन्ह मैदान में देखा है।