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Hindi News ›   City & states ›   Rainfall deficit of 20–59% in 16 UP districts; Bhakra water level 35 feet below; concern in Punjab-Himachal.

मानसून: यूपी के 16 जिलों में 20 से 59% तक कम रही बारिश, भाखड़ा में जलस्तर 35 फीट नीचे; पंजाब-हिमाचल में चिंता

Fri, 02 Oct 2026 03:33 AM IST
दुष्यंत शर्मा लखनऊ से विनीत चतुर्वेदी, पटियाला से रिंपी गुप्ता और बिलासपुर से सरोज पाठक के साथ अनिल ठाकुर
लखनऊ से विनीत चतुर्वेदी, पटियाला से रिंपी गुप्ता और बिलासपुर से सरोज पाठक के साथ अनिल ठाकुर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 02 Oct 2026 03:33 AM IST
सार

उत्तर प्रदेश में इस बार रिकॉर्ड बारिश दर्ज की गई है लेकिन बारिश का असंतुलन इस कदर रहा कि 37 जिलों में औसत से कम बारिश हुई तो 37 जिलों में औसत से अधिक मानसून मेहरबान रहा।

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Rainfall deficit of 20–59% in 16 UP districts; Bhakra water level 35 feet below; concern in Punjab-Himachal.
देश के कई हिस्सों में ऐसा हाल भी है.... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मानसून ने इस बार देश में कई रूप दिखाए हैं। कहीं खूब बारिश हुई है तो कहीं सूखा पड़ा हुआ है। उत्तर प्रदेश में इस बार रिकॉर्ड बारिश दर्ज की गई है लेकिन बारिश का असंतुलन इस कदर रहा कि 37 जिलों में औसत से कम बारिश हुई तो 37 जिलों में औसत से अधिक मानसून मेहरबान रहा। वहीं हिमाचल के भाखड़ा नागल बांध में पांच साल में सबसे कम जलस्तर पहुंचने से हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और पंजाब में जल संकट पैदा होने का खतरा बढ़ गया है।

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यूपी: गाजियाबाद, शामली समेत चार जिलों में 60% कम बरसात

उत्तर प्रदेश में इस बार मानसून ने बारिश का दस साल का रिकार्ड तोड़ दिया। लेकिन प्रदेश में जिलेवार वर्षा का वितरण असमान रहा। एक जून से 30  सितंबर के दौरान 802.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो औसत से आठ प्रतिशत अधिक है। 

इसके बावजूद 37 जिलों में औसत से कम बारिश हुई, जबकि 37 जिलों में औसत से अधिक वर्षा दर्ज की गई। आगरा में बारिश औसत के बराबर रही। यूपी के 20 में से 16 जिलों में बारिश की कमी 20 से 59 प्रतिशत रही, जबकि देवरिया, कुशीनगर, गाजियाबाद और शामली में कमी औसत के 60 प्रतिशत से भी अधिक रही। इस बार प्रदेश में मानसून की शुरुआत कमजोर रही। जून में औसत से 54 और जुलाई में 17 प्रतिशत कम बारिश हुई। अगस्त में 24 प्रतिशत अधिक बारिश ने कमी पूरी की। सितंबर में तो मानसून खूब बरसा। इस महीने यूपी में 250.2 मिलीमीटर बारिश हुई, जो औसत से 63 प्रतिशत अधिक है।

2018 की बारिश का आंकड़ा छूटा पीछे
दस साल के आंकड़ों में इससे पहले  साल 2018 में प्रदेश में 764.8 मिलीमीटर बारिश हुई थी। इस बार 38.1 मिलीमीटर ज्यादा बारिश हुई। पश्चिमी यूपी में 782.7 मिलीमीटर बारिश हुई, जो दस साल में सर्वाधिक है। पूर्वी यूपी में 817 मिलीमीटर बारिश हुई, लेकिन यहां 2021 का 867.3 मिलीमीटर का आंकड़ा अब भी सबसे अधिक है। मौसम विभाग ने अक्तूबर में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया है।

यूपी में बीते दस साल में बारिश का हाल

वर्ष उत्तर प्रदेश पूर्वी यूपी पश्चिमी यूपी
2017 602.7 (-19%) 653.1 (-18%) 528.5 (-21%)
2018 764.8 (+2%) 756.5 (-5%) 777.0 (+16%)
2019 722.3 (-3%) 852.5 (+7%) 535.7 (-20%)
2020 650.0 (-13%) 782.9 (-2%) 459.5 (-32%)
2021 750.2 (+1%) 867.3 (+9%) 582.5 (-13%)
2022 533.5 (-29%) 556.8 (-30%) 500.1 (-26%)
2023 620.3 (-17%) 567.3 (-29%) 696.2 (+4%)
2024 744.0 (0%) 745.0 (-7%) 742.6 (+11%)
2025 701.6 (-6%) 666.0 (-17%) 752.5 (+12%)
2026 802.9 (+8%) 817.0 (+2%) 782.7 (+16%)


पश्चिमी यूपी में 16% ज्यादा बारिश
पश्चिमी यूपी में औसत से 16 प्रतिशत अधिक और पूर्वी यूपी में दो प्रतिशत अधिक बारिश हुई। चित्रकूट में सबसे ज्यादा 1358.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। बांदा में 1348.4, बिजनौर में 1348.2 और बहराइच में 1343.8 मिलीमीटर बारिश हुई। वहीं  14 जिलों में बारिश 1000  मिलीमीटर से अधिक रही।

