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जन्माष्टमी का व्रत रखने से पहले जान लें ये जरूरी नियम और लड्डू गोपाल की पूजा विधि

Wed, 02 Sep 2026 01:07 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: ज्योति मेहरा Updated Wed, 02 Sep 2026 01:07 PM IST
सार

श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए जन्माष्टमी की मुख्य पूजा रात के निशिता काल में की जाती है। अगर आप भी इस बार जन्माष्टमी का व्रत रखने वाले हैं, तो इसके पहले इसके नियम और पूजा विधि जरूर जान लें।

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जन्माष्टमी व्रत नियम - फोटो : AI

इस वर्ष भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का पर्व जन्माष्टमी 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। भक्त भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की पूजा करते हैं और श्रद्धापूर्वक उपवास रखते हैं। मान्यता है कि श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए जन्माष्टमी की मुख्य पूजा रात के निशिता काल में की जाती है। विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होने तथा मनोकामनाओं की पूर्ति होने की धार्मिक मान्यता है। अगर आप भी इस बार जन्माष्टमी का व्रत रखने वाले हैं, तो इसके नियम और पूजा विधि जान लें।



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जन्माष्टमी व्रत के नियम - फोटो : amar ujala

जन्माष्टमी व्रत के नियम
जन्माष्टमी व्रत से एक दिन पहले यानी 3 सितंबर से ही सात्विक भोजन करना उचित माना जाता है। व्रत रखने वाले व्यक्ति को अपने विचार, व्यवहार और वाणी में भी संयम बनाए रखना चाहिए। मन में किसी के प्रति द्वेष, हिंसा या नकारात्मकता न रखें और झूठ बोलने से बचें।

जन्माष्टमी का उपवास भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के सूर्योदय से शुरू होकर नवमी तिथि के सूर्योदय तक माना जाता है। व्रत के दौरान अन्न का सेवन नहीं किया जाता। भक्त अपनी क्षमता और परंपरा के अनुसार फल, दूध या अन्य फलाहार ग्रहण कर सकते हैं।
 

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जन्माष्टमी व्रत के नियम - फोटो : Adobe Stock

पूरे दिन भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण, भजन और पूजा-पाठ करना शुभ माना जाता है। इस दौरान क्रोध, विवाद और कटु वाणी से दूर रहना चाहिए। साथ ही ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन करने की धार्मिक मान्यता है।

इस साल लड्डू गोपाल के जन्म का निशिता काल 4 सितंबर की रात 11:57 बजे से 5 सितंबर को 12:43 बजे तक रहेगा। इसी अवधि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया जा सकता है।
 

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जन्माष्टमी पूजा विधि - फोटो : adobe stock

जन्माष्टमी पूजा विधि

  • जन्माष्टमी के दिन सुबह 4:30 से 5:15 बजे के बीच ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें।
  • पूजा स्थल की सफाई करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करें।
  • हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर व्रत और पूजा का संकल्प लें।
  • रात में निशिता काल के समय बाल गोपाल का जन्मोत्सव मनाएं।
  • शंख और घंटियां बजाकर भगवान की पूजा करें।
  • इसके बाद लड्डू गोपाल को पंचामृत से स्नान कराएं और नए वस्त्र पहनाएं। चंदन, फूल और माला से उनका श्रृंगार करें।
     
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जन्माष्टमी पूजा विधि - फोटो : adobe stock
  • फिर बाल गोपाल को सुंदर पालने में विराजमान कराएं और लोरी या भजन गाते हुए उन्हें झुलाएं।
  • भगवान को माखन-मिश्री, पंजीरी, पंचमेवा, फल और मिठाइयों का भोग लगाएं। अंत में आरती करें और प्रसाद ग्रहण करें। अ
  • पनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार मध्यरात्रि पूजा के बाद या अगले दिन सूर्योदय के पश्चात व्रत का पारण किया जा सकता है।


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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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