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नगर निगम में डीजल घोटाले की चार अधिकारी करेंगे जांच

Wed, 26 Dec 2018 11:14 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Wed, 26 Dec 2018 11:14 PM IST
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नगर निगम में डीजल घोटाले की चार अधिकारी करेंगे  जांच
फिरोजाबाद। नगर निगम में डीजल के नाम पर हुए लाखों के घोटाले पर डीएम ने जांच कमेटी बिठा दी है, जिससे नगर निगम अधिकारी व कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है। नामित अफसरों द्वारा डीजल के खेल की गंभीरता से जांच की गई तो कई अफसरों की गर्दन फंस सकती हैं।
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नगर निगम में सालों से डीजल के नाम पर बड़ा खेल चल रहा है। शहर की सफाई, पेयजल व प्रकाश व्यवस्था में लगे वाहनों की खपत के नाम पर हर माह लाखों के बारे न्यारे किए जा रहे हैं। नगर निगम बनने से पहले जहां डीजल की खपत 500-700 लीटर थी, वह नगर निगम का चुनाव होने के बाद 1000-1200 लीटर तक पहुंच गई।
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नगर आयुक्त के रूप में पीसीएस अफसर भी तैनात रहे, परंतु वह डीजल के खेल को नहीं पकड़ सके। नगर आयुक्त रविंद्रपाल सिंह के लखनऊ स्थानांतरण के बाद डीएम नेहा शर्मा को नगर आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार है। डीएम के समक्ष जब डीजल आपूर्ति के सापेक्ष 21 लाख के बिल प्रस्तुत किए गए, जिसे देख वह खुद हैरत में पड़ गईं। डीएम ने पहले नगर निगम से विभाग वाइज डीजल की खपत की रिपोर्ट मांगी गई।
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इससे तैयार करने में संबंधित अफसरों के पसीने छूट गए। डीएम के सामने जिम्मेदार अफसर डीजल की खपत को लेकर सही जवाब तक नहीं दे सके। इससे स्पष्ट था कि डीजल के नाम पर लंबे समय से बड़ा खेल चल रहा है। डीएम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए छह माह में खर्च हुए डीजल की जांच के लिए चार सदस्यीय जांच कमेटी बिठा दी है। जांच कमेटी में वरिष्ठ कोषाधिकारी, डिप्टी कलेक्टर मुख्यालय देवेंद्रपाल सिंह, जिलापूर्ति अधिकारी तथा लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा को जिम्मेदारी सौंपी है।

डीएम नेहा शर्मा ने चार सदस्यीय जांच कमेटी को निर्देश दिए हैं कि नगर निगम में विगत छह माह में विभिन्न कार्यों में खर्च किए गए डीजल का आंतरिक ऑडिट किया जाएगा। आडिट के दौरान नगर निगम के विभिन्न विभागों द्वारा लिए गए डीजल के उपयोग को देखा जाए। जिन वाहनों में डीजल का उपयोग दिखाया गया है, वह वास्तव में चले।


उनके द्वारा क्या कार्य किया गया, उनका कार्य औचित्यपूर्ण है अथवा नहीं। इसका किसके द्वारा सत्यापन किया गया। क्या वाहनों की लॉगबुक भरी जा रही है, उसे सक्षम स्तर से सत्यापित किया जा रहा है। कहीं वह वाहन खराबी के दौरान वर्कशॉप में तो नहीं खड़े। डीएम ने उक्त बिंदुओं पर जांच कर 10 दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
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