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पेंट्स की कीमतों में भी चढ़ा महंगाई का रंग
Updated Sun, 15 Oct 2017 11:45 PM IST
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पेंट की दुकान
- फोटो : amar ujala
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मैनपुरी। रोशनी के त्योहार दिवाली की तैयारियां घर-घर शुरू हैं। घरों को आकर्षक बनाने में लोग जुटे हैं। पर, रंगाई-पुताई पर भी महंगाई का रंग चढ़ा हुआ है। इस बार पेंट्स के दामों में 20 से 25 फीसदी तक इजाफा हुआ है। पर, दिवाली आते ही लोग दीवारें, खिड़की, दरवाजे चमकाने को इसकी खरीदारी कर रहे हैं। इस दौरान लोग प्लास्टिक पेंट ही ज्यादा खरीद रहे हैं। इसमें भी गहरा रंग पहली पसंद बना हुआ है।
दीपावली का त्योहार नजदीक आ पहंचा है। ऐसे में रंगों के बाजार में हलचल बढ़ गई है। लोगों ने घरों में रंगाई-पुताई कराने के लिए पेंट्स की खरीदारी शुरू कर दी है। पेंट्स विक्रेताओं के अनुसार पिछले साल की अपेक्षा इस साल पेंट्स, प्लास्टिक कलर्स आदि के दामाें में 20-25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। इसका कारण जीएसटी लगना है।
विक्रेताओं के अनुसार नई पीढ़ी अलग चमक और भिन्न और गहरे रंगों को पसंद कर रहा है। इन रंगों से कमरों में रोशनी की अधिकता रहती है। दुकानदारों के मुताबिक प्लास्टिक पेंट हल्की रोशनी में भी घर को चमक से भर देते हैं।
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वहीं दीवार, खिड़की और दरवाजे के रंग-रोगन का मेहनताना पिछले वर्ष 250 से 300 रुपये प्रतिदिन तक था। इस बार यह 350 तक पहुंच गया है। त्योहार के दौरान बढ़ते काम के चलते मजदूरों की मारामारी भी बनी हुई है।
कारोबारी दीपांशु गुप्ता कहते हैं कि बदले दौर में लोगों की पसंद प्लास्टिक पेंट बन गया है। संपन्न एवं स्तरीय लोग परंपरागत रंगों से हटकर मनचाहा रंग बनवा रहे हैं। पेंट कारोबार के लिए नवरात्र से दीपावली तक का समय अच्छा होता है।
विक्रेता आशीष कुमार के मुताबिक गत वर्ष की तुलना में रंगाई-पुताई का काम 25 प्रतिशत तक महंगा हो गया है। पेट्रो पदार्थों की मूल्य वृद्धि के चलते डिस्टेंपर, इमल्सन पेंट, इनेमिल, प्राइमर आदि के दामों में इजाफा हुआ है। इतना ही नहीं संबंधित अन्य सामान और मेहनताना भी महंगा हुआ है।
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दीपावली का त्योहार नजदीक आ पहंचा है। ऐसे में रंगों के बाजार में हलचल बढ़ गई है। लोगों ने घरों में रंगाई-पुताई कराने के लिए पेंट्स की खरीदारी शुरू कर दी है। पेंट्स विक्रेताओं के अनुसार पिछले साल की अपेक्षा इस साल पेंट्स, प्लास्टिक कलर्स आदि के दामाें में 20-25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। इसका कारण जीएसटी लगना है।
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विक्रेताओं के अनुसार नई पीढ़ी अलग चमक और भिन्न और गहरे रंगों को पसंद कर रहा है। इन रंगों से कमरों में रोशनी की अधिकता रहती है। दुकानदारों के मुताबिक प्लास्टिक पेंट हल्की रोशनी में भी घर को चमक से भर देते हैं।
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वहीं दीवार, खिड़की और दरवाजे के रंग-रोगन का मेहनताना पिछले वर्ष 250 से 300 रुपये प्रतिदिन तक था। इस बार यह 350 तक पहुंच गया है। त्योहार के दौरान बढ़ते काम के चलते मजदूरों की मारामारी भी बनी हुई है।
कारोबारी दीपांशु गुप्ता कहते हैं कि बदले दौर में लोगों की पसंद प्लास्टिक पेंट बन गया है। संपन्न एवं स्तरीय लोग परंपरागत रंगों से हटकर मनचाहा रंग बनवा रहे हैं। पेंट कारोबार के लिए नवरात्र से दीपावली तक का समय अच्छा होता है।
विक्रेता आशीष कुमार के मुताबिक गत वर्ष की तुलना में रंगाई-पुताई का काम 25 प्रतिशत तक महंगा हो गया है। पेट्रो पदार्थों की मूल्य वृद्धि के चलते डिस्टेंपर, इमल्सन पेंट, इनेमिल, प्राइमर आदि के दामों में इजाफा हुआ है। इतना ही नहीं संबंधित अन्य सामान और मेहनताना भी महंगा हुआ है।