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लंबे को छोटी, पतले को बांटी ढीली यूनीफार्म
Updated Fri, 11 Aug 2017 12:07 AM IST
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बच्चे
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फिरोजाबाद। परिषदीय स्कूलों में बच्चों व अभिभावक यूनीफार्म वितरण में खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। बिना नाप की यूनीफार्म उन्हें दे दी गई। कहीं शर्ट बड़ी है तो कहीं पैंट।
न्याय पंचायत स्तर पर नोडल अधिकारी तैनात किए। दावा किया गया कि सिली-सिलाई ड्रेस की जगह बच्चों के नाप लेकर सिलाकर ही यूनीफार्म बांटी जाएगी। लेकिन वितरण में यह दावे फेल हो गए। ठेकेदारों और हेडमास्टरों की सेटिंग के चलते क्षेत्र में गुणवत्ता विहीन ड्रेसों का वितरण जारी है। बच्चों को बिना नाप की ड्रेस बांटी है। गुरुजी ने बच्चों से कह दिया है कि घर पर फिटिंग करा लें।
प्राथमिक विद्यालय दबरई में बीएसए ने खुद अपने हाथों बच्चों का ड्रेस का वितरण किया। लेकिन यहां बच्चे छोटी-बढ़ी ड्रेस पहने देखे जा सकते हैं। यही हाल अन्य प्राथमिक विद्यालयों का है। जहां ड्रेस बिना गुणवत्ता और बिना नाप के बांट दी गई है।
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जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. सचिदानंद यादव ने बताया कि हमने समिति बना रखी है, जो स्कूलों मेें जाकर ड्रेस चेक करेगी। अगर गड़गड़ी हुई तो हेडमास्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
चार सौ रुपये मिलता है, 300 में बन जाती है ड्रेस
फिरोजाबाद। शासन प्रति बच्चों को दो जोड़ी ड्रेस उपलब्ध कराने के लिए करीब चार सौ रुपये देता है। इसमें रेडीमेड ड्रेस 120 से रुपये में आसानी से मिल जाती है। 150 रुपये में गुणवत्ता अच्छी मिल जाती है। यानि एक ड्रेस पर 80 से 50 रुपये आसानी से बच जाते हैं।
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न्याय पंचायत स्तर पर नोडल अधिकारी तैनात किए। दावा किया गया कि सिली-सिलाई ड्रेस की जगह बच्चों के नाप लेकर सिलाकर ही यूनीफार्म बांटी जाएगी। लेकिन वितरण में यह दावे फेल हो गए। ठेकेदारों और हेडमास्टरों की सेटिंग के चलते क्षेत्र में गुणवत्ता विहीन ड्रेसों का वितरण जारी है। बच्चों को बिना नाप की ड्रेस बांटी है। गुरुजी ने बच्चों से कह दिया है कि घर पर फिटिंग करा लें।
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प्राथमिक विद्यालय दबरई में बीएसए ने खुद अपने हाथों बच्चों का ड्रेस का वितरण किया। लेकिन यहां बच्चे छोटी-बढ़ी ड्रेस पहने देखे जा सकते हैं। यही हाल अन्य प्राथमिक विद्यालयों का है। जहां ड्रेस बिना गुणवत्ता और बिना नाप के बांट दी गई है।
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जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. सचिदानंद यादव ने बताया कि हमने समिति बना रखी है, जो स्कूलों मेें जाकर ड्रेस चेक करेगी। अगर गड़गड़ी हुई तो हेडमास्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
चार सौ रुपये मिलता है, 300 में बन जाती है ड्रेस
फिरोजाबाद। शासन प्रति बच्चों को दो जोड़ी ड्रेस उपलब्ध कराने के लिए करीब चार सौ रुपये देता है। इसमें रेडीमेड ड्रेस 120 से रुपये में आसानी से मिल जाती है। 150 रुपये में गुणवत्ता अच्छी मिल जाती है। यानि एक ड्रेस पर 80 से 50 रुपये आसानी से बच जाते हैं।