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Shimla News: हाईकोर्ट के फैसले के बाद ही 183 कर्मचारियों पर होगा अंतिम निर्णय
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विश्वविद्यालय ने अस्थायी रूप से बढ़ाया आउटसोर्स कर्मचारियों का कार्यकाल
खास खबर
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने आउटसोर्स आधार पर कार्यरत कर्मचारियों को फिलहाल राहत देते हुए उनका कार्यकाल अस्थायी रूप से बढ़ा दिया है। हालांकि 183 आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य को लेकर अंतिम फैसला अब हिमाचल हाईकोर्ट के निर्णय के बाद ही लिया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह व्यवस्था केवल अंतरिम है ताकि शैक्षणिक और प्रशासनिक कामकाज प्रभावित न हो।
विश्वविद्यालय में आउटसोर्स कर्मचारी विभिन्न विभागों, कार्यालयों, पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं, छात्रावासों और रखरखाव से जुड़े कार्यों में वर्षो से सेवाएं दे रहे हैं। बीते समय में कई बार उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद अस्थायी विस्तार दिया गया लेकिन स्थायी नीति न होने के कारण स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। आउटसोर्स कर्मचारियों का करार सितंबर 2025 में समाप्त हो गया था। इसके बाद कर्मचारियों में नौकरी जाने की आशंका बढ़ गई थी। कर्मचारी संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य सरकार के समक्ष मांग रखी कि लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारियों के लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए।
मामला हिमाचल हाईकोर्ट में पहुंचने के बाद विश्वविद्यालय ने कोई स्थायी निर्णय लेने से परहेज किया है। हिमाचल हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान आउटसोर्स नियुक्तियों और उनकी वैधता को लेकर अहम सवाल उठे हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित संस्थानों से यह स्पष्ट करने को कहा है कि आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए कोई स्थायी नीति है या नहीं और वर्षों से काम कर रहे कर्मचारियों के हितों की रक्षा कैसे की जाएगी। इसी कारण विश्वविद्यालय ने अंतिम निर्णय कोर्ट के आदेश आने तक टाल दिया है। कर्मचारियों ने इस निर्णय का स्वागत किया है, लेकिन इसे अस्थायी समाधान बताया है। कर्मचारियों का कहना है कि बार-बार अल्पकालिक विस्तार से भविष्य असुरक्षित बना रहता है। कई कर्मचारी 8 से 10 वर्षों से विश्वविद्यालय में सेवाएं दे रहे हैं और अब स्थायी समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।
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विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ज्ञान सागर नेगी ने बताया कि आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाएं प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षाओं, कार्यालयी कार्य, तकनीकी सहायता और रखरखाव के लिए जरूरी हैं। यदि अचानक सेवाएं समाप्त की जाती हैं तो विश्वविद्यालय का रोजमर्रा का काम प्रभावित हो सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए कार्यकाल को अस्थायी रूप से बढ़ाया गया है। एफसी बैठक और उच्च न्यायालय के फैसले के बाद काई निर्णय लिया जाएगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने आउटसोर्स आधार पर कार्यरत कर्मचारियों को फिलहाल राहत देते हुए उनका कार्यकाल अस्थायी रूप से बढ़ा दिया है। हालांकि 183 आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य को लेकर अंतिम फैसला अब हिमाचल हाईकोर्ट के निर्णय के बाद ही लिया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह व्यवस्था केवल अंतरिम है ताकि शैक्षणिक और प्रशासनिक कामकाज प्रभावित न हो।
विश्वविद्यालय में आउटसोर्स कर्मचारी विभिन्न विभागों, कार्यालयों, पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं, छात्रावासों और रखरखाव से जुड़े कार्यों में वर्षो से सेवाएं दे रहे हैं। बीते समय में कई बार उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद अस्थायी विस्तार दिया गया लेकिन स्थायी नीति न होने के कारण स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। आउटसोर्स कर्मचारियों का करार सितंबर 2025 में समाप्त हो गया था। इसके बाद कर्मचारियों में नौकरी जाने की आशंका बढ़ गई थी। कर्मचारी संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य सरकार के समक्ष मांग रखी कि लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारियों के लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए।
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मामला हिमाचल हाईकोर्ट में पहुंचने के बाद विश्वविद्यालय ने कोई स्थायी निर्णय लेने से परहेज किया है। हिमाचल हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान आउटसोर्स नियुक्तियों और उनकी वैधता को लेकर अहम सवाल उठे हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित संस्थानों से यह स्पष्ट करने को कहा है कि आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए कोई स्थायी नीति है या नहीं और वर्षों से काम कर रहे कर्मचारियों के हितों की रक्षा कैसे की जाएगी। इसी कारण विश्वविद्यालय ने अंतिम निर्णय कोर्ट के आदेश आने तक टाल दिया है। कर्मचारियों ने इस निर्णय का स्वागत किया है, लेकिन इसे अस्थायी समाधान बताया है। कर्मचारियों का कहना है कि बार-बार अल्पकालिक विस्तार से भविष्य असुरक्षित बना रहता है। कई कर्मचारी 8 से 10 वर्षों से विश्वविद्यालय में सेवाएं दे रहे हैं और अब स्थायी समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।
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विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ज्ञान सागर नेगी ने बताया कि आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाएं प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षाओं, कार्यालयी कार्य, तकनीकी सहायता और रखरखाव के लिए जरूरी हैं। यदि अचानक सेवाएं समाप्त की जाती हैं तो विश्वविद्यालय का रोजमर्रा का काम प्रभावित हो सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए कार्यकाल को अस्थायी रूप से बढ़ाया गया है। एफसी बैठक और उच्च न्यायालय के फैसले के बाद काई निर्णय लिया जाएगा।