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छोटा प्लॉट-ऊंचा अपार्टमेंट यानी धोखा

Thu, 30 Aug 2012 12:00 PM IST
Lucknow
Lucknow Updated Thu, 30 Aug 2012 12:00 PM IST
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लखनऊ। बिल्डरों की मनमानी और आवंटियों से धोखाधड़ी का सबसे बड़ा नमूना है छोटे प्लॉटों पर बनाए जा रहे अपार्टमेंट। इन प्लॉटों का क्षेत्रफल 2000 वर्ग मीटर (करीब 21 हजार वर्ग फीट) से काफी कम है। नेशनल बिल्डिंग कोड के हिसाब से ऐसी सभी ग्रुप हाउसिंग बिल्डिंग अवैध हैं, जिनका एरिया इससे कम हो। इसके बावजूद प्राधिकरण इंजीनियरों और पुलिस की शह पर छोटे-छोटे प्लॉटों पर अपार्टमेंट बनाए जा रहे हैं। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद नवंबर-दिसंबर में ऐसी बिल्डिंगों की सूची भी बनी थी, मगर अदालत में हलफनामा देकर एक बार फिर प्राधिकरण बच निकला और बिल्डरों का खेल जारी रहा। इन बिल्डिंगों में फंसे हुए आवंटी खुल कर सामने आने से घबराते हैं। ऐसी कई बिल्डिंग हैं, जो कि ध्वस्तीकरण की सूची में हैं। उनके कब्जेदार हर दिन डर में बिताते हैं। मगर बेखौफ बिल्डरों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। पुराने शहर से लेकर उदयगंज तक और अलीगंज से कुर्सी रोड तक हर ओर 1000 वर्ग फीट से लेकर 5000 हजार वर्ग फीट तक के भूखंडों पर आठ मंजिला अपार्टमेंट तामीर कर दिए गए हैं। इन अपार्टमेंट में न तो ग्रुप हाउसिंग का नक्शा पास करवाया जाता है और न ही कभी कंप्लीशन सर्टिफिकेट लिया जाता है। एलडीए के इंजीनियरों और पुलिस से सांठगांठ कर के इन अपार्टमेंट का निर्माण होता है। जमीन के इस टुकड़े पर पहले बिल्डर एकल आवास के लिए नक्शा पास कराते हैं और उसके परमिट को अपनी वैधता बता कर फ्लैट खरीदने वालों को फंसाते हैं। फिर शुरू होता है मोटे मुनाफे का खेल। इस पूरे खेल में होम लोन देने वाले बैंक, लेसा, जल संस्थान और नगर निगम भी शामिल हो जाते हैं। एक बार जब सारे फ्लैट बिक जाते हैं, तब बिल्डर धीरे से खिसक लेता है। इसके बाद किसी भी तरह की कार्रवाई की गाज आवंटी पर ही गिरती है।
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20 बिल्डरों की इमारतें हैं निशाने पर ः अवैध निर्माण की सजा राजधानी के 20 बिल्डरों को तो देर सबेर भुगतनी ही होगी। उनकी बिल्डिंगों को ढहाने का आदेश लखनऊ विकास प्राधिकरण ने जारी किया हुआ है। मगर एलडीए इंजीनियरों की फेरबदल के चलते यह कार्रवाई रुकी हुई है। एलडीए के अभियंत्रण जोनों से इंजीनियरों ने यह सूची नवंबर में उपाध्यक्ष को भेजी थी। जिसमें ध्वस्तीकरण की अनुशंसा है। कई बिल्डिंगें सालों पहले बनाई जा चुकी हैं। इस आदेश के बाद बिल्डरों की धुकधुकी बढ़ गई है। साथ ही इनमें रहने वाले हजारों लोगों के आशियानों पर भी संकट मंडराने लगा है। इनके अलावा करीब 55 ऐसी बिल्डिंगें हैं, जिनमें ध्वस्तीकरण की जगह सीलिंग की कार्रवाई की जानी है।
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इन बिल्डिंगों पर गिरेगी ध्वस्तीकरण की गाज
बिल्डर पता
इम्तियाज अहमद 546/2 टीजी न्यू हैदराबाद
सुमित, स्वाति अग्रवाल 501/4 टीजी न्यू हैदराबाद
सुरेश कुमार-विनोद अग्रवाल 1/36 विवेक खंड
राजेश मौर्य-अजीत मौर्य राय बिहारी लाल रोड, न्यू हैदराबाद
एनजे सिंह 537/6, टीजी न्यू हैदराबाद
संजीव अग्रवाल, प्रकाश चौरसिया 506 पार्ट न्यू हैदराबाद
एलए चटरी 515 टीजी, नार्थ न्यू हैदराबाद
अरुण कुमार अग्रवाल 416-बी टीजी नार्थ न्यू हैदराबाद
जियाउर्ररहमान-इम्तियाज 550-551 आरबीएल रोड
निसार अहमद 509/150 पार्ट, न्यू हैदराबाद
अब्बास प्रकाश प्रकाश सिनेमा के पीछे नक्खास
अनीस, जमशेद शीशमहल ठाकुरगंज
नूरजहां नैपियर रोड-2 हरदोई रोड
ताज आरा हिना आगामीर ड्योढ़ी वजीरगंज
कंचन करमचंदानी बी 1/36 सेक्टर-एफ अलीगंज
इम्तियाज अहमद 46/6, गोखले विहार मार्ग
अजय गुप्ता 3/45, गोखले विहार मार्ग
दिनेश्वर दयाल सेठ गोमती इंक्लेव
अशरफ अली 8 सी, जगत नारायण रोड वजीरगंज
सैय्यद मो. नासिर 147 जगतनारायण रोड, वजीरगंज

सैकड़ों नई बिल्डिंगों में काम शुरू ः इन पुरानी बिल्डिंगों पर कोई ठोस कार्रवाई न होने से अवैध तरीके से नए निर्माण कराने वालों के हौसले बुलंद हैं। सैकड़ों नई बिल्डिंगों का निर्माण पर काम जारी है। सबसे अधिक पुराने शहर के चौक, गोलागंज, अमीनाबाद, मौलवीगंज, कैसरबाग, नए शहर में अलीगंज, कपूरथला, सेक्टर बी अलीगंज, महानगर, महानगर एक्सटेंशन, न्यू हैदराबाद, उदयगंज, आलमबाग, हुसैनगंज, चारबाग आदि इलाकों में अवैध अपार्टमेंट बनाए जा रहे हैं। इनकी ओर से प्राधिकरण के इंजीनियरों ने आंखें मूंद लीं हैं, जबकि नए लोगों को बिल्डिंगों के वैध होने का झांसा देकर फंसाया जा रहा है।
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