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युग हत्याकांड: दिल दहला देगी दरिंदगी की कहानी, अपराधी के हाथों खिलौना बन गई पुलिस

Fri, 26 Aug 2016 12:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Fri, 26 Aug 2016 12:05 AM IST
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Yug Murder Case at Shimla, Protest at Shimla city.

शिमला के चर्चित युग अपहरण व हत्याकांड का सीआईडी ने करीब दो साल की जांच के बाद खुलासा करने का दावा किया है। दरिंदगी की जो कहानी सामने आई है वह दिल दहला देने वाली है। हर शहरी डरा हुआ है। शुरूआती कहानी में शिमला पुलिस की स्मार्टनेस की पोल भी खुल गई है।

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जून 2014 मे आरोपियों ने चार साल के मासूम का अपहरण किया और फिर उसके कारोबारी पिता भारी भरकम फिरौती की मांग की। शातिर और कोई नहीं बल्कि पिता के करीबी और जान पहचान वाले थे। अपहरण के बाद मासूम को एक घर में सात दिन तक बंद करके छिपाया गया।
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इस दौरान फिरौती के लिए कई बार पत्र लिखे गए। लेकिन जब जब नहीं बनी तो मासूम की हत्या कर उसे शिमला में ही पानी के एक बड़े टैंक में फेंक दिया। अंदेशा यह भी जताया जा रहा है कि मासूम को जिंदा ही टैंक में फेंका गया। इसके बाद भी आरोपी मासूम के पिता से फिरौती की मांग करते रहे। आइए जानते हैं कैसे रची गई थी पूरी साजिश-

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अपहरणकर्ता के साथ ही जांच करती रही शिमला पुलिस

Yug Murder Case at Shimla, Protest at Shimla city.

मासूम युग हत्याकांड मामले में शिमला पुलिस कई महीनों तक अपहरणकर्ता को साथ लेकर युग का पता खोजती रही। युग गुप्ता की हत्या के आरोप में गिरफ्तार चंद्र शर्मा गुप्ता परिवार का पड़ोसी है। वह कानून की पढ़ाई कर रहा था। वह इस केस में कुछ ज्यादा ही दिलचस्पी ले रहा था इसलिए बहुत जल्द युग के परिजनों का विश्वासपात्र बन गया।

पड़ोसी होने के नाते गुप्ता परिवार की हर गतिविधि में भी चंद्र शामिल रहता। पुलिस और परिजन युग को अगवा करने वालों के खिलाफ क्या रणनीति बना रहे हैं, इसकी पूरी जानकारी मुख्य आरोपी को थी। चंद्र ने युग के रिश्तेदारों के घरों में पुलिस की दबिश दिलाकर जांच को भटकाने की भी बहुत कोशिश की।

गुप्ता परिवार के रिश्तेदारों के बीच दरार डालने में उसने कोई कसर नहीं छोड़ी। लेकिन जब चंद्र शर्मा ने युग के पिता विनोद कुमार की चल-अचल संपत्ति की जानकारी जुटाने में अधिक दिलचस्पी दिखाई तो परिजनों को उस पर शक हुआ।

परिजनों के कहने पर ही विनोद गुप्ता ने चंद्र शर्मा पर संदेह हो गया। लेकिन चंद्र शर्मा की असलियत पता लगने में काफी वक्त लग गया। समय पर अगर चंद्र शर्मा का बेरहम चेहरा बेनकाब हो जाता तो शायद आज युग अपने परिवार के साथ होता।

उधर, युग की हत्या का दूसरा आरोपी तजिंद्र पाल सिंह कारोबारी है। इसकी भी रामबाजार में दुकान है। तीसरा आरोपी विक्त्रसंत बख्शी छोटा शिमला का रहने वाला है। विक्त्रसंत इन दिनों चंडीगढ़ में पढ़ाई कर रहा था। विक्त्रसंत को पुलिस ने रविवार रात चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया जबकि चंद्र और तजिंद्र को सोमवार दोपहर बाद रामबाजार से गिरफ्तार किया गया।

शुरू से पढ़िए, कैसे हुआ अपहरण

Yug Murder Case at Shimla, Protest at Shimla city.

