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राज्यसभा चुनाव में हरिओम यादव नहीं कर पाएंगे मतदान
Updated Fri, 23 Mar 2018 12:05 AM IST
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फिरोजाबाद। राज्यसभा चुनाव के लिए शुक्रवार को मतदान है। एक-एक वोट की बड़ी कीमत इस चुनाव में है। इस बीच जेल में बंद सपा के सिरसागंज विधायक हरिओम यादव को मतदान में जाने की अनुमति नहीं मिल सकी है। हरिओम यादव की तरफ से मतदान की अनुमति के लिए न्यायालय में प्रार्थना पत्र देने के साथ-साथ डीएम कार्यालय और जेल अधीक्षक को भी प्रार्थना पत्र दिया गया।
सिरसागंज के सपा विधायक हरिओम यादव पांच मार्च से जेल में बंद हैं। अभी उन्हें जमानत नहीं मिल सकी है। शुक्रवार को राज्यसभा प्रत्याशियों के लिए मतदान है। विधानसभा अध्यक्ष की तरफ से हरिओम यादव को भी मतदान में भाग लेने की अनुमति दी गई हैै। चूंकि वह जेल में हैैं इस लिए उनके मतदान में भाग लेने का मामला फंसा हुआ है। हरिओम यादव की तरफ से उनके अधिवक्ता ने 19 मार्च को एडीजी प्रथम की अदालत में अर्जी देकर मतदान में भाग लेने की अनुमति मांगी थी।
21 मार्च को न्यायालय ने हरिओम यादव के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए कहा कि चूंकि मतदान की प्रक्रिया का आदेश शासन का है इस लिए इस संबंध में निर्णय जिला प्रशासन ले। गुरुवार को विधायक के अधिवक्ता की तरफ से पुन: अपील दायर की गई। गुरूवार को न्यायालय ने 21 तारीख को दिए गए तर्क को ही यथावत रखा। यानी विधायक हरिओम यादव राज्यसभा प्रत्याशियों के लिए शुक्रवार को होने वाले मतदान में हिस्सा लेंगे या नहीं इस पर अंतिम निर्णय जिला प्रशासन को ही करना है।
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हरिओम यादव के पुत्र राहुल यादव ने बताया कि न्यायालय ने जो भी निर्देश दिए उन्हें लेकर वह डीएम से मिले लेकिन जिलाधिकारी की तरफ से अभी कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है। डीएम नेहा शर्मा का कहना है कि विधायक हरिओम यादव न्यायिक हिरासत में है। न्यायालय से अभी उन्हें जमानत भी नहीं मिली है। उनसे जुड़ा मामला न्यायालय के ही अधीन है। विधायक की तरफ से दिया गया प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया गया है।
फिरोजाबाद। सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के समधी एवं सिरसागंज के सपा विधायक हरिओम यादव पांच मार्च से जेल में हैं। शिकोहाबाद थाना क्षेत्र के गांव भांड़री निवासी राजीव यादव उर्फ वाले ने नौ अक्तूबर 2015 को दर्ज कराए अभियोग में कहा था कि मुझे जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ने से रोकने के लिए ही विधायक सिरसागंज हरिओम यादव उनके बेटे विजय प्रताप उर्फ छोटू ने साजिश के तहत मेरे घर पर ही हमला कराया है। इसमें मेरे ताऊ रमेशचंद्र बोहरे पर जान लेना हमला किया गया।
इसमें इन दोनों के अलावा भांडरी के निवासी प्रशांत कुमार उर्फ लाला,दिनेश कुमार,विजयपाल उर्फ छोटे,सत्यप्रकाश एवं नगला मीर निवासी सुरेंद्र को नामजद किया था। पुलिस जांच में छह लोगों के निकाल ही दिए थे। जबकि विजय पाल उर्फ छोटे के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। न्यायालय ने 319 के तहत सिरसागंज के विधायक हरिओम यादव,उनके बेटे विजय प्रताप उर्फ छोटू सहित सभी छह लोगों को तलब किया था।
इसके खिलाफ विधायक सिरसागंज ने हाईकोर्ट में अपील की थी। लेकिन वहां से कोई राहत नहीं मिलने पर सुप्रीम कोर्ट तक दौड़ भी लगाई थी।सुप्रीम कोर्ट ने सात दिन के अंदर न्यायालय में ही हाजिर होने के आदेश दिए थे। पांच मार्च को विधायक ने अपर जिला जज प्रथम के यहां खुद सरेंडर किया था। इसी मामले में हरिओम यादव के पुत्र पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विजय प्रताप छोटू भी जेल में हैं।
अपहरण, धोखाधड़ी, चोरी, बलवा, जान लेवा हमला ,हत्या, आचार संहिता उल्लंघन, चुनाव में गड़बड़ी समेत अन्य गंभीर अपराधों में शामिल होने के चलते विधायक हरिओम यादव के खिलाफ एचएस खोली गई थी। लेकिन समाजवादी पार्टी सरकार में पुलिस अधिकारियों की सांठगांठ करके इसको नष्ट करा दिया गया था। उसके बाद तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय पांडेय के आदेश पर 20 जुलाई 2017 को पुन: हिस्ट्रीशीट को खोला गया। इस पूरे मामले में जांच चल रही है।
हरिओम यादव सपा से दूसरी बार विधायक बने हैं। सपा के बडे नेताओं के वह हमेशा करीबी रहे हैं। उनके जेल जाने के बाद सपा के साथ उनके रिश्तों में दरार आ गई। यह दरार जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए हुए मतदान को लेकर बढ़गई। सपा के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने आरोप लगाया कि हरिओम यादव और उनके पुत्र विजय प्रताप यादव छोटू ने पार्टी को धोखा दिया। पार्टी के जिला पंचायत सदस्यों को जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले भाजपा प्रत्याशी को करोड़ों की डील कर बेच दिया। सपा से हुई अनबन के बाद राज्यसभा चुनाव में विधायक हरिओम यादव का वोट किधर जाता इस पर भी कयास लगाए जा रहे थे।
