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बीईओ ने नहीं भेजी विज्ञान किट खरीद की सूचना
Updated Sun, 09 Jul 2017 11:14 PM IST
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- फोटो : डेमो पिक
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मैनपुरी। उच्च प्राथमिक विद्यालयों के छात्रों को विज्ञान के प्रयोग सिखाने के लिए किट खरीदी गई हैं। अभी तक जिले के तीन ब्लाक के खंड शिक्षाधिकारियों ने विज्ञान किट खरीदने की सूचना नहीं भेजी है।
जिले में संचालित 553 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शासन की ओर से विज्ञान किट उपलब्ध कराई गई थीं। इसके लिए विभाग की तरफ से प्रत्येक विद्यालय को आठ हजार रुपये दिए इसके पीछे मंशा छात्रों को विज्ञान के प्रयोग की जानकारी देना था। जो विज्ञान किट स्कूलों को मिली हैं, उनमें आधे से अधिक सामान टूटा है। बाकी का बचा आधा सामान भी कार्य नहीं कर रहा है। खरीद से पहले कंपनियों ने प्रधानाध्यापक, संकुल प्रभारी और खंड शिक्षा अधिकारियों के सामने प्रेजेंटेशन दिया था। नियमानुसार, अधिकारियों को उसी कंपनी का चयन किया जाना था, जिसका सामान बेहतर हो। सर्वसम्मति से कंपनी का चुनाव भी किया गया। इसके बाद भी किटों में लापरवाही की गई है।
वहीं कई बार खंड शिक्षाधिकारियों से विज्ञान किट खरीद की सूचना मांगी थी, लेकिन अभी तक ब्लाक करहल, बरनाहल, किशनी, मैनपुरी के खंड शिक्षाधिकारियों ने इसकी सूचना नहीं दी है। जबकि यह सूचना 12 अप्रैल तक जमा करनी थी। डीसी प्रशिक्षण बृजेश शाक्य का कहना है सूचना न देने के चलते शासन को उपलब्ध कराने में देरी हो रही है।
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जिले में संचालित 553 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शासन की ओर से विज्ञान किट उपलब्ध कराई गई थीं। इसके लिए विभाग की तरफ से प्रत्येक विद्यालय को आठ हजार रुपये दिए इसके पीछे मंशा छात्रों को विज्ञान के प्रयोग की जानकारी देना था। जो विज्ञान किट स्कूलों को मिली हैं, उनमें आधे से अधिक सामान टूटा है। बाकी का बचा आधा सामान भी कार्य नहीं कर रहा है। खरीद से पहले कंपनियों ने प्रधानाध्यापक, संकुल प्रभारी और खंड शिक्षा अधिकारियों के सामने प्रेजेंटेशन दिया था। नियमानुसार, अधिकारियों को उसी कंपनी का चयन किया जाना था, जिसका सामान बेहतर हो। सर्वसम्मति से कंपनी का चुनाव भी किया गया। इसके बाद भी किटों में लापरवाही की गई है।
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वहीं कई बार खंड शिक्षाधिकारियों से विज्ञान किट खरीद की सूचना मांगी थी, लेकिन अभी तक ब्लाक करहल, बरनाहल, किशनी, मैनपुरी के खंड शिक्षाधिकारियों ने इसकी सूचना नहीं दी है। जबकि यह सूचना 12 अप्रैल तक जमा करनी थी। डीसी प्रशिक्षण बृजेश शाक्य का कहना है सूचना न देने के चलते शासन को उपलब्ध कराने में देरी हो रही है।
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