युग का अपहरण 14 जून 2014 शाम समय करीब साढ़े सात बजे अपने रिहायशी सेट द्वारका गढ़ बिल्डिंग की चौथी मंजिल के गेट पर अंतिम बार खड़ा हुआ देखा गया था। युग अक्सर इस भवन के टॉप फ्लोर में अपने हम उम्र दोस्त के पास भी खेलने जाता रहता था।

इसी मंजिल में चंद्र शर्मा रहता था। युग के दोस्त के घर के दरवाजे के साथ आरोपी चंद्र शर्मा के घर का दरवाजा है। युग की दो बहने टीशा व भूमि भी आरोपी चंद्र शर्मा के घर इसकी मां अंजना शर्मा से रोजाना टयूशन पढ़ने जाती थीं। घटना के दिन चंद्र शर्मा घटनास्थल के आसपास मौजूद था।

सीआईडी ने चन्द्र व अन्य आरोपियों की मोबाइल जांच में पाया कि रात के समय करीब नौ से साढ़े नौ बजे चन्द्र की लोकशन उसके दोस्त तेजेंद्र पाल सिंह और विक्त्रसंत बख्शी के साथ घटनास्थल से बाहर संजौली की तरफ नवबहार की ओर पाई गई।

किडनेपिंग के बाद आया वापस, बना हमदर्द

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युग के पिता - फोटो : अमर उजाला

नवबहार में एकांत स्थान फोरेस्ट रोड पर राम चंद्रा चौक के नजदीक एचआई जी फ्लैट नंबर 22 को आरोपी चंद्र शर्मा ने गुप्त रूप से किराये पर लिया हुआ था। सीआईडी को घटना वाले दिन इन तीनों के फोन की लोकेशन नवबिहार के उस गुप्त घर में की मिली।

करीब रात 11 से 11.50 बजे चंद्र शर्मा व तेजिंद्र पाल सिंह वापस घटनास्थल पर आ गए थे। वह यह जानने आए थे बच्चे के गायब होने के बाद घर का क्या माहौल है। इसके बाद से ही वह गुप्ता परिवार के साथ हो गया।

उसने घर वालों को यह भरोसा दिला दिया कि वह युग को खोजने में अपनी जान लगा देगा। वह हर वक्त युग के पिता के साथ रहने लगा। युग के बारे में जानकारी देने में वह पुलिस का सहयोग करता। बहुत जल्द पुलिस भी मानने लगी कि यह गुप्ता परिवार का असली हमदर्द है।

कैसे हुआ आरोपी चन्द्र पर शक

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सीआईडी टीम के साथ आरोपी|(बीच में) - फोटो : अमर उजाला

चंद्र शर्मा हर समय युग के पिता विनोद गुप्ता उर्फ बब्लू के साथ साथ रह रहा था।  विनोद गुप्ता के पारिवारिक सदस्यों, स्थानीय लोगों तथा पुलिस को अपना परिचय इंटरनेशनल ह्यूमन राइटस कमिशन मेंबर के रूप में देकर युग की तलाश की प्रत्येक गतिविधि में भाग ले रहा था।

विनोद गुप्ता के पारिवारिक सदस्यों से पारिवारिक व्यवसाय और बंटवारे आदि के बारे में भी पूछताछ करता रहा। इस अवधि के दौरान चंद्र शर्मा विनोद गुप्ता के पारिवारिक सदस्यों और स्थानीय लोगों को साथ यह भी बता रहा था कि यह जल्दी ही विदेश जा रहा है। वहां पर इसे बहुत उच्च वेतनमान मिलना तय है।

इसी दौरान चंद्र शर्मा ने विनोद गुप्ता के परिवार के व्यवसाय और बंटवारे से संबंधित जानकारियां और पूछताछ करनी शुरू की दी। इससे पर विनोद गुप्ता के चाचा किशोर गुप्ता ने उसे डांटा और कहा इससे उसे क्या मतलब है? इसके बाद चंद्र शर्मा ने विनोद गुप्ता से  न सिर्फ मिलना जुलना बंद किया बल्कि बातचीत बंद कर दी।

