Maha Kumbh 2025: महाकुंभ मेले में पेशवाई क्या है? जानें कौन ले सकता है इसमें भाग
Peshwai Ceremony In Kumbh: महाकुंभ मेला 13 जनवरी 2025 से शुरू होगा। महाकुंभ मेले में पेशवाई एक बहुत ही महत्वपूर्ण और भव्य समारोह है। यह एक जुलूस है जिसमें विभिन्न अखाड़ों के साधु शाही कुंभनगरी में प्रवेश करते हैं। यह एक ऐतिहासिक परंपरा है जो सदियों से चली आ रही है। आइए इस परंपरा के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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Why Peshwai Ceremony In Kumbh 2025: 2025 में प्रयागराज में महाकुंभ मेले का आयोजन किया गया है। इस भव्य समारोह की तैयारियां जोरों-शोरों से चल रही हैं। यह कुंभ मेला 45 दिनों तक चलेगा। इस महाकुंभ मेले में देशभर से लोग आस्था के साथ स्नान करने आएंगे। इस धार्मिक पर्व के दौरान प्रयागराज के संगम समेत प्रमुख घाटों पर स्नान के लिए साधु-संतों का जमावड़ा लगेगा। महाकुंभ के दौरान अखाड़े की पेशवाई निकलती है जो बेहद खास मानी जाती है। आइए जानते हैं कुंभ मेले के दौरान अखाड़े की पेशवाई का क्या मतलब है? इस अखाड़े की पेशवाई में कौन भाग ले सकता है?
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सबसे बड़ा धार्मिक त्योहार
महाकुंभ मेला दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक त्योहार है। ऐसा माना जाता है कि इससे बड़ा कोई धार्मिक त्योहार नहीं है। सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित करने और धर्म को समाज से जोड़ने के लिए महाकुंभ का आयोजन और उत्सव बड़े उत्साह से किया जाता है। ऋषि-मुनि महाकुंभ के वाहक माने जाते हैं। इन संतों ने विपरीत परिस्थितियों में भी धर्म की रक्षा की और उसे मजबूत किया। साथ ही जरूरत पड़ने पर ये संत धर्म और देश की रक्षा के लिए हथियार उठाने से भी नहीं हिचकिचाते थे।
अखाड़े का पेशवा क्या है?
अखाड़े के साधुसंत शाही ठाट-बाट के साथ कुंभ मेले में आते हैं। तब उन्हें पेशवा कहा जाता है, राजा-महाराजाओं की तरह हाथी, घोड़ों और रथों पर साधु-संतों का शाही जुलूस निकलता है। इस समय वहां मौजूद श्रद्धालु संतों का स्वागत करते हैं। ये संत अपने-अपने अखाड़ों के झंडे अपने हाथों में रखते हैं. साधु संत हाथ में ध्वजा लेकर पूरे समारोह के साथ अपनी सेनाओं के साथ नगर से निकलते हैं। कुंभ में दुनिया भर से लोग ऋषि-मुनियों के दर्शन के लिए आते है। कुंभ मेले में दुनिया भर से लोग आते हैं। 2025 में महाकुंभ मेला 13 जनवरी से शुरू होगा। यह कुंभ मेला 26 फरवरी तक चलेगा।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।