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हिंदी ने बनाया नायक, अंग्रेजी बनी खलनायक
Updated Fri, 09 Jun 2017 11:19 PM IST
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रिजल्ट के बाद खुशी मनाती छात्राएं
- फोटो : अमर उजाला
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मथुरा। यूपी बोर्ड की परीक्षा में जिन छात्रों ने विज्ञान और गणित पर ध्यान दिया वो अव्वल रहे। परीक्षा का परिणाम यही कहता है। इस बार हिंदी में भी अप्रत्याशित अंक आए हैं। अंग्रेजी, जीवविज्ञान, समाजशास्त्र और इतिहास ने विद्यार्थियों के परिणाम पर बुरा असर डाला है।
शुक्रवार को यूपी बोर्ड के इंटरमीडिएट और हाईस्कूल का परीक्षा परिणाम छात्रों के हाथ में आया तो वो खुशी के साथ उछल पड़े। बेहतर प्रतिशत के साथ पास होने वाले छात्र-छात्राओं में एक बात समान रही, जिन बच्चों ने विज्ञान के विषय रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान, गणित पर ध्यान दिया उन्होंने आसानी के साथ बेहतर प्रतिशत हासिल कर लिए।
शिक्षक अयोध्या प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि इस बार के परीक्षा परिणाम में विज्ञान और गणित के विषयों में शत-प्रतिशत अंकों ने बच्चों को उम्मीद से ज्यादा सफलता दिलाई है। इसके अलावा प्रयोगात्मक विषय व्यावसायिक शिक्षा, संगीत और होम साइंस ने बच्चों को मनचाहा अंक प्रतिशत दिलाया।
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सेठ बीएन पोद्दार इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डा. अजय कृष्ण सारस्वत ने बताया कि इस बार हिंदी में भी छात्रों ने चौंकाने वाले अंक हासिल किए हैं। इसकी वजह हिंदी का बदला पाठ्यक्रम और प्रश्नपत्र का तरीका है। हां, अंग्रेजी में बच्चों को जरूर कम ही अंक मिले हैं। लेकिन यदि उन्होंने सटीक लिखा है तो बेहतर अंक हासिल हुए है। जीवविज्ञान और अन्य समान विषयों ने अंकों का ग्राफ गिराया है।
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शुक्रवार को यूपी बोर्ड के इंटरमीडिएट और हाईस्कूल का परीक्षा परिणाम छात्रों के हाथ में आया तो वो खुशी के साथ उछल पड़े। बेहतर प्रतिशत के साथ पास होने वाले छात्र-छात्राओं में एक बात समान रही, जिन बच्चों ने विज्ञान के विषय रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान, गणित पर ध्यान दिया उन्होंने आसानी के साथ बेहतर प्रतिशत हासिल कर लिए।
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शिक्षक अयोध्या प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि इस बार के परीक्षा परिणाम में विज्ञान और गणित के विषयों में शत-प्रतिशत अंकों ने बच्चों को उम्मीद से ज्यादा सफलता दिलाई है। इसके अलावा प्रयोगात्मक विषय व्यावसायिक शिक्षा, संगीत और होम साइंस ने बच्चों को मनचाहा अंक प्रतिशत दिलाया।
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सेठ बीएन पोद्दार इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डा. अजय कृष्ण सारस्वत ने बताया कि इस बार हिंदी में भी छात्रों ने चौंकाने वाले अंक हासिल किए हैं। इसकी वजह हिंदी का बदला पाठ्यक्रम और प्रश्नपत्र का तरीका है। हां, अंग्रेजी में बच्चों को जरूर कम ही अंक मिले हैं। लेकिन यदि उन्होंने सटीक लिखा है तो बेहतर अंक हासिल हुए है। जीवविज्ञान और अन्य समान विषयों ने अंकों का ग्राफ गिराया है।