चार बार मांगी थी फिरौती, तरीका जान आप भी चौंक जाएंगे

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किडनेपिंग और हत्या के आरोपी को कोर्ट ले जाती सीआईडी टीम - फोटो : अमर उजाला

शिमला के रामबाजार से मासूम युग को 14 जून 2014 को अगवा किया गया। हत्यारों ने युग को छुड़वाने के लिए परिजनों से चार बार फिरौती मांगी। घर वाले फिरौती देने को तैयार थे। बड़ी अजीब स्थिति थी। पुलिस भी उनके सम्पर्क में थी और अपहरणकर्ता भी।

घर में क्या-क्या चल रहा है इसकी पल पल की खबर अपहरणकर्ताओं को तत्काल मिल रही थी। असल मुश्किल युग को संभालने और उसे छुपाने की थी। यह काम मुश्किल हो गया तो उसे इन दरिन्दों ने 22 जून को ही मार डाला। लेकिन वे फिरौती मांगने की फिराक में लगे रहे।   

पहली फिरौती
अपहरण के 14 दिन बाद पहली बार फिरौती का पत्र युग के जन्मदिन 27 जून 2014 को भेजा गया। सादे कागज पर हाथ से लिखकर पत्र को युग के पिता विनोद की दुकान के शटर के नीचे से डाला गया। इस पत्र में 3.60 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी गई।

निशानी के तौर पर युग का लॉकेट भेजा गया। इस पत्र में घर में काम करने वाले नौकर हरी का नाम लिखकर उसके पास ही 3.60 करोड़ रुपये अंबाला भेजने को कहा। बच्चे की याद में बिलख रहे परिजनों ने पत्र मिलते ही नौकर को 27 जून की शाम अंबाला रवाना कर दिया लेकिन अंबाला में कोई नहीं मिला।

बात नहीं बनी तो फिर दूसरी और तीसरी फिरौती

Yug Murder Case at Shimla, Protest at Shimla city.

हत्यारों ने दूसरी बार भेजे फिरौती के पत्र में चार करोड़ रुपये की मांग की। मांग स्वीकार होने की स्थिति में परिजनों से घर के बाहर सफेद रंग का कपड़ा लटकाने को कहा। इस पत्र में फिरौती कहां लानी है, इसकी जानकारी नहीं दी गई।

तीसरी फिरौती
तीसरी बार फिरौती का पत्र रक्षाबंधन से पहले भेजा गया। इस पत्र में फिरौती की राशि को चार करोड़ से बढ़ाकर दस करोड़ कर दिया। लेकिन पैसा कहां लेकर आना है, यह नहीं बताया। मांग मंजूर होने पर फिर घर के बाहर किसी अन्य रंग का कपड़ा लटकाने को कहा। लेकिन कोई फिरौती लेने नहीं आया।

चौथी फिरौती
चौथी बार फिर फिरौती का पत्र भेजा गया। इस बार धनराशि को दस करोड़ से घटाकर चार करोड़ कर दिया। दूसरी, तीसरी और चौथी बार भेजे गए फिरौती के पत्र चौड़ा मैदान पोस्ट ऑफिस की मुहर लगे थे। चार बार फिरौती का पत्र भेजने के बावजूद अपहरणकर्ताओं ने परिजनों से कोई संपर्क नहीं किया। चौथी बार फिरौती का पत्र आने के बाद मामला सीआईडी के पास चला गया।

इस घर में छिपाया था युग को, सीआईडी के हाथ लगे सबूत

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यह वही जगह है जहां पर किडनैप कर युग को छिपाया गया था। - फोटो : अमर उजाला

दो साल पहले युग अपहरण कांड की जांच के दौरान आरोपियों की हर दलील वैज्ञानिक और आधुनिक तकनीक आधारित जांच के आगे धरी रह गई। आरोपी अपने गुनाह से लाख इनकार करते रहे लेकिन उनकी हैंड राइटिंग, मोबाइल कॉल डिटेल, लैपटॉप व अन्य उपकरणों ने उनकी करतूत से पर्दा हटा दिया।

