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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट: व्हाई आई किल्ड गांधी फिल्म के ट्रेलर पर केंद्र, राज्य सरकार और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड को नोटिस

Sat, 26 Feb 2022 05:34 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sat, 26 Feb 2022 05:34 PM IST
सार

प्रार्थी ने याचिका में आरोप लगाया है कि ओटीटी प्लेटफार्म लाइमलाइट पर फिल्म व्हाई आई किल्ड गांधी का एक ट्रेलर जारी किया गया है। इससे पता चलता है कि फिल्म स्पष्ट रूप से राष्ट्रपिता की छवि को खराब करने का प्रयास करती है।

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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने महान नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों को फिल्मों और अन्य नेटवर्क प्लेटफार्म के माध्यम से अपमानित करने की प्रथा को प्रतिबंधित करने के आग्रह को लेकर दायर याचिका में केंद्र, राज्य सरकार और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड मुंबई को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने ये आदेश हाईकोर्ट के अधिवक्ता भूपिंदर शर्मा की ओर से दायर याचिका पर पारित किए। कोर्ट ने प्रतिवादियों को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।

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मामले की आगामी सुनवाई 24 मार्च को होगी।  प्रार्थी ने याचिका में आरोप लगाया है कि ओटीटी प्लेटफार्म लाइमलाइट पर फिल्म व्हाई आई किल्ड गांधी का एक ट्रेलर जारी किया गया है। इससे पता चलता है कि फिल्म स्पष्ट रूप से राष्ट्रपिता की छवि को खराब करने का प्रयास करती है। महात्मा गांधी की हत्या के लिए नाथूराम गोडसे का गुणगान करती है। फिल्म के नाम से स्पष्ट है कि यह कुछ कट्टरपंथियों द्वारा राष्ट्रपिता की हत्या को सही ठहराने का एक शरारती प्रयास है। आरोप लगाया है कि फिल्म में नाथू राम गोडसे को एक नायक और उद्धारकर्ता के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
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इस तथ्य के बावजूद कि वह एक ऐसा व्यक्ति है, जो स्वतंत्र भारत में मुकदमे और दोषी पाए जाने के बाद अदालत द्वारा कोर्ट में पेश सुबूतों के आधार पर दोषी ठहराया जाता है। फिल्म सिनेमैटोग्राफ अधिनियम 1952 के तहत सार्वजनिक प्रदर्शनी की फिल्मों के नियमन को केंद्र के सभी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करती है। याचिकाकर्ता ने प्रतिवादियों को सांविधानिक प्रावधानों के उल्लंघन में महान नेताओं, स्वतंत्रता सेनानियों, राष्ट्रीय नायकों को अपमानित करने की प्रथा को प्रतिबंधित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।  

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