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Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Paush Amavasya Date Time Shubh Muhurat And Importance of Fasting On Paush Amavasya

Paush Amavasya 2022: 23 दिसंबर को पौष अमावस्या, जानिए महत्व, पूजाविधि और व्रत कथा

Thu, 22 Dec 2022 07:46 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Thu, 22 Dec 2022 07:46 AM IST
सार

Paush Amavasya 2022: पौष अमावस्या के दिन श्रद्धा पूर्वक पितरों का श्राद्ध कर्म एवं पिंडदान करने से उन्हें इस योनि से मुक्ति मिलती है और ऐसी मान्यता है कि उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति होती है।

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Paush Amavasya Date Time Shubh Muhurat And Importance of Fasting On Paush Amavasya
पौष अमावस्या 2022: धार्मिक और आध्यात्मिक चिंतन के लिए ये महीना उत्तम माना गया है। शास्त्रों के अनुसार इस माह को 'छोटा श्राद्ध पक्ष'भी कहा जाता है। - फोटो : amar ujala

विस्तार

Paush Amavasya Date Time Shubh Muhurat : इस साल पौष अमावस्या 23 दिसंबर को है। पौष माह में ही धनु संक्रांति आती है और सूर्य के धनु राशि में जाने से खरमास आरंभ हो जाता है। इस माह में मांगलिक और शुभ कार्य वर्जित होते हैं, इसलिए इस माह में पूजा-पाठ और पितरों के निमित्त किए जाने वाले धार्मिक कार्यों का विधान है। धार्मिक और आध्यात्मिक चिंतन के लिए ये महीना उत्तम माना गया है। शास्त्रों के अनुसार इस माह को 'छोटा श्राद्ध पक्ष'भी कहा जाता है। इस माह में पितरों के लिए तर्पण, पिंडदान के साथ-साथ भगवान विष्णु एवं सूर्य पूजा भी विशेष महत्व है।
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महत्व
पौष अमावस्या के दिन श्रद्धा पूर्वक पितरों का श्राद्ध कर्म एवं पिंडदान करने से उन्हें इस योनि से मुक्ति मिलती है और ऐसी मान्यता है कि उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भी पौष माह में सूर्य की पूजा-पाठ का विशेष महत्व है। इस अमावस्या पर व्रत रखने और पूजा करने से कई गुना पुण्यफल की प्राप्ति होती है साथ ही घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। पौष अमावस्या पर पितरों की शांति के लिए व्रत रखना भी मंगलकारी माना गया है।
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पूजा विधि
पौष मास की अमावस्या पर प्रात:काल यदि संभव हो तो गंगा नदी में स्नान करें या फिर नहाने के पानी में गंगाजल डालकर नहाएं। इसके बाद उगते हुए सूर्य को प्रणाम कर अर्घ्य प्रदान करें। इस दिन पितरों को विशेष रूप से तर्पण एवं श्राद्ध करें। अमावस्या के दिन व्रत करने और शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने का बहुत पुण्यफल मिलता है। ज्योतिष मान्यता है कि जिन लोगों की कुंडली में शनि या पितृदोष होता है, उन्हें पौष मास की अमावस्या के दिन खाद्य सामग्री, कम्बल, तिल आदि का दान करना चाहिए।

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कथा
कथा के अनुसार एक गरीब ब्राह्मण की सुंदर, गुणवान और संस्कारी बेटी थी। लेकिन उसका विवाह नहीं हो पा रहा था। एक दिन उसके घर पर एक साधु आए और उनकी सेवा से प्रसन्न होकर आशीर्वाद दिया एवं उस कन्या को विवाह के लिए उपाय बताते हुए कहा कि यहां से कुछ दूरी पर एक परिवार रहता है।यदि यह रोज जाकर उसकी पत्नी की सेवा करे तो इसके विवाह में आ रही अड़चन दूर हो जाएगी। अगले दिन सुबह उठकर कन्या उनके घर जाकर साफ सफाई कर अपने घर वापस लौटती है।उस घर में रहने वाली स्त्री यह देखकर हैरान हो जाती कि कौन उसके जागने से पहले घर सफाई करके चला जाता है। कुछ दिन बाद स्त्री ने ब्राम्हण की पुत्री को ऐसा करते हुए देख लिया और पूछने लगी कि आप कौन हैं, तब कन्या ने उसे साधु द्वारा बताई गई सारी बातें बताई।उस स्त्री ने कन्या की सच्चाई और सेवा से खुश होकर उसे शीघ्र विवाह होने का आशीर्वाद दिया।लेकिन कुछ देर बाद स्त्री के पति की मृत्यु हो गई,लेकिन उसने हार नहीं मानी और आँगन में लगे हुए पीपल के पेड़ की 108 परिक्रमा करके भगवान विष्णु से अपने पति का जीवन लौटाने की प्रार्थना की।उस दिन पौष अमावस्या थी।भगवान की कृपा से उसका पति फिर से जीवित हो गया।ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति इस पौष अमावस्या के दिन स्न्नान-दान करके पीपल की परिक्रमा करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।  

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