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मेट्रो के लिए अब संसाधन जुटाने की कवायद
Lucknow
Updated Tue, 18 Jun 2013 05:30 AM IST
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लखनऊ। मेट्रो रेल संचालन को लेकर कवायद बहुत तेजी से जारी है। इस संबंध में कंसलटेंट के प्रजेंटेशन भी शुरू हो गए हैं। हैदराबाद और चेन्नई में मेट्रो रेल संचालन में मदद करने वाली कंपनी बारसिल के प्रतिनिधियों ने प्रस्तुतिकरण किया। भविष्य में मेट्रो निर्माण के दौरान जब कंपनी चुनी जाएगी, तब उसकी टेंडर प्रक्रिया में इसी तरह की कंपनियां मदद करेगी। एसपीवी को कंपनी एक्ट के तहत रजिस्टर्ड कराया जा रहा है। एसपीवी और मेट्रो के लिए बनाए पूरे प्रोजेक्ट को अंगीकार करने के लिए अगले सप्ताह कैबिनेट में रखा जाएगा। मेट्रो सेल के प्रतिनिधियों की मीटिंग का आयोजन सोमवार को आवास बंधु स्थित सेल के ऑफिस में किया गया। जहां बारसिल नाम की कंपनी ने मेट्रो सेल की मदद की इच्छा जाहिर की। इस कंपनी ने बताया कि किस तरह से भविष्य में मेट्रो रेल के लिए वह मदद कर सकते हैं। इसमें फंड जुटाने के लिए कहां कहां से विकल्प खोजे जा सकते हैं। टेंडर ड्राफ्टिंग किस तरह की होगी। नियम और शर्तें कैसी रखी जाएं, इन सबका ख्याल रखा जाएगा। इन्हीं सब बिंदुओं पर कंपनी ने अपना प्रस्तुतीकरण किया था।
कंपनी एक्ट के तहत बनेगी एसपीवी ः कंपनी एक्ट के तहत एसपीवी लखनऊ मेट्रो के लिए बनने वाली एसपीवी एलएमआरसी का काम लगभग पूरा हो चुका है। इसको कंपनी एक्ट के तहत रजिस्टर्ड करने की कवायद भी शुरू की जा चुकी है। मेट्रो सेल के प्रभारी सचिव आवास राजीव अग्रवाल ने बताया कि हमारे एसपीवी के तीन पार्ट होंगे, पहले उसका नाम और स्वरूप, दूसरा उसके नियम और कायदे और तीसरा सबसे लंबा काम, उसमें कर्मचारियों और अधिकारियों की भर्ती। पहले दो काम तो लगभग हो चुके हैं। कंपनी एक्ट में पंजीकरण काम तेजी से चल रहा है। अगले सप्ताह इस पूरी परियोजना को कैबिनेट में रखा जाएगा। जहां इसके अंगीकार होने के बाद मेट्रो का जमीन पर काम बहुत तेजी से शुरू हो जाएगा।
सहकारिता भवन के पीछे बनेगा मुख्यालय ः एलडीए की हुसैनगंज स्थित सहकारिता भवन के पीछे करीब एक लाख वर्ग फीट भूमि खाली है। यहां पर पूर्व में मल्टीलेवल पार्किंग बननी थी, मगर बाद में पार्किंग का निर्माण नहीं किया गया। यह जगह एलएमआरसी मुख्यालय के लिए मुफीद मानी जा रही है। करीब 500 कर्मचारी और अधिकारी एसपीवी में होंगे। करीब पांच मंजिल की बिल्डिंग के इस मुख्यालय के लिए एलडीए उपाध्यक्ष को इस जमीन को फाइनल करने के लिए कहा गया है।
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फिलहाल किराया दूर की कौड़ी ः राजीव अग्रवाल ने बताया कि डीएमआरसी ने अपनी रिपोर्ट में दिल्ली के हिसाब से किराये का एक खाका प्रस्तुत किया है। मगर उसको कोई भी हरी झंडी नहीं मिली है। वह अभी दूर की कौड़ी है। लखनऊ की जरूरतें अलग हैं और यहां अलग तरह से किराए के विषय में वह बहुत कुछ कहना ठीक नहीं है। डीएमआरसी ने जो प्रस्ताव रखा है उसके मुताबिक कम से कम 11 रुपए और अधिकतम 37 रुपए का टिकट होगा। फिर भी इसको तो केवल रिपोर्ट का एक पार्ट के तौर पर रखा गया। फिलहाल पूरा ध्यान आर्थिक संसाधन जुटाने और निर्माण कार्यों पर होगा।
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कंपनी एक्ट के तहत बनेगी एसपीवी ः कंपनी एक्ट के तहत एसपीवी लखनऊ मेट्रो के लिए बनने वाली एसपीवी एलएमआरसी का काम लगभग पूरा हो चुका है। इसको कंपनी एक्ट के तहत रजिस्टर्ड करने की कवायद भी शुरू की जा चुकी है। मेट्रो सेल के प्रभारी सचिव आवास राजीव अग्रवाल ने बताया कि हमारे एसपीवी के तीन पार्ट होंगे, पहले उसका नाम और स्वरूप, दूसरा उसके नियम और कायदे और तीसरा सबसे लंबा काम, उसमें कर्मचारियों और अधिकारियों की भर्ती। पहले दो काम तो लगभग हो चुके हैं। कंपनी एक्ट में पंजीकरण काम तेजी से चल रहा है। अगले सप्ताह इस पूरी परियोजना को कैबिनेट में रखा जाएगा। जहां इसके अंगीकार होने के बाद मेट्रो का जमीन पर काम बहुत तेजी से शुरू हो जाएगा।
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सहकारिता भवन के पीछे बनेगा मुख्यालय ः एलडीए की हुसैनगंज स्थित सहकारिता भवन के पीछे करीब एक लाख वर्ग फीट भूमि खाली है। यहां पर पूर्व में मल्टीलेवल पार्किंग बननी थी, मगर बाद में पार्किंग का निर्माण नहीं किया गया। यह जगह एलएमआरसी मुख्यालय के लिए मुफीद मानी जा रही है। करीब 500 कर्मचारी और अधिकारी एसपीवी में होंगे। करीब पांच मंजिल की बिल्डिंग के इस मुख्यालय के लिए एलडीए उपाध्यक्ष को इस जमीन को फाइनल करने के लिए कहा गया है।
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फिलहाल किराया दूर की कौड़ी ः राजीव अग्रवाल ने बताया कि डीएमआरसी ने अपनी रिपोर्ट में दिल्ली के हिसाब से किराये का एक खाका प्रस्तुत किया है। मगर उसको कोई भी हरी झंडी नहीं मिली है। वह अभी दूर की कौड़ी है। लखनऊ की जरूरतें अलग हैं और यहां अलग तरह से किराए के विषय में वह बहुत कुछ कहना ठीक नहीं है। डीएमआरसी ने जो प्रस्ताव रखा है उसके मुताबिक कम से कम 11 रुपए और अधिकतम 37 रुपए का टिकट होगा। फिर भी इसको तो केवल रिपोर्ट का एक पार्ट के तौर पर रखा गया। फिलहाल पूरा ध्यान आर्थिक संसाधन जुटाने और निर्माण कार्यों पर होगा।