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Shimla News: शिक्षकों की बिना मंजूरी छुट्टी जाने पर एचपीयू ने लगाई रोक
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डीन स्टडीज के माध्यम से आवेदन देना जरूरी
नियम पूरे न होने पर आवेदन सीधे होंगे खारिज
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में अब शिक्षक सक्षम प्राधिकारी की पूर्व मंजूरी के बिना अवकाश, टुअर, ड्यूटी लीव, सेमिनार, सम्मेलन और अन्य शैक्षणिक कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो सकेंगे।
विश्वविद्यालय की स्थापना शाखा ने इस संबंध में सभी शिक्षकों के लिए आदेश जारी किया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा है कि बिना अनुमति छुट्टी पर जाने और शैक्षणिक सत्र के दौरान ड्यूटी लीव लेने से विभागों के शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य प्रभावित होते हैं। विवि के अध्यादेश 36.24 का हवाला देते हुए ड्यूटी लीव के प्रावधान स्पष्ट किए हैं। इसके तहत कुलपति या उनके अधिकृत अधिकारी विभागाध्यक्ष या डीन स्टडीज की सिफारिश पर शिक्षक को ड्यूटी लीव दे सकते हैं। सामान्य तौर पर एक वर्ष में अधिकतम एक माह और तीन वर्ष में अधिकतम तीन माह तक ड्यूटी लीव का प्रावधान है।
विश्वविद्यालय ने निर्देश दिए हैं कि ड्यूटी लीव का आवेदन डीन स्टडीज के माध्यम से उचित चैनल से भेजना होगा। आवेदन निर्धारित प्रपत्र पर पर्याप्त समय पहले देना होगा ताकि उसकी जांच और प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके। आवेदन में ड्यूटी लीव का उद्देश्य, अवधि, स्थान और आधिकारिक कार्य की प्रकृति स्पष्ट करनी होगी। आवेदन के साथ सम्मेलन या सेमिनार का निमंत्रण पत्र, कार्यक्रम की रूपरेखा, शोधपत्र प्रस्तुत करने की स्वीकृति, नामांकन या आदेश समेत संबंधित दस्तावेज लगाना अनिवार्य होगा। विभागाध्यक्ष, चेयरपर्सन, निदेशक या प्राचार्य की सिफारिश भी आवेदन के साथ भेजनी होगी।
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नियम पूरे न होने पर आवेदन सीधे होंगे खारिज
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में अब शिक्षक सक्षम प्राधिकारी की पूर्व मंजूरी के बिना अवकाश, टुअर, ड्यूटी लीव, सेमिनार, सम्मेलन और अन्य शैक्षणिक कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो सकेंगे।
विश्वविद्यालय की स्थापना शाखा ने इस संबंध में सभी शिक्षकों के लिए आदेश जारी किया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा है कि बिना अनुमति छुट्टी पर जाने और शैक्षणिक सत्र के दौरान ड्यूटी लीव लेने से विभागों के शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य प्रभावित होते हैं। विवि के अध्यादेश 36.24 का हवाला देते हुए ड्यूटी लीव के प्रावधान स्पष्ट किए हैं। इसके तहत कुलपति या उनके अधिकृत अधिकारी विभागाध्यक्ष या डीन स्टडीज की सिफारिश पर शिक्षक को ड्यूटी लीव दे सकते हैं। सामान्य तौर पर एक वर्ष में अधिकतम एक माह और तीन वर्ष में अधिकतम तीन माह तक ड्यूटी लीव का प्रावधान है।
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विश्वविद्यालय ने निर्देश दिए हैं कि ड्यूटी लीव का आवेदन डीन स्टडीज के माध्यम से उचित चैनल से भेजना होगा। आवेदन निर्धारित प्रपत्र पर पर्याप्त समय पहले देना होगा ताकि उसकी जांच और प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके। आवेदन में ड्यूटी लीव का उद्देश्य, अवधि, स्थान और आधिकारिक कार्य की प्रकृति स्पष्ट करनी होगी। आवेदन के साथ सम्मेलन या सेमिनार का निमंत्रण पत्र, कार्यक्रम की रूपरेखा, शोधपत्र प्रस्तुत करने की स्वीकृति, नामांकन या आदेश समेत संबंधित दस्तावेज लगाना अनिवार्य होगा। विभागाध्यक्ष, चेयरपर्सन, निदेशक या प्राचार्य की सिफारिश भी आवेदन के साथ भेजनी होगी।
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