सूत्र बताते हैं कि जांच में जुटे क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (सीआईडी) को कई ऐसे वैज्ञानिक आधार वाले सबूत हाथ लगे हैं जिनकी वजह से आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। इन्हीं साक्ष्यों की वजह से अब आरोपियों का कोर्ट में भी बच पाना मुश्किल है।

दरअसल, आरोपी तेजेंद्र और चंद्र की गिरफ्तारी के बाद से ही सीआईडी इनके लाई डिटेक्टर टेस्ट की कोशिश कर रहा था। लेकिन दोनों ही बहाने बनाकर टेस्ट से बच रहे थे। इस बीच सीआईडी ने लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने का दबाव तो बनाए रखा लेकिन तय रणनीति के तहत आरोपियों के हैंड राइटिंग सैंपल लेकर जांच के लिए एफएसएल लैब भेज दिए।

मोबाइल रिकॉर्ड भी बने सबूत, यकीन में बदल गया शक

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आरोपियों के मोबाइल के ढाई साल की कॉल डिटेल रिकॉर्ड को भी छाना गया। इस बीच आरोपियों से मिले लैपटॉप के डाटा को भी रिकवरी के लिए भेजा गया। एक-एक कर सभी जगह से ऐसी रिपोर्ट आने लगीं, जिससे आरोपियों पर शक यकीन में बदलता चला गया।

रिमांड के दौरान पूछताछ के बीच आखिरकार आरोपी टूट गए और उन्होंने युग के अपहरण और हत्या की बात कबूल ली। आरोपियों के कबूलनामे से वैज्ञानिक आधार पर जुटाए सबूतों को अब सीआईडी मिलाने की कवायद कर रहा है।

इस टैंक से मिला कंकाल, निगम ऐसे करता है सफाई

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नगर निगम के इस टैंक से युग का कंकाल मिला है। इससे शहर के कई इलाकों मे पानी की सप्लाई होती है। - फोटो : अमर उजाला

टैंकों की सफाई के लिए नगर निगम की ओर से निर्धारित शेड्यूल के तहत हर छह महीने में टैंक साफ करना अनिवार्य है। शहर में नगर निगम के कुल 42 टैंक हैं, नगर निगम के कनिष्ठ अभियंता की मौजूदगी में टैंक की सफाई की जाती है।

सफाई के लिए सबसे पहले एग्जिट प्वाइंट से टैंक खाली करवा दिया जाता है। खाली होने के बाद टैंक में झाड़ूू लगाया जाता है। पानी से सफाई के बाद सिल्ट और कूड़ा कचरा आउट लेट से बाहर निकाल दिया जाता है। इसके बाद ब्लीचिंग पाउडर से टैंक की सफाई होती है।

टैंक से यहां होती है सप्लाई
पुलिस लाइन भराड़ी, भराड़ी बाजार, तारा बाड़ी, लोअर भराड़ी, मिडल कुफ्टाधार, मिनी कुफ्टाधार, कुफ्टाधार आदि क्षेत्र।

मां औरा दादी बेहाल, 'हाय, उन दरिंदों ने मार दिया मेरे बच्चे को'

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परिवार की आखिरी उम्मीद टूटने के बाद युग के घर पर मातम का माहौल है। - फोटो : अमर उजाला

दो साल अपने जिगर के टुकड़े का इंतजार करने वाले परिवार की आखिरी उम्मीद टूटने के बाद युग के घर पर मातम का माहौल है। युग की मां पिंकी और दादी चंद्रलेखा बार-बार बेसुध हो रही हैं। थोड़ा होश आने पर मां एक ही बात रट रही हैं - हाय, उन दरिंदों ने मार दिया मेरे बच्चे को.... हाय, उन दरिंदों ने मार दिया मेरे बच्चे को।