 

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पंजाब...26 साल का सिंचाई पर सबसे बड़ा संकट, भूजल पर खतरा

पंजाब में वर्ष 2000 के बाद इस साल तीसरा सबसे सूखा मानसून रहा है। पंजाब में जून से सितंबर तक सामान्य के मुकाबले 38 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई। मानसून की बेरुखी का असर खेतों से लेकर बांधों तक दिखाई दे रहा है। सामान्य से कम बारिश ने जहां किसानों की सिंचाई की जरूरत बढ़ा दी, वहीं पहाड़ी कैचमेंट क्षेत्रों में कम बारिश के कारण भाखड़ा और पौंग समेत प्रमुख बांधों में पानी की आवक प्रभावित हुई। नतीजा यह रहा कि धान की फसल के दौरान ट्यूबवेल पर निर्भरता बढ़ी और बिजली की मांग भी बढ़ गई।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जून से सितंबर तक पंजाब में सिर्फ 272.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि इस अवधि का सामान्य आंकड़ा 439.8 मिलीमीटर है। आंकड़ों के मुताबिक 2000 के बाद यह पंजाब में इस अवधि का तीसरा सबसे कम बारिश वाला साल रहा है। 

अगली फसल को भी कम मिलेगा पानी
बांधों में कम पानी का असर केवल मौजूदा खरीफ सीजन तक सीमित नहीं है। इन बांधों का पानी सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है। यदि बांधों में पर्याप्त भंडारण नहीं हो पाता तो आने वाले सूखे महीनों में सिंचाई के लिए उपलब्ध पानी पर दबाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि इस बार कम बारिश को केवल मौजूदा फसल की समस्या नहीं, बल्कि रबी सीजन की तैयारी के लिए भी चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है।

अब सबसे बड़ी चिंता, सर्दियों तक कितना पानी बचेगा
मानसून सीजन खत्म होने के साथ अब नजर बांधों में बचे पानी और आने वाले महीनों की जरूरत पर है। कम बारिश के कारण मिट्टी की नमी, भूजल रिचार्ज और जलाशयों की भरपाई तीनों प्रभावित हुए हैं। ऐसे में पंजाब के लिए चुनौती सिर्फ इस सीजन की फसल बचाने की नहीं, बल्कि अगले सिंचाई चक्र के लिए पानी का संतुलन बनाए रखने की भी है।


 

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हिमाचल: बांध प्रबंधन ने दिल्ली समेत 4 राज्यों को किया अलर्ट

देश के उत्तरी राज्यों की सिंचाई जरूरतों को पूरा करने वाले भाखड़ा बांध में इस बार पांच साल में सबसे कम पानी है। हिमाचल प्रदेश में मानसून सीजन के दौरान इस बार सामान्य से 11 फीसदी कम बारिश के साथ 1977 के बाद दूसरी बार स्नो मेल्ट कमजोर रहने से भी बांध के जलस्तर पर असर पड़ा है। 

भाखड़ा बांध में पिछले साल की तुलना में इस बार जलस्तर 35.12 फीट नीचे है। लाइव स्टोरेज 67 फीसदी है। स्थिति को देखते हुए भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) ने पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली को पानी का दुरुपयोग नहीं करने व जरूरत के मुताबिक पानी इस्तेमाल करने को कहा है। मानसून सीजन में भाखड़ा बांध का जलस्तर कम रहने से गर्मियों में चारों राज्यों में जल संकट हो सकता है। बिजली उत्पादन पर भी इसका असर दिख सकता है।

बर्फ पिघलने की गति ने भी किया प्रभावित
भाखड़ा बांध से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली को पानी मिलता है। भाखड़ा बांध में हिमाचल से निकलने वाली सतलुज और ब्यास नदियों का पानी आता है। इस बार मानसून सीजन के दौरान प्रदेश में सामान्य से 11 फीसदी कम बारिश हुई है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटों में हिमाचल से मानसून विदा हो जाएगा। 

  • ऐसे में अब बारिश के आसार कम हैं। इस साल भाखड़ा बांध में पानी की उपलब्धता पर दो तरफ से असर पड़ा है। एक ओर बारिश कम हुई, दूसरी ओर बर्फ पिघलने से आने वाला पानी भी सामान्य से कम रहा। 

पौंग और रणजीत सागर में भी कम जलस्तर
भाखड़ा के साथ पौंग बांध और रणजीत सागर में भी इस बार जलस्तर कम है। पौंग बांध में 30 सितंबर को जलस्तर 1,367 फीट रहा, जो पिछले साल के 1,389.30 फीट से 22.30 फीट नीचे है। यहां लाइव स्टोरेज 73 फीसदी रहा, जबकि पिछले साल 99 फीसदी था। 30 सितंबर को पौंग में 5,508 क्यूसेक आवक हुई, जबकि पिछले साल 9,778 क्यूसेक थी। पंडोह में आवक 4,619 क्यूसेक रही, जबकि पिछले साल 8,758 क्यूसेक थी।





 

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