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चिंताजनक : 60 फीसदी तक सूख गया गिरि परियोजना में पानी, साल 2018 जैसे बन गए हालात

Thu, 30 May 2024 11:19 AM IST
शिमला ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: शिमला ब्यूरो Updated Thu, 30 May 2024 11:19 AM IST
सार

 शिमला की दूसरी सबसे बड़ी पेयजल परियोजना गिरि में हालात चिंताजनक हो गए हैं। भीषण गर्मी के चलते इस परियोजना में जलस्तर छह साल के न्यूनतम स्तर पर आ गया है।

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Worrying: Water in Giri project has dried up to 60 percent
गिरी नदी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला की दूसरी सबसे बड़ी पेयजल परियोजना गिरि में हालात चिंताजनक हो गए हैं। भीषण गर्मी के चलते इस परियोजना में जलस्तर छह साल के न्यूनतम स्तर पर आ गया है। कंपनी के अनुसार इस परियोजना में साल 2018 जैसे हालात बन गए हैं। गिरि में 60 फीसदी पानी सूख चुका है। अब जो बाकी 35 से 40 फीसदी पानी बचा है, उसे इकट्ठा कर शहर के लिए सप्लाई किया जा रहा है। कंपनी देहा नाले से भी पानी शहर के लिए सप्लाई कर रही है लेकिन इसके बावजूद 18 एमएलडी वाली गिरि से शहर को बुधवार को सिर्फ 9.88 एमएलडी पानी ही मिला है।

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कंपनी का कहना है अन्य वैकल्पिक पेयजल स्रोतों को तलाश कर शहर के लिए पानी देने का प्रयास किया जा रहा है। गिरि के साथ लगते शेंटी नाले से भी पानी लेने की तैयारी है। संबंधित पंचायतों से इसकी एनओसी ली जा रही है। साल 2018 में भी गिरि में 60 फीसदी तक पानी सूख गया था। इसके चलते शिमला में भारी जलसंकट हुआ था जो विदेशों तक चर्चा में रहा था। हालांकि, इस बार राहत यह है कि चाबा से भी अब शहर को 10 से 12 एमएलडी पानी मिल रहा है। कंपनी का दावा है कि गिरि में जलस्तर घटने के बावजूद शहर में तीसरे दिन पानी दिया जा रहा है। कंपनी ने लोगों को पानी की बचत करने की सलाह दी है।

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जलसंकट के बीच राजधानी में टैंकरों की मांग बढ़ी
राजधानी में गहराए जलसंकट के बीच टैंकरों से पानी देने की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। पेयजल कंपनी के पास बुधवार को शहरभर से टैंकर से पानी भेजने की 42 जगह से मांग आई। अभी तक रोजाना 25 से 30 टैंकरों की मांग कंपनी को मिल रही थी। कंपनी के अनुसार सीएम हेल्पलाइन नंबर कार्यालय टुटीकंडी, उपायुक्त कार्यालय, एसडीए परिसर कसुम्पटी, पूर्व सीएम जयराम ठाकुर समेत 24 सरकारी कार्यालयों से टैंकर की मांग पहुंची थी। इसके अलावा चुनाव में तैनात कर्मचारियों के लिए भी आठ टैंकर भेजे हैं। कंपनी का कहना है कि अभी निजी भवनों के लिए टैंकर से पानी नहीं दिया जा रहा है। सिर्फ सरकारी दफ्तरों, बड़े संस्थानों को ही टैंकर भेजे जा रहे हैं। कंपनी की परेशानी यह है कि पानी की आपूर्ति देने के लिए सिर्फ चार ही टैंकर उपलब्ध है। इससे आधी मांगें ही पूरी हो पा रही हैं। सार्वजनिक शौचालयों को भी कंपनी टैंकरों से पानी दे रही है।

बदली जाएगी गुम्मा की पुरानी लाइन : मेयर
नगर निगम महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि गुम्मा पेयजल परियोजना की 102 साल पुरानी पाइप लाइन को बदला जा रहा है। नई लाइन बिछने से अब लीकेज के कारण पानी की बर्बादी नहीं होगी। पहले चरण में करीब चार करोड़ रुपये की लागत से नई पाइप लाइन बिछाई जा रही है। महापौर ने कंपनी के अधिकारियों से भी इस काम की रिपोर्ट ली। महापौर ने कहा कि शहरवासियों को नियमित आपूर्ति देने का प्रयास चल रहा है लेकिन परियोजनाओं में जलस्तर घटने से परेशानी आ रही है। कंपनी को पानी की लिफ्टिंग बढ़ाने, लीकेज रोकने के हरसंभव प्रयास करने के निर्देश दिए हैं।

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