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सिरसागंज के सपा विधायक हरिओम यादव पांच मार्च से जेल में बंद हैं। अभी उन्हें जमानत नहीं मिल सकी है। शुक्रवार को राज्यसभा प्रत्याशियों के लिए मतदान है। विधानसभा अध्यक्ष की तरफ से हरिओम यादव को भी मतदान में भाग लेने की अनुमति दी गई हैै। चूंकि वह जेल में हैैं इस लिए उनके मतदान में भाग लेने का मामला फंसा हुआ है। हरिओम यादव की तरफ से उनके अधिवक्ता ने 19 मार्च को एडीजी प्रथम की अदालत में अर्जी देकर मतदान में भाग लेने की अनुमति मांगी थी।
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21 मार्च को न्यायालय ने हरिओम यादव के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए कहा कि चूंकि मतदान की प्रक्रिया का आदेश शासन का है इस लिए इस संबंध में निर्णय जिला प्रशासन ले। गुरुवार को विधायक के अधिवक्ता की तरफ से पुन: अपील दायर की गई। गुरूवार को न्यायालय ने 21 तारीख को दिए गए तर्क को ही यथावत रखा। यानी विधायक हरिओम यादव राज्यसभा प्रत्याशियों के लिए शुक्रवार को होने वाले मतदान में हिस्सा लेंगे या नहीं इस पर अंतिम निर्णय जिला प्रशासन को ही करना है।
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हरिओम यादव के पुत्र राहुल यादव ने बताया कि न्यायालय ने जो भी निर्देश दिए उन्हें लेकर वह डीएम से मिले लेकिन जिलाधिकारी की तरफ से अभी कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है। डीएम नेहा शर्मा का कहना है कि विधायक हरिओम यादव न्यायिक हिरासत में है। न्यायालय से अभी उन्हें जमानत भी नहीं मिली है। उनसे जुड़ा मामला न्यायालय के ही अधीन है। विधायक की तरफ से दिया गया प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया गया है।
फिरोजाबाद। सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के समधी एवं सिरसागंज के सपा विधायक हरिओम यादव पांच मार्च से जेल में हैं। शिकोहाबाद थाना क्षेत्र के गांव भांड़री निवासी राजीव यादव उर्फ वाले ने नौ अक्तूबर 2015 को दर्ज कराए अभियोग में कहा था कि मुझे जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ने से रोकने के लिए ही विधायक सिरसागंज हरिओम यादव उनके बेटे विजय प्रताप उर्फ छोटू ने साजिश के तहत मेरे घर पर ही हमला कराया है। इसमें मेरे ताऊ रमेशचंद्र बोहरे पर जान लेना हमला किया गया।
इसमें इन दोनों के अलावा भांडरी के निवासी प्रशांत कुमार उर्फ लाला,दिनेश कुमार,विजयपाल उर्फ छोटे,सत्यप्रकाश एवं नगला मीर निवासी सुरेंद्र को नामजद किया था। पुलिस जांच में छह लोगों के निकाल ही दिए थे। जबकि विजय पाल उर्फ छोटे के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। न्यायालय ने 319 के तहत सिरसागंज के विधायक हरिओम यादव,उनके बेटे विजय प्रताप उर्फ छोटू सहित सभी छह लोगों को तलब किया था।
इसके खिलाफ विधायक सिरसागंज ने हाईकोर्ट में अपील की थी। लेकिन वहां से कोई राहत नहीं मिलने पर सुप्रीम कोर्ट तक दौड़ भी लगाई थी।सुप्रीम कोर्ट ने सात दिन के अंदर न्यायालय में ही हाजिर होने के आदेश दिए थे। पांच मार्च को विधायक ने अपर जिला जज प्रथम के यहां खुद सरेंडर किया था। इसी मामले में हरिओम यादव के पुत्र पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विजय प्रताप छोटू भी जेल में हैं।
अपहरण, धोखाधड़ी, चोरी, बलवा, जान लेवा हमला ,हत्या, आचार संहिता उल्लंघन, चुनाव में गड़बड़ी समेत अन्य गंभीर अपराधों में शामिल होने के चलते विधायक हरिओम यादव के खिलाफ एचएस खोली गई थी। लेकिन समाजवादी पार्टी सरकार में पुलिस अधिकारियों की सांठगांठ करके इसको नष्ट करा दिया गया था। उसके बाद तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय पांडेय के आदेश पर 20 जुलाई 2017 को पुन: हिस्ट्रीशीट को खोला गया। इस पूरे मामले में जांच चल रही है।
हरिओम यादव सपा से दूसरी बार विधायक बने हैं। सपा के बडे नेताओं के वह हमेशा करीबी रहे हैं। उनके जेल जाने के बाद सपा के साथ उनके रिश्तों में दरार आ गई। यह दरार जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए हुए मतदान को लेकर बढ़गई। सपा के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने आरोप लगाया कि हरिओम यादव और उनके पुत्र विजय प्रताप यादव छोटू ने पार्टी को धोखा दिया। पार्टी के जिला पंचायत सदस्यों को जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले भाजपा प्रत्याशी को करोड़ों की डील कर बेच दिया। सपा से हुई अनबन के बाद राज्यसभा चुनाव में विधायक हरिओम यादव का वोट किधर जाता इस पर भी कयास लगाए जा रहे थे।