दादी चंद्रलेखा का भी यही हाल है। दादी सांत्वना देने पहुंच रहे लोगों से बार-बार पूछ रही हैं - उस मासूम ने उनका क्या बिगाड़ा था। उन जालिमों ने न जाने कैसे मेरे लाल को तड़पाया होगा। कितने दिन भूखा-प्यासा रखा। उन दरिंदों को भी फांसी पर लटका दो।

गुमसुम है बहन, घर पर सांत्वना देने उमड़ी भीड़

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युग की बड़ी बहन टीशा (10) और भूमि (8) भी चीख-पुकार सुनकर गुमसुम हैं। - फोटो : अमर उजाला

युग की बड़ी बहन टीशा (10) और भूमि (8) भी चीख-पुकार सुनकर गुमसुम हैं। बुआ कंचन और ताई रेखा भी बदहवास हैं। उधर, युग के कंकाल मिलने की सूचना के बाद मंगलवार सुबह से ही युग के घर पर ढांढस बंधाने और सांत्वना देने वालों की भीड़ जुटी रही।

गमगीन माहौल देखकर यहां हर किसी की आंख छलक पड़ी। किसी को यकीन नहीं हो रहा कि युग की इतनी दर्दनाक हत्या हुई है। युग के परिजन हों या घर पहुंचने वाले रिश्तेदार और लोग, सभी युग के हत्यारों को फांसी से कम सजा नहीं चाहते।

युग गुप्ता के हत्यारों को फांसी होनी चाहिए : वीरभद्र

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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि युग गुप्ता के हत्यारों को फांसी होनी चाहिए। यह मामला मासूम बच्चे के अपहरण और हत्या दोनों का है। इसमें फांसी की सजा हो सकती है। मुख्यमंत्री ने यह बात भावुक होकर मंगलवार को युग गुप्ता के पिता विनोद गुप्ता को विधानसभा स्थित अपने कार्यालय में कही।

ढांढस बंधाते हुए मुख्यमंत्री भारी मन से बोले - इस दुख की घड़ी में मैं आपके साथ हूं। मुख्यमंत्री ने इस दौरान डीजीपी सहित सीआईडी प्रमुख को मामले की गहनता से जांच के आदेश भी दिए।

हाईकोर्ट पहुंचा पानी के टैंक में युग का कंकाल मिलने का मामला

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प्रदेश हाईकोर्ट ने युग गुप्ता का कंकाल नगर निगम के टैंक में पाए जाने की खबरों पर संज्ञान लेते हुए पीलिया मामले के सभी प्रतिवादियों से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने युग मामले की जांच कर रहे सीआईडी के जांच अधिकारी को भी विस्तृत हलफनामा दायर करने आदेश दिए।

शिमला शहरवासियों को सीवरेज युक्त पानी पिलाने के मामले में सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर व न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने यह आदेश दिए। हाईकोर्ट ने पीलिया मामले को युग अपहरण की जांच से जुड़े एक अन्य मामले के साथ लगाये जाने के आदेश भी दिए।

कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि नगर निगम बार-बार हलफनामे दायर कर शिमलावासियों को साफ  पानी पिलाने की बातें करता रहा। शपथ पत्रों के माध्यम से कोर्ट को बताया गया कि वह नगर निगम अपने टैंकों को साफ करता आ रहा है।

जबकि युग के कंकाल का निगम के टैंक में दो सालों से पाया जाना यह दर्शाता है कि निगम कोर्ट की आंखों में हर बार धूल झोंकता रहा। कोर्ट ने कहा कि इससे जाहिर होता है कि निगम ने अब तक जो भी शपथपत्र दायर किये वो सब झूठे थे। मामले पर अगली सुनवाई 27 सितंबर को निर्धारित की गई है।

मासूम युग को इंसाफ दिलाने सड़कों पर उतरे कारोबारी

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राजधानी शिमला के मासूम युग को इंसाफ दिलाने मंगलवार को शहर के सैकड़ों कारोबारी सड़कों पर उतरे। - फोटो : अमर उजाला

