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पर्यूषण पर्व : रत्नत्रय धर्म की उपासना की
Updated Tue, 25 Sep 2018 12:09 AM IST
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भोगांव। पर्यूषण पर्व के अंतिम तीन दिनों में मनाए जाने वाले रत्नत्रय व्रत के मौके पर जैन श्रद्धालुओं ने नगर के जैन मंदिरों में रत्नत्रय धर्म की पूजा अर्चना की।
श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर के स्वाध्याय भवन में आयोजित धर्मसभा में जैन विद्वान पंडित कैलाश चंद्र जैन अचल ने कहा कि जैन दर्शन में सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान तथा सम्यक चरित्र ये तीन रत्नत्रय धर्म हैं।
रत्नत्रय धर्म को धारण करके ही कोई व्यक्ति मोक्षमार्ग पर चल सकता है और पूर्ण सुखी बन सकता है। जैन मुनि ही पूर्ण रूप से सम्यक दर्शन, ज्ञान व चारित्र को धारण करते हैं और आत्मसाधना के उग्र पुरुषार्थ द्वारा मोक्ष प्राप्त कर अनंतसुख प्राप्त करते हैं।
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पूर्व में पंडित प्रांजल शास्त्री के निर्देशन में प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। पाठशाला में शामिल हुए बच्चों को पुरस्कार वितरित किए। इस दौरान नलिन कुमार जैन, जयगुप्त जैन, राकेश जैन, अमन कुमार जैन, संजय जैन रहे।
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श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर के स्वाध्याय भवन में आयोजित धर्मसभा में जैन विद्वान पंडित कैलाश चंद्र जैन अचल ने कहा कि जैन दर्शन में सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान तथा सम्यक चरित्र ये तीन रत्नत्रय धर्म हैं।
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रत्नत्रय धर्म को धारण करके ही कोई व्यक्ति मोक्षमार्ग पर चल सकता है और पूर्ण सुखी बन सकता है। जैन मुनि ही पूर्ण रूप से सम्यक दर्शन, ज्ञान व चारित्र को धारण करते हैं और आत्मसाधना के उग्र पुरुषार्थ द्वारा मोक्ष प्राप्त कर अनंतसुख प्राप्त करते हैं।
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पूर्व में पंडित प्रांजल शास्त्री के निर्देशन में प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। पाठशाला में शामिल हुए बच्चों को पुरस्कार वितरित किए। इस दौरान नलिन कुमार जैन, जयगुप्त जैन, राकेश जैन, अमन कुमार जैन, संजय जैन रहे।