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चेन्नई से लिया अचूक मंत्र, अब चमकेगी लखनऊ मेट्रो
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
Updated Tue, 09 Jul 2013 10:27 AM IST
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मेट्रो सेल के अधिकारी काम को तेज रफ्तार में पूरा कराने के लिए चेन्नई से मंत्र सीखकर आ गए हैं।
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वहां पूरे रूट को 10 पॉकेट में बांटकर सिर्फ दो साल में करीब 60 फीसदी काम पूरा कर लिया गया है।
कुछ इसी तरह की व्यवस्था राजधानी में भी लागू करा जल्द से जल्द परियोजना पूरी कराई जाएगी। इसके अलावा अधिकारियों ने चेन्नई में जापानी कंपनी जाइका से ऋण लेने की प्रक्रिया को भी समझा है।
तीन दिन पहले गए थे चेन्नई
लखनऊ मेट्रो सेल के प्रतिनिधि के तौर पर प्राधिकरण के अधिशासी अभियंता ओपी मिश्र और नगर नियोजक रवि जैन तीन दिन पहले चेन्नई गए थे। वहां डीएमआरसी मेट्रो रेल परियोजना का ढांचा खड़ा करने में लगा हुआ है। लखनऊ में जो वित्तीय प्रबंधन मेट्रो रेल के लिए चुना जा रहा है, कमोवेश वैसा ही चेन्नई में भी है।
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खास योजना के तहत होगा काम
वापस लौटने के बाद अधिकारियों ने बताया कि चेन्नई में एक खास रणनीति के तहत काम कराया जा रहा है। वहां 45 किलोमीटर के स्ट्रेच को 10 एजेंसियों के बीच बांट दिया गया है। इस वजह से काम काफी तेज हो रहा है। 2011 में काम का आगाज हुआ था और 2013 में यह 60 फीसदी तक पूरा कर लिया गया है। अब कुछ ऐसा ही लखनऊ के लिए भी सोचा जा रहा है।
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जाइका से लें ऋण तो उन्हीं से कोच भी खरीदें
परियोजना के लिए एक प्रतिशत लोन का ऑफर देने वाली कंपनी की एक शर्त भी है। चेन्नई में इसी शर्त पर ऋण दिया गया है। जाइका का एग्रीमेंट होता है कि अगर वे ऋण देंगे तो उनसे ही मेट्रो के कोच भी खरीदे जाएं।
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कंपनी ऋण की एवज में कोच खरीदने के विकल्प एसपीवी (स्पेशल पर्पज व्हीकल) के लिए बंद कर देती है, इसलिए एलएमआरसी जाइका से ऋण लेने से पहले इस पर भी जरूर ध्यान देगा।