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शीतगृहों में भरे आलू की निकासी के लिए नहीं पहुंच रहे किसान

Tue, 28 Nov 2017 11:43 PM IST
Updated Tue, 28 Nov 2017 11:43 PM IST
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शीतगृहों में भरे आलू की निकासी के लिए नहीं पहुंच रहे किसान
potato - फोटो : आलू
जलेसर। शीतगृहों से आलू की निकासी न होने से जलेसर नगर के पांच कोल्ड स्टोर में करीब दो लाख तीस हजार पैकेट अभी निकासी का इंतजार कर रहे हैं। बावजूद इसके आलू किसान आलू निकालने को तैयार नहीं हैं। सामान्य आलू 20 से 100 और शुगर फ्री आलू 100 से 180 रुपये पैकेट बिक रहा है।
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आलू किसान और व्यापारियों को गत वर्ष नोटबंदी के चलते भारी नुकसान उठाना पड़ा था। वहीं मौजूदा समय में जीएसटी और आलू की लगातार बंपर पैदावार पहले पंजाब, फिर कर्नाटक, उसके बाद बंगाल के होने की वजह से स्थानीय आलू के भाव में चमक नहीं आने दी। आलू की खरीद के दामों के भाव नहीं आने के कारण किसानों और व्यापारियों ने अपने आलू की निकासी समय समय पर नहीं की।
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इसके चलते मौजूदा समय मे शीतगृहों में आलू की भरमार है। आलम यह है कि नगर के पांच कोल्ड स्टोर में दो लाख तीस हजार बैग आलू है औैर निकासी पांचों शीतगृह से दो हजार बैग की हो रही है। इसके हिसाब से तो इस आलू को निकलने में चार माह लग जाएंगे। जबकि नये आलू की आवक ही तीन माह में आएगी।
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आलू के मंदी का शिकार होने से जहां किसान को अपने माल का दाम नहीं मिल पा रहा है। वहीं शीतगृह स्वामियों को किराये का भारी नुकसान उठाने को मजबूर होना पड़ रहा है।

शीतगृहों में आलू की स्थिति

माया कोल्ड स्टोरेज मे 25 हजार बैग, बाबा कोल्ड स्टोरेज मे 25 हजार, विद्या कोल्ड स्टोरेज 70 हजार, कोठीवाल कोल्ड स्टोरेज में 70 हजार और अग्रवाल कोल्ड स्टोरेज 30 हजार बैग है।

आलू किसानों को तो लागत मूल्य वापस होना तो दूर उन्हें एक पैसा भी नहीं मिला। वहीं शीतगृह स्वामी को बचोरी की कीमत भी नहीं मिल पा रही। किराया मिलना तो दूर की बात है।
- देवेन्द्र वार्ष्णेय, माया कोल्ड स्टोरेज

पंजाब कर्नाटक और बंगाल के आलू की जबरदस्त पैदावार के चलते मौजूदा वर्ष में आलू मंदी का शिकार हो गया है। जिसके चलते किसान और शीतगृह स्वामियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

- रविकांत गर्ग, बाबा कोल्ड स्टोरेज

मौजूदा वर्ष की सी हालत यदि अगले वर्ष भी हो गई तो एक दो नहीं हजारों किसान आत्महत्या के लिए मजबूर होंगे। मौजूदा वर्ष में कुछ मिला नहीं और आगामी वर्ष के लिए जेवर गिरवी रखकर खेती के लिए यूरिया डाई आदि की व्यवस्था की है।
- सुग्रीव सिंह किसान सालवाहनपुर
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