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चंबल नदी में पहुंचे 1100 नन्हे कछुए
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बाह। कछुआ दिवस पर सोमवार को चंबल सेंक्च्युरी की बाह रेंज में हैचिंग से जन्मे 1100 कछुए चंबल के कुनबे में शामिल हो गए हैं। अच्छी बात ये है कि लुप्तप्राय कछुओं की साल और ढोर प्रजाति के बच्चे भी नदी में पहुंचे हैं।
आईयूसीएन (इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजरवेशन ऑफ नेचर) की लुप्तप्राय प्रजाति में शामिल कछुओं की ढोर प्रजाति नेपाल, बांग्लादेश और बर्मा में बची है।
मार्च अप्रैल में चंबल नदी के विभिन्न घाटों पर कछुओं की नेस्टिंग हुई थी। इन्हें चिन्हित कर वन विभाग ने जीपीएस से लोकेशन ट्रेस की थी। प्रत्येक नेस्ट में कछुओं ने 25 से 30 अंडे दिए थे। सोमवार को नंदगवां में 500, चीकनीपुरा में 350, मऊ में 150, कछियारा में 100 बच्चों का जन्म हुआ। रेंजर आरके सिंह राठौड़ के नेतृत्व में वनकर्मियों की निगरानी में अंडों से निकले बच्चों को नदी में पहुंचाया गया।
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आईयूसीएन (इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजरवेशन ऑफ नेचर) की लुप्तप्राय प्रजाति में शामिल कछुओं की ढोर प्रजाति नेपाल, बांग्लादेश और बर्मा में बची है।
मार्च अप्रैल में चंबल नदी के विभिन्न घाटों पर कछुओं की नेस्टिंग हुई थी। इन्हें चिन्हित कर वन विभाग ने जीपीएस से लोकेशन ट्रेस की थी। प्रत्येक नेस्ट में कछुओं ने 25 से 30 अंडे दिए थे। सोमवार को नंदगवां में 500, चीकनीपुरा में 350, मऊ में 150, कछियारा में 100 बच्चों का जन्म हुआ। रेंजर आरके सिंह राठौड़ के नेतृत्व में वनकर्मियों की निगरानी में अंडों से निकले बच्चों को नदी में पहुंचाया गया।
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