{"_id":"5a60d9ed4f1c1b68268b50b2","slug":"11516296685-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गांव की छतों पर मंडरा रहा मौत का साया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गांव की छतों पर मंडरा रहा मौत का साया
Updated Thu, 18 Jan 2018 11:39 PM IST
विज्ञापन
स्कूल में टूटकर गिरा एचटी लाइन का तार, बाल-बाल बचे बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एटा। निधौलीकलां क्षेत्र के गांव नगला बंदी में लोगों की छतों पर मौत का साया मंडरा रहा है। हाईटेंशन लाइन के नंगे तार ग्रामीणों के मकान से सटे है। विभागीय लापरवाही के चलते गांव में हाईटेंशन लाइन के नीचे गार्डिंग तक नहीं कराई गई है। ऐसे में लोगों को हादसे का अंदेशा है।
बिजली विभाग की लापरवाही के चलते लोगों की जिंदगी खतरे में है। थाना निधौलीकलां क्षेत्र के गांव नगला बंदी में छात्रा ज्ञान माला की मौत के बाद भी में एक दर्जन से अधिक घरों पर मौत के तार मंडरा रहे है। गांव में बने मकानों की छतों से बिल्कुल सटाकर हाईटेंशन लाइन लगाई गई है। ग्रामीणों ने बताया कि तारों को हटवाने के लिए बिजली विभाग के अधिकारियों से कई बार शिकायत दर्ज कराई गई है लेकिन इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। गांव के मुनेश ने बताया कि पिछले दिनों बिजली विभाग ने शिकायत के बाद हाईटेंशन लाइन की जगह केविल लाइन लगवाने के लिए सर्वे किया था। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। यदि बिजली विभाग इस पर गौर करता तो शायद छात्रा की मौत का हादसा नहीं होता।
विज्ञापन
बिजली विभाग की लापरवाही के चलते लोगों की जिंदगी खतरे में है। थाना निधौलीकलां क्षेत्र के गांव नगला बंदी में छात्रा ज्ञान माला की मौत के बाद भी में एक दर्जन से अधिक घरों पर मौत के तार मंडरा रहे है। गांव में बने मकानों की छतों से बिल्कुल सटाकर हाईटेंशन लाइन लगाई गई है। ग्रामीणों ने बताया कि तारों को हटवाने के लिए बिजली विभाग के अधिकारियों से कई बार शिकायत दर्ज कराई गई है लेकिन इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। गांव के मुनेश ने बताया कि पिछले दिनों बिजली विभाग ने शिकायत के बाद हाईटेंशन लाइन की जगह केविल लाइन लगवाने के लिए सर्वे किया था। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। यदि बिजली विभाग इस पर गौर करता तो शायद छात्रा की मौत का हादसा नहीं होता।
विज्ञापन