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शीत सत्र आज से, फिर आमने सामने होंगे सरकार और विपक्ष

Fri, 05 Dec 2014 10:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Fri, 05 Dec 2014 10:15 AM IST
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winter session of himachal Vidhansabha in tapovan Dharamsala

तपोवन में विधानसभा के शीतकालीन सत्र की गरमाहट शुक्रवार से दिखेगी। 5 से 12 दिसंबर तक चलने वाले शीत सत्र में कुल 7 बैठकें रखी गई हैं, हालांकि विपक्षी दल भाजपा के तेवरों को देखते हुए कार्यवाही सामान्य रहने की संभावना कम दिख रही है। पहले दिन नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल सदन में शामिल नहीं हो पाएंगे।

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तपोवन में पहली बार ई-विधान प्रणाली स्थापित की गई। वीरवार को इसका शुभारंभ विधानसभा अध्यक्ष बीबीएल बुटेल ने किया। सत्र में सरकार ने लोकायुक्त और टीसीपी इत्यादि करीब 6 विधेयक सदन में रखने हैं। 400 से ज्यादा सवाल प्रश्नकाल के दौरान उठेंगे। पिछले सत्र के स्थगित प्रश्नों पर भी सरकार को जवाब देना है।
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सत्र के लिए मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, कैबिनेट मंत्रियों और विधायकों के साथ वीरवार शाम को धर्मशाला पहुंच गए। विपक्षी दल भाजपा ने भी हमीरपुर में विधायक दल की बैठक कर रणनीति बनाई। इससे पहले मानसून सत्र गतिरोध के बाद 11 दिन पहले समाप्त करना पड़ा था।
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विपक्ष से इस बार शालीनता की उम्मीद: वीरभद्र
सर्किट हाउस में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि शीतकालीन सत्र के दौरान विपक्ष से मुझे शालीनता की उम्मीद है। भाजपा विधायकों को चाहिए कि जनहित के मसले संसदीय परंपराओं के दायरे में रहकर उठाएं। वीरभद्र सिंह ने कहा कि धूमल अपने और परिवार पर लगे आरोपों का जवाब देने के लिए पूरे विपक्ष का इस्तेमाल कर रहे हैं। वे बदले की भावना से काम कर रहे हैं।


केवल नए प्रशासनिक जिलों के खिलाफ हूं

कांगड़ा में नए संगठनात्मक जिलों को लेकर जारी विवाद पर मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं संगठनात्मक जिलों के नहीं, सिर्फ नए प्रशासनिक जिलों के खिलाफ हूं। वर्तमान में प्रदेश सरकार की माली हालत ठीक नहीं है। जनसंख्या के आधार पर 12 जिले पर्याप्त हैं। प्रदेश में नए जिले बनाने से प्रशासनिक खर्चा बढ़ जाएगा इसलिए नए जिले बनाना सही नहीं। संगठन के लिहाज से नए जिले हो सकते हैं।

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