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Shimla News: चेक बाउंस मामले में महिला को आठ माह का कारावास
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न्यायाधीश प्रतिभा नेगी की अदालत का फैसला
दोषी महिला ने लिया था 1.20 लाख रुपये का ऋण
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट नंबर-एक शिमला की न्यायाधीश प्रतिभा नेगी की अदालत ने दोषी महिला को आठ माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। हिमाचल प्रदेश अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम (एचएमएफडीसी) की ओर से दायर चेक बाउंस मामले में यह फैसला सुनाया। इसके अलावा दोषी को चेक राशि से दोगुना 2,43,400 रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया है। मुआवजा राशि अदा न करने की स्थिति में दोषी को अतिरिक्त छह माह का कारावास भुगतना होगा।
अभियोजन पक्ष के अनुसार एचएमएफडीसी ने कोटखाई निवासी दोषी महिला रुखसाना बेगम को यूटिलिटी स्टोर चलाने के लिए 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर 1.20 लाख रुपये का ऋण दिया था। ऋण चुकाने के लिए दोषी महिला ने 28 जनवरी 2016 को 1,21,700 रुपये का चेक निगम को दिया था। निगम ने जब चेक बैंक में लगाया तो वह बाउंस हो गया। इसके बाद निगम ने 11 अप्रैल 2016 को दोषी महिला को कानूनी नोटिस भेजा लेकिन भुगतान नहीं किए जाने पर निगम ने अदालत में शिकायत दायर की थी। सुनवाई के दौरान दोषी ने दलील दी कि चेक केवल सुरक्षा के तौर पर लिया था। हालांकि अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि चेक पर हस्ताक्षर स्वीकार किए जाने के बाद यह माना जाता है कि चेक कानूनी देनदारी के भुगतान के लिए जारी किया गया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि दोषी यह साबित करने में पूरी तरह विफल रही कि उसके ऊपर कोई देनदारी नहीं थी। अपराध की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने सजा में नरमी बरतने और प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट का लाभ देने से इनकार कर दिया।
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दोषी महिला ने लिया था 1.20 लाख रुपये का ऋण
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट नंबर-एक शिमला की न्यायाधीश प्रतिभा नेगी की अदालत ने दोषी महिला को आठ माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। हिमाचल प्रदेश अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम (एचएमएफडीसी) की ओर से दायर चेक बाउंस मामले में यह फैसला सुनाया। इसके अलावा दोषी को चेक राशि से दोगुना 2,43,400 रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया है। मुआवजा राशि अदा न करने की स्थिति में दोषी को अतिरिक्त छह माह का कारावास भुगतना होगा।
अभियोजन पक्ष के अनुसार एचएमएफडीसी ने कोटखाई निवासी दोषी महिला रुखसाना बेगम को यूटिलिटी स्टोर चलाने के लिए 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर 1.20 लाख रुपये का ऋण दिया था। ऋण चुकाने के लिए दोषी महिला ने 28 जनवरी 2016 को 1,21,700 रुपये का चेक निगम को दिया था। निगम ने जब चेक बैंक में लगाया तो वह बाउंस हो गया। इसके बाद निगम ने 11 अप्रैल 2016 को दोषी महिला को कानूनी नोटिस भेजा लेकिन भुगतान नहीं किए जाने पर निगम ने अदालत में शिकायत दायर की थी। सुनवाई के दौरान दोषी ने दलील दी कि चेक केवल सुरक्षा के तौर पर लिया था। हालांकि अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि चेक पर हस्ताक्षर स्वीकार किए जाने के बाद यह माना जाता है कि चेक कानूनी देनदारी के भुगतान के लिए जारी किया गया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि दोषी यह साबित करने में पूरी तरह विफल रही कि उसके ऊपर कोई देनदारी नहीं थी। अपराध की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने सजा में नरमी बरतने और प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट का लाभ देने से इनकार कर दिया।
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