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Shimla News: आईजीएमसी के लिए भीड़ से भरी बसों में करना होगा सफर
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केएनएच से ब्लॉक-ए की दूसरी मंजिल में शिफ्ट होगी गायनी ओपीडी, महिलाओं को झेलनी होंगी दिक्कतें
सीधी बस सेवा की कमी, टैक्सी सेवा का भी अभाव
आदित्य सोफत
शिमला। कमला नेहरू अस्पताल से इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में गायनी ओपीडी को शिफ्ट करने का फरमान तो सरकार ने जारी कर दिया है लेकिन धरातल पर सुविधाएं नहीं हैं। वहीं गर्भवती महिलाओं को आईजीएमसी तक पहुंचना भी आसान नहीं होगा। महिलाओं को भीड़ से भरी बसों में सफर करना होगा।
गायनी ओपीडी को आईजीएमसी के ब्लॉक-ए की दूसरी मंजिल में संचालित किया जाएगा। अस्पताल में गायनी ओपीडी के लिए दो कमरे, एक कमरा माइनर ओटी के लिए दिया है। इसके अलावा वार्ड भी तैयार किया है। वर्तमान में दोनों अस्पतालों में ओपीडी चल रही है, लेकिन 16 अप्रैल से केएनएच में गायनी ओपीडी नहीं लगेगी और महिलाओं को उपचार के लिए आईजीएमसी में ही जाना पड़ेगा। ऐसे में यहां पर ओपीडी के बाहर बैठने तक की व्यवस्था नहीं है। औपचारिकता पूरी करने के लिए कुछ बेंच लगाए हैं लेकिन वह महिलाओं की उमड़ने वाली भीड़ के लिए कम हैं।
हैरत की बात तो यह है कि कुछ ही जगहों से आईजीएमसी के लिए बसें चलती हैं और उनमें भी भीड़ रहती है। सीधी बस सेवा तक की कमी है। टैक्सी सेवा तक का अभाव है और सड़क की हालत भी काफी खस्ताहाल है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक पहुंचने में भारी दिक्कतें झेलनी होंगी। कमला नेहरू अस्पताल में गायनी से संबंधित मामलों को लेकर दी जाने वाली सुविधाएं लगभग पर्याप्त हैं। यहां पर बैठने तक की व्यवस्था बेहतर तरीके से की गई है तथा भवन पर काफी बड़ा है। आईजीएमसी में यह ओपीडी महज दो कमरों में सिमट जाएगी। प्रदेशभर से आने वाली महिलाएं केएनएच में आसानी से पहुंच सकती हैं, यह अस्पताल सर्कुलर रोड के एकदम साथ है।
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केएनएच का नाम मिटाने का है प्रयास
जनवादी महिला समिति ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से कमला नेहरू अस्पताल (केेएनएच) का नाम मिटाने का प्रयास किया जा रहा है। कमला नेहरू अस्पताल की स्थापना करने वाली लेडी रीडिंग एक सामाजिक कार्यकर्ता थी। शुरू में इस अस्पताल का नाम भी लेडी रीडिंग ही थी। लेडी रीडिंग 1910 से 1916 तक भारत के वायस राॅय लॉर्ड हार्डिंग की पत्नी थीं। एक ऐसी महिला थी जिन्होंने महिला सशक्तीकरण को लेकर कई प्रकार के कार्य किए थे। फरमान जारी करने के बाद ही ओपीडी को शिफ्ट कर दिया है।
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सीधी बस सेवा की कमी, टैक्सी सेवा का भी अभाव
आदित्य सोफत
शिमला। कमला नेहरू अस्पताल से इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में गायनी ओपीडी को शिफ्ट करने का फरमान तो सरकार ने जारी कर दिया है लेकिन धरातल पर सुविधाएं नहीं हैं। वहीं गर्भवती महिलाओं को आईजीएमसी तक पहुंचना भी आसान नहीं होगा। महिलाओं को भीड़ से भरी बसों में सफर करना होगा।
गायनी ओपीडी को आईजीएमसी के ब्लॉक-ए की दूसरी मंजिल में संचालित किया जाएगा। अस्पताल में गायनी ओपीडी के लिए दो कमरे, एक कमरा माइनर ओटी के लिए दिया है। इसके अलावा वार्ड भी तैयार किया है। वर्तमान में दोनों अस्पतालों में ओपीडी चल रही है, लेकिन 16 अप्रैल से केएनएच में गायनी ओपीडी नहीं लगेगी और महिलाओं को उपचार के लिए आईजीएमसी में ही जाना पड़ेगा। ऐसे में यहां पर ओपीडी के बाहर बैठने तक की व्यवस्था नहीं है। औपचारिकता पूरी करने के लिए कुछ बेंच लगाए हैं लेकिन वह महिलाओं की उमड़ने वाली भीड़ के लिए कम हैं।
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हैरत की बात तो यह है कि कुछ ही जगहों से आईजीएमसी के लिए बसें चलती हैं और उनमें भी भीड़ रहती है। सीधी बस सेवा तक की कमी है। टैक्सी सेवा तक का अभाव है और सड़क की हालत भी काफी खस्ताहाल है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक पहुंचने में भारी दिक्कतें झेलनी होंगी। कमला नेहरू अस्पताल में गायनी से संबंधित मामलों को लेकर दी जाने वाली सुविधाएं लगभग पर्याप्त हैं। यहां पर बैठने तक की व्यवस्था बेहतर तरीके से की गई है तथा भवन पर काफी बड़ा है। आईजीएमसी में यह ओपीडी महज दो कमरों में सिमट जाएगी। प्रदेशभर से आने वाली महिलाएं केएनएच में आसानी से पहुंच सकती हैं, यह अस्पताल सर्कुलर रोड के एकदम साथ है।
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केएनएच का नाम मिटाने का है प्रयास
जनवादी महिला समिति ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से कमला नेहरू अस्पताल (केेएनएच) का नाम मिटाने का प्रयास किया जा रहा है। कमला नेहरू अस्पताल की स्थापना करने वाली लेडी रीडिंग एक सामाजिक कार्यकर्ता थी। शुरू में इस अस्पताल का नाम भी लेडी रीडिंग ही थी। लेडी रीडिंग 1910 से 1916 तक भारत के वायस राॅय लॉर्ड हार्डिंग की पत्नी थीं। एक ऐसी महिला थी जिन्होंने महिला सशक्तीकरण को लेकर कई प्रकार के कार्य किए थे। फरमान जारी करने के बाद ही ओपीडी को शिफ्ट कर दिया है।