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शिमला: नशे के खिलाफ तीन स्तरीय रणनीति पर होगा काम, उत्पादन से खपत तक टूटेगा तस्करी का नेटवर्क

Thu, 24 Sep 2026 09:44 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 24 Sep 2026 09:44 PM IST
सार

केंद्र की प्रस्तावित रणनीति में जिलों को नशीले पदार्थों के उत्पादन या प्रवेश, परिवहन और खपत के आधार पर वर्गीकृत किया जाएगा। दिल्ली में देश के सभी राज्यों के एएनटीएफ (एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स) प्रमुखों के राष्ट्रीय सम्मेलन में नई रणनीति के तहत काम करने का फैसला लिया गया है। 

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Work to focus on a three tiered strategy against drugs; smuggling network to be dismantled from production to
नशे के खिलाफ तैयार होगी रणनीति। - फोटो : संवाद

विस्तार

हिमाचल में नशे के खिलाफ कार्रवाई अब जिले की भूमिका के अनुसार अलग-अलग स्तरों पर केंद्रित होगी। केंद्र की प्रस्तावित रणनीति में जिलों को नशीले पदार्थों के उत्पादन या प्रवेश, परिवहन और खपत के आधार पर वर्गीकृत किया जाएगा। दिल्ली में देश के सभी राज्यों के एएनटीएफ (एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स) प्रमुखों के राष्ट्रीय सम्मेलन में नई रणनीति के तहत काम करने का फैसला लिया गया है। हिमाचल से प्रदेश के गृह सचिव वर्चुअल माध्यम से इस बैठक में जुड़े। ताजा निर्देशों के बाद हिमाचल में बाहरी राज्यों से आने वाले नशीले पदार्थों के मार्ग, स्थानीय आपूर्ति तंत्र और खपत वाले क्षेत्रों पर एक साथ निगरानी बढ़ाने का ढांचा तैयार होगा।

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जिलों को तीन श्रेणियों में बांटने का प्रस्ताव है। इनमें उत्पादन या राज्य में प्रवेश वाले क्षेत्र, परिवहन गलियारे और खपत वाले क्षेत्र शामिल किए जाएंगे। प्रत्येक श्रेणी के लिए अलग निगरानी और कार्रवाई की योजना बनाई जाएगी। हिमाचल के संदर्भ में पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ से जुड़े सोलन, ऊना, बद्दी और सिरमौर जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, क्योंकि यह बाहरी राज्यों से आने-जाने वाले मार्गों से जुड़े हैं। दूरदराज क्षेत्रों में अवैध अफीम और भांग की खेती से जुड़े मामलों पर भी निगरानी बढ़ाने की योजना है।
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नशे के खिलाफ अभियान में पुलिस के साथ दूसरे विभागों की भूमिका भी तय करने पर जोर है। गांव के पटवारी और स्कूल प्रधानाचार्य से लेकर पुलिस अधिकारियों, पुलिस महानिदेशक और मुख्य सचिव तक अलग-अलग स्तर पर जिम्मेदारी निर्धारित करने की व्यवस्था प्रस्तावित है। राजस्व विभाग से भूमि संबंधी जानकारी, जबकि शिक्षा विभाग से शिक्षण संस्थानों में नशे की रोकथाम और जागरूकता से जुड़े प्रयासों में सहयोग लिया जा सकता है। रणनीति में नशीले पदार्थों की जब्ती के साथ मुकदमे को सजा तक पहुंचाने पर जोर दिया गया है।
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जांच अधिकारियों और सरकारी वकीलों के बीच शुरुआती स्तर से समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आरोपपत्र तैयार करते समय कानूनी और प्रक्रियागत कमियों को दूर किया जा सके। नशीले पदार्थों की तस्करी में इंटरनेट आधारित माध्यमों, गुप्त संपर्क व्यवस्था और क्रिप्टोकरेंसी के संभावित इस्तेमाल की जांच के लिए तकनीकी विशेषज्ञों और अधिकारियों की विशेष टीम बनाने पर भी जोर दिया जाएगाद्य। हिमाचल में ऐसी व्यवस्था बनाकर डिजिटल लेनदेन और संपर्कों के जरिये आपूर्ति तंत्र की जांच को मजबूती देने की योजना है।


पर्यटन क्षेत्रों में वीजा अवधि से अधिक समय तक रहने वाले विदेशी नागरिकों की भी निगरानी बढ़ाने की योजना है। नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में दोष या अन्य कानूनी आधार स्थापित होने पर मौजूदा नियमों के तहत निर्वासन और प्रतिबंधित सूची में डालने जैसी कार्रवाई की जा सकती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य नशे से जुड़े किसी भी बाहरी नेटवर्क की संभावित गतिविधियों पर नजर रखना है।

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