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हिमाचल: कहां फटेगा बादल, अब 48 घंटे पहले चल जाएगा पता
Wed, 04 Aug 2021 11:48 AM IST
Krishan Singh
बलदेव राज, अमर उजाला, कुल्लू
बलदेव राज, अमर उजाला, कुल्लू
Published by: Krishan Singh
Updated Wed, 04 Aug 2021 11:48 AM IST
सार
पिछले चार दशकों से कुल्लू क्षेत्र में बारिश की मात्रा कम हुई है। हालांकि, कई बार बारिश अधिक होने से नुकसान भी अधिक हो रहा है। जिले में बादल फटने और भूस्खलन जैसी घटनाएं भी बढ़ रही हैं।
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बादल फटने से तबाही(फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में बरसात के दौरान लोगों को 48 घंटे पहले पता चल जाएगा कि कहां बादल फटने वाला है। लगातार हो रहे नुकसान से बचने के लिए जीबी पंच राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान ऐसा यंत्र बनाने की दिशा में काम कर रहा है। संस्थान का दावा है कि दो साल में यंत्र बना लेंगे, जिससे बादल फटने की घटनाओं का 48 घंटे पहले पता चल जाएगा। पिछले चार दशकों से कुल्लू क्षेत्र में बारिश की मात्रा कम हुई है। हालांकि, कई बार बारिश अधिक होने से नुकसान भी अधिक हो रहा है। जिले में बादल फटने और भूस्खलन जैसी घटनाएं भी बढ़ रही हैं।
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कुल्लू में वैज्ञानिकों की ओर से दो साल में एक ऐसा यंत्र बनाया जाएगा। जिससे हर गांव का एकदम सही तापमान और बारिश का पूर्वानुमान लगाया जा सके। इसके अंतर्गत बादल फटने जैसी घटनाओं का पूर्वानुमान भी लग पाएगा। -राकेश कुमार, वैज्ञानिक, जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान, मौहल।
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सीएसआईआर के सुपर कंप्यूटर की ली जाएगी मदद
प्रोजेक्ट पर जीबी पंत संस्थान की वैज्ञानिक डॉ. रेणुलता, सीएसईआर से डॉ. केसी गौड़ा, डॉ. जीएन महापात्रा, शोधार्थी शायन्ता घोष, रजत ठाकुर काम कर रहे हैं। इसमें सीएसईआर बंगलूरू के आधुनिक तकनीक वाले सुपर कंप्यूटर की भी मदद ली जाएगी।
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बढ़ रहीं बादल फटने की घटनाएं, ब्यास का तटीयकरण फाइलों में
ब्यास और पार्वती नदी के किनारे बसे कुल्लू-मनाली में बरसात तबाही का मंजर लेकर आती है। हर साल यहां कई लोगों की जानें चली जाती हैं, करोड़ों की संपत्ति को नुकसान हो रहा है। जिला में हर साल बादल फटने की घटनाएं बढ़ने लगी हैं, जो चिंता का विषय है। जुलाई के महीने में मणिकर्ण के ब्रह्मगंगा नाले में बादल फटने से चार लोग लापता हैं। जबकि यहां लाखों का नुकसान भी हुआ था। इसके साथ पिछले दिनों ढलान गांव में बाढ़ से कई घुरों में पानी घुस गया था।
बरसात में कुछ जगहों पर ऐसी बारिश हो रही है कि नदी नालों के समीप रहने वाले लोगों को अपनी जान बचाकर भागना पड़ रहा है। मनाली उपमंडल में पिछले तीन सालों में बादल फटने की कई घटनाएं हुई हैं। सबसे अधिक खतरा बरसात में ब्यास नदी का रहता है। वर्ष 2018 में ब्यास नदी ने पलचान से औट तक ऐसी तबाही मचाई कि सैकड़ों लोग रातोंरात अपने घर छोड़कर भाग गए थे। इसके बाद प्रदेश सरकार ने एलान किया था कि ब्यास नदी के तटीयकरण के लिए एक योजना तैयार की जाएगी।
योजना की प्रक्रिया भी शुरू हुई। लेकिन यह फाइलों में ही दबकर रह गई। हालांकि पर्यावरण प्रेमियों का मानना है कि पहले से बरसात में अधिक नुकसान हो रहा है। इससे बचने के लिए अभी से प्रयास करने होंगे। नालों में बरसात के हर साल बाढ़ व बादल फटने की घटनाएं बढ़ रही हैं। नदी नालों के साथ बस्ती वाले स्थानों को सुरक्षित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। उपायुक्त आशुतोष गर्ग ने कहा कि बरसात के मौसम को देखते हुए आपदा प्रबंधन के लिए प्रशासन तैयार हैं। विभागों को भी इस संबंध में दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।