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Shimla News: अंग्रेजों के जमाने की अनाज मंडी न शिफ्ट हुई न ही हालात सुधरे
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वर्ष 1983 से गंज बाजार अनाज मंडी को शिफ्ट करने की फाइलों में बनती रहीं योजनाएं, शिलान्यास से आगे नहीं बढ़ पाई बात
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में अंग्रेजों के जमाने में बनी अनाज मंडी गंज बाजार की हालत में आज तक न कोई सुधार हुआ, न यह शिफ्ट हुई और न ही इसमें सुविधाओं का विस्तार हुआ।
मंडी आज भी नगर निगम के पुराने और खस्ताहाल भवनों तथा परिसर में चल रही है। इसके विस्तार और इसे शिफ्ट किए जाने की मांग 1983 से लगातार उठती रही है। दो बार जगह चिह्नित कर शिलान्यास भी हुए लेकिन योजना आगे नहीं बढ़ी। सरकारें आती रहीं, जाती रहीं, लेकिन इस मंडी का सुधार नहीं हुआ। मंडी के कारोबारियों ने सत्ता में रही सरकारों के सामने अपनी मांग उठाई, लेकिन उन्हें आश्वासन ही मिले। जमीनी स्तर पर मंडी आज भी उसी हाल में है।
मंडी के लिए कार्ट रोड से आने वाली सड़क इतनी तंग है कि इसमें जीप के अलावा कोई बड़ा वाहन नहीं आ सकता। मंडी में माल उतारने और चढ़ाने के लिए उपयुक्त जगह तक नहीं है। आज भी मंडी का पूरा कारोबार मजदूरों पर निर्भर है। इस ऐतिहासिक मंडी के अस्तित्व को बचाना दिन-प्रतिदिन मुश्किल होता जा रहा है। किसी समय मंडी में अना के 40 से अधिक थोक व्यापारी थे लेकिन आज इनकी संख्या घटकर आठ से दस तक रह गई है। यहां से शिमला और किन्नौर तक राशन जाता था। सुविधाओं की कमी और ग्राहकों के लिए पार्किंग की व्यवस्था न होने से कारोबार प्रभावित हो रहा है। मंडी में जगह की कमी के कारण कारोबारियों को बाहर खुले में ही आटा, दाल और चावल सजाकर बेचने पड़ रहे हैं।
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दो-दो मुख्यमंत्रियों ने किया शिलान्यास
पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह और जयराम ठाकुर ने दाड़नी का बागीचा में अनाज मंडी के लिए चिह्नत जगह पर बाकायदा शिलान्यास किया लेकिन मंडी नहीं बन पाई। अब मौजूदा सरकार ने कारोबारियों की मांग को पूरा करने के लिए मैहली में फोरलेन किनारे मंडी निर्माण के लिए जगह चिह्नत की है। स्मार्ट सिटी के बजट से बहुमंजिला अनाज मंडी बनाने की योजना पर काम हुआ था लेकिन इसे कारोबारियों ने ही नकार दिया।
सरकार जल्द खुले स्थान पर करे निर्माण
पांच दशकों से अनाज मंडी के बड़े आढ़तियों को किसी खुले और सुरक्षित स्थान पर सभी तरह की सुविधाएं उपलब्ध करवाकर शिफ्ट करने की मांग की जा रही है। यह मांग आज तक पूरी नहीं हुई। सरकार जल्द मंडी को शिफ्ट करे।
-दीपक श्रीधर, प्रधान, अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन
गंज बाजार में बने रिटेल मार्केट
अनाज मंडी नगर निगम के भवनों और परिसर में ही चल रही है, जिसमें कारोबारी अपने कारोबार का विस्तार भी नहीं कर पा रहे हैं। इस मंडी के बड़े आढ़तियों के लिए शहर से बाहर जल्द नई अनाज या खाद्यान्न मंडी विकसित की जाए और मौजूदा मंडी को परचून कारोबारियों के लिए रिटेल मार्केट के रूप में विकसित किया जाए।
-संजीव ठाकुर, अध्यक्ष, व्यापार मंडल शिमला
मंडी में मूलभूत सुविधाओं की कमी
अनाज मंडी में पानी, सफाई, पार्किंग, अनलोडिंग पॉइंट न होने जैसी कई समस्याएं हैं। यहां तक लोडेड ट्रक (लदे हुए ट्रक) तक नहीं पहुंच पाते। ग्राहकों के लिए अपनी गाड़ी खड़ी करने तक की जगह नहीं है। इससे भी कारोबार पर असर पड़ रहा है। सरकार जल्द नई मंडी का निर्माण करे और यहां के कारोबारियों की समस्याओं का समाधान करे।
-रोहित सेखरी, कारोबारी
कारोबारी नहीं कर पा रहे कारोबार का विस्तार
कारोबारी अपने स्तर पर नगर निगम के भवनों की मरम्मत और विस्तार नहीं करवा पा रहे हैं। नगर निगम के भवनों और जमीन पर ही पूरी मंडी चल रही है। नगर निगम की वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) योजना भी सिरे नहीं चढ़ पा रही है। ऐसे में मंडी को शिफ्ट किया जाना ही स्थायी समाधान है।