राजधानी शिमला के मासूम युग को इंसाफ दिलाने मंगलवार को शहर के सैकड़ों कारोबारी सड़कों पर उतरे। शिमला कार्ट रोड से लेकर लोअर बाजार तक कारोबारियों ने रैली निकाल कर रोष प्रदर्शन किया।

युग के पिता विनोद गुप्ता और परिजनों की अगुवाई में कारोबारियों ने राज्य विधानसभा में जाकर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और हाईकोर्ट में जाकर मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात की। कारोबारियों ने मासूम युग के हत्यारों को फांसी देने और उनके परिजनों का सामाजिक बहिष्कार करने की मांग की।

कारोबारियों ने उपायुक्त आफिस शिमला के बाहर भी प्रदर्शन किया। युग गुप्ता की हत्या होने की खबर शहर में फैलते ही सोमवार रात से लोग रामबाजार स्थित द्वारका गढ़ में जुटना शुरू हो गए। मासूम युग के परिजनों को लोग ढांढस बंधाते रहे।

सीएम से भी मिले परिजन, फिर मुख्य न्यायाधीश से भी मिले

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सीएम से मिलते युग के परिजन - फोटो : अमर उजाला

मंगलवार सुबह करीब दस बजे सैकड़ों कारोबारी रामबाजार के द्वारका गढ़ से रैली निकाल कर उपायुक्त आफिस से होते हुए राज्य विधानसभा पहुंचे। यहां कारोबारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की।

युग के पिता विनोद गुप्ता ने मुख्यमंत्री से उसके मासूम बेटे को निर्दयता से मारने वालों को फांसी की सजा देने की मांग की। इसके बाद कारोबारियों की विधानसभा से होकर रैली कार्ट रोड होते हुए हाईकोर्ट पहुंची। यहां मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात कर परिजनों ने युग के हत्यारों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की।

इसके बाद रैली हाईकोर्ट से निकल कर माल रोड होते हुए रामबाजार में खत्म हुई। कारोबारी प्रदीप गुप्ता, राजकिशोर, संजीव शर्मा, सुमित, रामप्रकाश, राजकुमार अग्रवाल सहित कई अन्य इस दौरान मौजूद रहे।

'युग अमर रहे' के नारों से गूंजा शहर, बाजार बंद, दूध, ब्रेड नहीं मिला

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शिमला में पूरा दिन बाजार बंद रहा। - फोटो : अमर उजाला

राजधानी शिमला के कई हिस्सों में दोपहर बाद तक मासूम युग अमर रहे के नारे गूंजे। रोष प्रदर्शन के दौरान कारोबारी युग गुप्ता की फोटो लेकर चले। हिमाचल जैसे शांत प्रदेश में हुई एक मासूम बच्चे की निर्मम हत्या को लेकर कारोबारियों के चेहरों पर गुस्सा दिखा।

दूध, ब्रेड नहीं हो सके नसीब
शिमला। युग की हत्या के विरोध में मंगलवार सुबह शहर में सभी व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे। दुकानें बंद होने के कारण लोगों को दूध और ब्रेड तक नसीब नहीं हुई। मालरोड, लक्कड़ बाजार, मिडल बाजार, लोअर बाजार और सर्कुुलर रोड पर सभी दुकानें बंद रहीं। लोगों ने अपनी दुकानों के शटर पर पोस्टर लगा कर रोष प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया।

शिमला में कैंडल मार्च निकाला

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दोपहर बाद करीब पांच बजे उपायुक्त कार्यालय से रिज मैदान स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा तक कैंडल मार्च निकाला। - फोटो : अमर उजाला

दोपहर बाद करीब पांच बजे उपायुक्त कार्यालय से रिज मैदान स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा तक कैंडल मार्च निकाला। व्यापार मंडल के अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह ने बताया कि शिमला बंद में सभी कारोबारियों ने सहयोग दिया है।

प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई गई है। कारोबारियों की मांग है कि दोषियों को ऐसी सजा दी जाए ताकि भविष्य में कोई ऐसी घटना को अंजाम देने की सोच भी न सके।

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