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आंकड़ों में सुधरी कुपोषण की सेहत
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कुपोषण (प्रतीकात्मक चित्र)
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एटा। कुपोषण के खिलाफ प्रदेश के सभी जिलों में अभियान चल रहा है। एटा में भी इसके लिए तेजी से कवायद की जा रही है। कुपोषण पूरी तरह से खत्म हो इसके लिए विभाग कोई कसर छोड़ना नहीं चाहता। कवायदों का परिणाम यह रहा कि आंकड़ों में कुपोषण का हाल जिले में सुधरा नजर आने लगा है, लेकिन हकीकत ठीक इसके उलट है। स्थिति यह है कि जिले में आज भी 17 हजार बच्चे कुपोषण का दंश झेल रहे हैं। इसके बाद भी विभाग कुपोषण की जंग जीतने का दावा कर रहा है। लेकिन यहां हालात कुछ ऐसे हैं कि कुपोषण की जंग में जीत पाना आसान नहीं है। पेश है रिपोर्ट...
कम नहीं हो रहा कुपोषण
जिले में कुपोषण का हाल योजनाओं की हकीकत बताने के लिए काफी है। जिले में 15655 बच्चे आंशिक कुपोषित और 2622 बच्चे अतिकुपोषित की श्रेणी में आते हैं। विभाग का मानना है कि संख्या कम हो गई है, लेकिन 17 हजार बच्चों का आंकड़ा कम नहीं आंका जा सकता।
नहीं हो रहा वजन दिवस
समय-समय पर कुपोषित बच्चों का वजन नापने और कुपोषण के स्तर को आंकने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों पर वजन दिवस का आयोजन किया जाता था। लेकिन बीते एक साल से आयोजन भी बंद हो गया।
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केंद्रों पर लटकते हैं ताले
कुपोषण को दूर करने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को समुचित आहार दिया जाता है, लेकिन जिले में अधिकांश केंद्र बंद नजर आते हैं। साफ है कि कर्मचारियों को अधिकारियों का खौफ नहीं है। समय-समय पर निरीक्षण के दौरान केंद्रों के हाल की तस्वीर अनियमितताएं दर्शा देती है।
कट गए हजारों नाम
हाल ही में शासन ने आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले बच्चों का आधार सत्यापन कराया था। जिसमें 35 हजार बच्चों को सूची से हटाया भी गया, लेकिन फिर भी कुपोषण का स्तर कम नहीं हुआ।
ये है हाल
परियोजना सामान्य आंशिक कुपोषित अति कुपोषित
मारहरा 16963 1653 282
अवागढ़ 17555 1273 284
जलेसर 17261 1535 273
निधौलीकलां 20643 1382 378
सकीट 19685 2131 330
शीतलपुर 26446 2434 300
जैथरा 21869 1947 281
अलीगंज 23029 2895 447
एटा अर्बन 12405 406 49
कुल 175856 15655 2622
इनका कहना है
कुपोषण को खत्म करने के लिए प्रयास चल रहे हैं। केंद्रों पर अनियमितता की सूचना पर लगातार छापेमारी की जा रही है। प्रयास है कि जनपद को पूरी तरह से कुपोषण मुक्त किया जाए। इसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को समय समय पर दिशा निर्देश दिए जाते हैं।
सत्यप्रकाश पांडेय, डीपीओ एटा
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कम नहीं हो रहा कुपोषण
जिले में कुपोषण का हाल योजनाओं की हकीकत बताने के लिए काफी है। जिले में 15655 बच्चे आंशिक कुपोषित और 2622 बच्चे अतिकुपोषित की श्रेणी में आते हैं। विभाग का मानना है कि संख्या कम हो गई है, लेकिन 17 हजार बच्चों का आंकड़ा कम नहीं आंका जा सकता।
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नहीं हो रहा वजन दिवस
समय-समय पर कुपोषित बच्चों का वजन नापने और कुपोषण के स्तर को आंकने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों पर वजन दिवस का आयोजन किया जाता था। लेकिन बीते एक साल से आयोजन भी बंद हो गया।
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केंद्रों पर लटकते हैं ताले
कुपोषण को दूर करने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को समुचित आहार दिया जाता है, लेकिन जिले में अधिकांश केंद्र बंद नजर आते हैं। साफ है कि कर्मचारियों को अधिकारियों का खौफ नहीं है। समय-समय पर निरीक्षण के दौरान केंद्रों के हाल की तस्वीर अनियमितताएं दर्शा देती है।
कट गए हजारों नाम
हाल ही में शासन ने आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले बच्चों का आधार सत्यापन कराया था। जिसमें 35 हजार बच्चों को सूची से हटाया भी गया, लेकिन फिर भी कुपोषण का स्तर कम नहीं हुआ।
ये है हाल
परियोजना सामान्य आंशिक कुपोषित अति कुपोषित
मारहरा 16963 1653 282
अवागढ़ 17555 1273 284
जलेसर 17261 1535 273
निधौलीकलां 20643 1382 378
सकीट 19685 2131 330
शीतलपुर 26446 2434 300
जैथरा 21869 1947 281
अलीगंज 23029 2895 447
एटा अर्बन 12405 406 49
कुल 175856 15655 2622
इनका कहना है
कुपोषण को खत्म करने के लिए प्रयास चल रहे हैं। केंद्रों पर अनियमितता की सूचना पर लगातार छापेमारी की जा रही है। प्रयास है कि जनपद को पूरी तरह से कुपोषण मुक्त किया जाए। इसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को समय समय पर दिशा निर्देश दिए जाते हैं।
सत्यप्रकाश पांडेय, डीपीओ एटा