सुभाष चंद, उपप्रधान, आढ़ती एसोसिएशन अनाज मंडी
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में अंग्रेजों के जमाने में बनी अनाज मंडी गंज बाजार की हालत में आज तक न कोई सुधार हुआ, न यह शिफ्ट हुई और न ही इसमें सुविधाओं का विस्तार हुआ।
मंडी आज भी नगर निगम के पुराने और खस्ताहाल भवनों तथा परिसर में चल रही है। इसके विस्तार और इसे शिफ्ट किए जाने की मांग 1983 से लगातार उठती रही है। दो बार जगह चिह्नित कर शिलान्यास भी हुए लेकिन योजना आगे नहीं बढ़ी। सरकारें आती रहीं, जाती रहीं, लेकिन इस मंडी का सुधार नहीं हुआ। मंडी के कारोबारियों ने सत्ता में रही सरकारों के सामने अपनी मांग उठाई, लेकिन उन्हें आश्वासन ही मिले। जमीनी स्तर पर मंडी आज भी उसी हाल में है।
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मंडी के लिए कार्ट रोड से आने वाली सड़क इतनी तंग है कि इसमें जीप के अलावा कोई बड़ा वाहन नहीं आ सकता। मंडी में माल उतारने और चढ़ाने के लिए उपयुक्त जगह तक नहीं है। आज भी मंडी का पूरा कारोबार मजदूरों पर निर्भर है। इस ऐतिहासिक मंडी के अस्तित्व को बचाना दिन-प्रतिदिन मुश्किल होता जा रहा है। किसी समय मंडी में अना के 40 से अधिक थोक व्यापारी थे लेकिन आज इनकी संख्या घटकर आठ से दस तक रह गई है। यहां से शिमला और किन्नौर तक राशन जाता था। सुविधाओं की कमी और ग्राहकों के लिए पार्किंग की व्यवस्था न होने से कारोबार प्रभावित हो रहा है। मंडी में जगह की कमी के कारण कारोबारियों को बाहर खुले में ही आटा, दाल और चावल सजाकर बेचने पड़ रहे हैं।
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दो-दो मुख्यमंत्रियों ने किया शिलान्यास
पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह और जयराम ठाकुर ने दाड़नी का बागीचा में अनाज मंडी के लिए चिह्नत जगह पर बाकायदा शिलान्यास किया लेकिन मंडी नहीं बन पाई। अब मौजूदा सरकार ने कारोबारियों की मांग को पूरा करने के लिए मैहली में फोरलेन किनारे मंडी निर्माण के लिए जगह चिह्नत की है। स्मार्ट सिटी के बजट से बहुमंजिला अनाज मंडी बनाने की योजना पर काम हुआ था लेकिन इसे कारोबारियों ने ही नकार दिया।
सरकार जल्द खुले स्थान पर करे निर्माण
पांच दशकों से अनाज मंडी के बड़े आढ़तियों को किसी खुले और सुरक्षित स्थान पर सभी तरह की सुविधाएं उपलब्ध करवाकर शिफ्ट करने की मांग की जा रही है। यह मांग आज तक पूरी नहीं हुई। सरकार जल्द मंडी को शिफ्ट करे।
-दीपक श्रीधर, प्रधान, अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन
गंज बाजार में बने रिटेल मार्केट
अनाज मंडी नगर निगम के भवनों और परिसर में ही चल रही है, जिसमें कारोबारी अपने कारोबार का विस्तार भी नहीं कर पा रहे हैं। इस मंडी के बड़े आढ़तियों के लिए शहर से बाहर जल्द नई अनाज या खाद्यान्न मंडी विकसित की जाए और मौजूदा मंडी को परचून कारोबारियों के लिए रिटेल मार्केट के रूप में विकसित किया जाए।
-संजीव ठाकुर, अध्यक्ष, व्यापार मंडल शिमला
मंडी में मूलभूत सुविधाओं की कमी
अनाज मंडी में पानी, सफाई, पार्किंग, अनलोडिंग पॉइंट न होने जैसी कई समस्याएं हैं। यहां तक लोडेड ट्रक (लदे हुए ट्रक) तक नहीं पहुंच पाते। ग्राहकों के लिए अपनी गाड़ी खड़ी करने तक की जगह नहीं है। इससे भी कारोबार पर असर पड़ रहा है। सरकार जल्द नई मंडी का निर्माण करे और यहां के कारोबारियों की समस्याओं का समाधान करे।
-रोहित सेखरी, कारोबारी
कारोबारी नहीं कर पा रहे कारोबार का विस्तार
कारोबारी अपने स्तर पर नगर निगम के भवनों की मरम्मत और विस्तार नहीं करवा पा रहे हैं। नगर निगम के भवनों और जमीन पर ही पूरी मंडी चल रही है। नगर निगम की वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) योजना भी सिरे नहीं चढ़ पा रही है। ऐसे में मंडी को शिफ्ट किया जाना ही स्थायी समाधान है।
सुभाष चंद, उपप्रधान, आढ़ती एसोसिएशन अनाज मंडी