गुड़िया प्रकरणः सीबीआई जांच के बाद भी पुलिस सूरज से क्यों करती रही पूछताछ
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आखिर पुलिस सूरज से क्या जानना चाहती थी? क्या सूरज को पुलिस के ऐसे कुछ राज पता थे, जिससे पुलिस फंस सकती थी? क्या इसीलिए सबने मिलकर सूरज का कत्ल कर दिया?
सीबीआई इन सवालों के जवाब ढूंढ रही है। जैदी समेत पुलिस वालों से सिर्फ यही पूछा जा रहा है कि उन्होंने सूरज से पूछताछ क्यों जारी रखी जबकि सूरज समेत सभी पांच मुलजिम ये मान रहे थे कि गुड़िया का कत्ल उन्होंने ही किया।
अब सूरज से और क्या कबूलवाना बाकी रह गया था। घटना की तारीखों पर गौर करें तो सारी बात अपने आप साफ हो जाएगी। दुराचार व हत्याकांड की जांच में पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद 13 जुलाई को बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस कर दावा किया कि इन आरोपियों ने अपने गुनाह को खुद कबूल कर लिया है।
हालांकि, पुलिस की इस थ्योरी को न तो गुड़िया के परिवार ने स्वीकारा, न ही वह जनता के गले उतरी। लिहाजा, 14 जुलाई को शिमला समेत प्रदेश भर में गलत जांच को लेकर आंदोलन हुआ।
लोगों की मांग और उग्र रूप देखते हुए आनन फानन में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने भी शासन व पुलिस के अधिकारियों से चर्चा की और मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश कर दी।
बावजूद इसके लोगों का गुस्सा खत्म नहीं हुआ तो 15 जुलाई को मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर जल्द जांच कराने की गुजारिश की। केंद्र सरकार का तब भी कोई जवाब नहीं आया तो 18 जुलाई को सरकार ने हाईकोर्ट से सीबीआई जांच की सिफारिश की।
सीबीआई जांच के प्रति सरकार को गंभीर देख पुलिस को अपनी जांच बंद कर देनी चाहिए थी। अमूमन पुलिस ऐसा ही करती है ताकि पुलिस पर सबूत मिटाने का आरोप न लगे। लेकिन अगली ही सुबह 19 जुलाई को थाने में सूरज का कत्ल हो गया।
पुलिस झूठ बोलती है कि सूरज को राजू ने मारा। संतरी के बयान से ये कहानी फेल हो गई। सूत्र बताते हैं कि दिल्ली में सीबीआई पूछताछ के दौरान जैदी समेत इन पुलिस वालों से यही जानने की कोशिश कर रही है।
लेकिन पुलिस अपने पुराने बयान पर अड़ी है। इसीलिए सीबीआई ने कोर्ट से पूछताछ के लिए और वक्त मांगा है।
गुड़िया केसः 6 आरोपी, 8 पुलिस वालों की गिरफ्तारी, 70 से ज्यादा डीएनए सैंपल
गुड़िया प्रकरण की जांच कर रही सीबीआई की 6 सितंबर को हाईकोर्ट में पेशी है। मामले में 5 आरोपियों के साथ एक की लॉक में हुई हत्या के आरोप में आईजी जैदी और सात पुलिस वाले गिरफ्तार हो चुके हैं।
70 से अधिक डीएनए सैंपल एकत्रित करने के साथ लगभग दो सौ लोगों से पूछताछ के बाद भी गुत्थी अनसुलझी है। गुड़िया से दुराचार के बाद हत्या के मामले में कोई गिरफ्तारी सीबीआई ने नहीं की है। ऐसे में बुधवार को सीबीआई कोर्ट में क्या रिपोर्ट सौंपती है, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
पुलिस की 6 आरोपियों की गिरफ्तारी और लॉकअप में एक आरोपी सूरज की हत्या के बाद सीबीआई ने मामले की जांच शुरू की। गुड़िया मामले में सीबीआई ने हलाइला और दांदी जंगल छान मारा है।
जंगल में वन निगम के तहत देवदार की लकड़ियों के चिरान-पिचान में जुटे जम्मू-कश्मीर और हिमाचल के स्थानीय मजदूरों के अलावा नेपाल मूल के लोगों से पूछताछ और डीएनए सैंपल तक लिए गए।
कई बागवानों से पूछताछ करने के साथ पुलिस वालों पर शिकंजा कसा। लॉकअप में मौत के मामले में आईजी जैदी समेत आठ पुलिस वाले गिरफ्तार किए, लेकिन अभी तक मूल घटना में कोई बड़ी सफलता सीबीआई के हाथ नहीं लगी है।
सीबीआई अब 6 सितंबर को तीसरी बार हाईकोर्ट के सामने पेश होगी। इस बार उनके हाथ आठ पुलिस वालों की गिरफ्तारी दिखाने के लिए है। हाईकोर्ट से फटकार खा चुकी सीबीआई इस बार क्या तथ्य लेकर आती है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।
सीबीआई पूछताछ खत्म,3 पुलिस अफसर शिमला लौटे
सूरज हत्याकांड मामले में एसआईटी के सदस्य एएसपी भजन देव नेगी को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया है। पुलिस हिरासत में सूरज की मौत के मामले में एएसपी की किसी तरह की कोई संलिप्पता नहीं पाई गई है।
एएसपी नेगी के अलावा डीएसपी ट्रैफिक रतन नेगी और तात्कालीन एसपी शिमला डीडब्ल्यू नेगी को भी पूछताछ के लिए दिल्ली बुलाया गया था। तीनों अफसर शिमला लौट आए हैं।
सीबीआई से जुड़े सूत्र बताते हैं कि एसआईटी सदस्य होने की वजह से एएसपी भजन देव नेगी को सूरज की मौत के मामले में पूछताछ के लिए बुलाया गया था। एसआईटी के बाकी सभी सदस्य इस मामले में सीबीआई की गिरफ्त में हैं।
सीबीआई को इस मामले में भजन नेगी के खिलाफ कोई भी साक्ष्य नहीं मिले। तीन दिन तक इन अफसरों से लंबी पूछताछ हुई।
गुडियां प्रकरण को सीबीआई के सपुर्द करने की घोषणा के बाद एसआईटी सदस्य भजन देव नेगी ने 16 जुलाई से केस से हाथ खींच लिया था और वह शिमला वापस लौट आए थे।
सूरज की मौत का मामला 19 जुलाई को सामने आया। सीबीआई सूत्रों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर इन्हें फिर से पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। आईजी समेत एसआईटी के दूसरे सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद नेगी अफसरों के खिलाफ कोई कार्रवाई न होने पर खूब बवाल मचा।
लेकिन देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी बिना किसी ठोस साक्ष्य के कैसे किसको गिरफ्तार कर लें यह भी एक बड़ा सवाल था। अब देखना है कि आने वाले दिनों में सीबीआई की जांच में और क्या नए खुलासे होते हैं।