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कारगिल शहीद के परिवारीजन प्रशासन के बेरुखी से खफा

Tue, 25 Jul 2017 11:39 PM IST
Updated Tue, 25 Jul 2017 11:39 PM IST
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कारगिल शहीद के परिवारीजन प्रशासन के बेरुखी से खफा
मैनपुरी। वर्ष 1999 में हुए कारगिल युद्ध में देश की सीमा पर शहादत देने वाले जिले के सैनिकों को शासन और प्रशासन भूल चुका है। शहीदों के परिवारीजनों की समस्याओं का समाधान कराने का अधिकारियों के पास वक्त ही नहीं है। किसी के परिवारीजन शहीद द्वार बनवाने के लिए चक्कर लगा रहे हैं तो किसी का स्मारक बना है लेकिन उसके पास गंदगी पड़ी है इसकी सुध किसी को नहीं है।
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बुधवार को कारगिल दिवस है। बिछवां क्षेत्र के अंजनी निवासी शहीद प्रवीन यादव के परिवारीजनों का कहना है गांव में शहीद द्वार बनवाने के लिए वह चार साल से अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। कभी लोक निर्माण विभाग तो कभी एसडीएम कार्यालय से उनको केवल आश्वासन ही मिल रहे हैं। शहीद की पत्नी सुमन यादव कहती हैं कि शहीद परिवारों की समस्याओं का निराकरण नहीं होता है।
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बेवर के गांव गढ़िया घुटारा निवासी शहीद मुनीश कुमार यादव के पिता वेदराम सिंह तथा मां सुशीलादेवी गांव में रहती हैं। पत्नी मंजूदेवी भरथना में बच्चों के साथ रहती हैं। वह भरथना में ही गैस एजेंसी का संचालन करती हैं। शहीद के पिता का कहना है शहीद परिवारों को सम्मान देने का दावा करने वाले नेताओं की असलियत सामने आ चुकी है।
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औंछा क्षेत्र के नगला आंध्रा निवासी हेमचरन यादव के परिवार की भी कुछ यही कहानी है। पिता रामवृत्रा का कहना है शासन ने शहीद की याद में गांव में कालेज खोलने की बात कही थी। उन्होंने जमीन की व्यवस्था कर ली मगर अब अधिकारी सुनवाई नहीं कर रहे हैं। शहीद की पत्नी संगीता की 10 वर्ष पूर्व शिकोहाबाद में सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी है। बेटी शिल्पी नोएडा डाक्टरी की पढ़ाई कर रही है और बेटा शुभम फिरोजाबाद के जान एकेडमी स्कूल में पढ़ता है।

घिरोर के शाहजहांपुर निवासी सत्यदेव सिंह यादव 24 घुसपैठियों को मारने के बाद शहीद हुए थे। पत्नी विमला देवी पति की मृत्यु का सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाई और दो साल बाद ही मौत हो गई। पुत्र बॉबी यादव का बाबा पालसिंह यादव, दादी जावित्री देवी, चाचा शिवमंगल ने ही पालन पोषण किया है। शहादत के बाद मिली गैस एजेंसी का घिरोर में संचालन शहीद के पिता करते हैं।

किशनी के दिवनपुर साहिनी निवासी अमरुद्दीन की कम उम्र में शहादत के बाद पत्नी मोमना बेगम ने जिम्मेदारी संभाली। इस्लाम धर्म में मूर्ति स्थापना का रिवाज नहीं होने के कारण 17 वर्षों तक शहीद प्रतिमा ताबूत में रखी रही। तीन जुलाई 2017 को शहीद के बेटे आरिफ खान ने पिता की प्रतिमा को गैस एजेंसी के गेट पर लगवाया है।

अमरुद्दीन की पत्नी मोमना बेगम पाकिस्तान की घुसपैठ से बेहद खफा हैं। उनका कहना है पाकिस्तान हमेशा भारत के खिलाफ छद्म युद्ध लड़ता है। देश के जांबाज सैनिक अपनी शहादत देते हैं।


बेवर के गढ़िया घुटारा में बने शहीद मुनीष कुमार यादव के स्मारक पर अब परिवारीजन जाने से डरते हैं। वहां पर जुआरियों और शराबियों का कब्जा है। अंधेरा होते ही शराबी वहां जमा होते हैं। विरोध करने पर परिवारीजनों को सबक सिखाने की धमकी देते हैं। गांव में बनाई जाने वाली अवैध शराब की जखीरा तक वहां एकत्रित किया जाता है। पुलिस परिवारीजनों की सुनवाई नहीं करती है।
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