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हिमाचल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: विशेषज्ञ डॉक्टरों को मिलेगा सात हजार रुपये मासिक उच्च शिक्षा भत्ता

Fri, 02 Oct 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 02 Oct 2026 05:00 AM IST
सार

न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने डॉ. विनोद गुप्ता और अन्य डॉक्टरों की ओर से दायर याचिका को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया कि सरकारी स्पॉन्सर्ड पीजी डिग्री धारक डॉक्टरों को उनकी देय तिथि से 7,000 प्रति माह का उच्च शिक्षा भत्ता तुरंत जारी किया जाए। 

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Major decision by Himachal High Court: Specialist doctors to receive a monthly higher education allowance of ₹
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में कार्यरत विशेषज्ञ चिकित्सा अधिकारियों (मेडिकल ऑफिसर) को बड़ी राहत दी है। अदालत ने उन डॉक्टरों को उच्च शिक्षा भत्ता देने का आदेश दिया है, जिन्हें सिर्फ इस तकनीकी आधार पर रोक दिया गया था कि उनकी विशेषज्ञता भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में शामिल नहीं थी। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने डॉ. विनोद गुप्ता और अन्य डॉक्टरों की ओर से दायर याचिका को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया कि सरकारी स्पॉन्सर्ड पीजी डिग्री धारक डॉक्टरों को उनकी देय तिथि से 7,000 प्रति माह का उच्च शिक्षा भत्ता तुरंत जारी किया जाए।

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भत्ते के भुगतान को चार सप्ताह के भीतर पूरा करने के आदेश
अदालत ने इस पूरी प्रक्रिया और भत्ते के भुगतान को चार सप्ताह के भीतर पूरा करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने माना कि सरकार की ओर से प्रायोजित होने और सेवा में स्पेशलिस्ट के रूप में तैनात होने के बाद केवल औपचारिक नियम संशोधन न होने का बहाना बनाकर वित्तीय लाभ रोकना तार्किक और न्यायसंगत नहीं है। जब राज्य सरकार ने खुद इन डॉक्टरों को विशेष पाठ्यक्रमों के लिए प्रायोजित किया और वापस आने पर स्पेशलिस्ट के रूप में तैनात किया, तो यह माना जाएगा कि सरकार ने इन विधाओं को स्वीकार कर लिया है। सरकार अनिश्चित काल के लिए विचारधीन होने के नाम पर अपने अधिकारियों के अधिकारों से आंखें नहीं मूंद सकती। वर्ष 2019 की पोस्ट ग्रेजुएट नीति के तहत राज्य सरकार ने खुद इन्हें एम्स ऋषिकेश से जेरियाट्रिक्स (वृद्धों का इलाज) और इमरजेंसी मेडिसिन जैसी विशिष्टताओं में एमडी करने के लिए स्पॉन्सर किया था।

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कोर्ट ने असमान रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई
पढ़ाई पूरी कर लौटने के बाद इन्हें स्पेशलिस्ट और सीनियर रेजिडेंट के रूप में तैनात किया गया। जब डॉक्टरों ने 2013 के सरकारी नोटिफिकेशन के तहत 7,000 मासिक उच्च शिक्षा भत्ते की मांग की, तो सरकार ने यह कहकर मामला टाल दिया कि ये दोनों स्पेशलिटीज वर्ष 2012 के भर्ती नियमों के परिशिष्ट-ए में दर्ज नहीं हैं। सुनवाई के दौरान सामने आया कि स्वास्थ्य विभाग ने पहले भी पल्मोनरी मेडिसिन और इमरजेंसी मेडिसिन में एमडी करने वाले अन्य डॉक्टरों को यह भत्ता दिया था, भले ही उनकी स्पेशलिटीज भी नियमों की लिस्ट में शामिल नहीं थीं। कोर्ट ने इस असमान रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता डॉक्टर भी अन्य स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की तरह ही पूरी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं और उनके पास मान्यता प्राप्त पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री है। इसलिए उनके साथ भत्ते को लेकर कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता।

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