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Shimla News: सतलुज पेयजल योजना में बदलाव करने पर मिलेगा पानी, इटली से मंगाए उपकरण
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एक्सक्लूसिव
टाटा कंसल्टेंसी ने दी रिपोर्ट, बदलाव न किए तो पाइपलाइन को हो सकता है खतरा, राजधानी में अभी जारी रहेगी राशनिंग
22 किमी पाइपलाइन में लगाने पड़ेंगे हाई ग्रेडिंग प्रेशर वॉल्व
अशोक चौहान
शिमला। राजधानी की सबसे बड़ी सतलुज पेयजल योजना दोबारा शुरू करने में बड़ा पेच फंस गया है। तीन महीने में ही हांफी इस योजना की पाइपलाइन में बदलाव करने पर ही सतलुज नदी का पानी अब शिमला पहुंच सकेगा। यदि बदलाव न हुए तो पाइपलाइन टूटने और ग्रामीण इलाकों में नुकसान होने का अंदेशा है।
इस काम के चलते अब शहर की जनता को अगले कई दिन तक इस योजना का पानी नहीं मिलेगा। शहर में पानी की राशनिंग जारी रहेगी। 22 केवी बिजली सब स्टेशन से 66 केवी की पंपिंग मशीनरी चलाने के लिए शिमला जल प्रबंधन निगम ने टाटा कंसल्टेंसी से रिपोर्ट मांगी थी। यह रिपोर्ट अब आ गई है। रिपोर्ट के अनुसार 22 केवी सब स्टेशन से यदि योजना को दोबारा शुरू करना है तो इसमें कई बदलाव करने होंगे। रिपोर्ट में ज्यादातर बदलाव इस पेयजल लाइन से जुड़े हैं। 22 केवी सब स्टेशन से यदि दोबारा लो वोल्टेज या ट्रिपिंग की समस्या आती है तो इससे मुख्य पेयजल लाइन पर ज्यादा दबाव यानी दबाव बढ़ेगा। इससे लाइन टूटने तक का खतरा हो सकता है। इस खतरे को हाई ग्रेडिंग वॉल्व लगाकर टाला जा सकता है। यह वॉल्व अचानक पंपिंग बंद होने पर पेयजल लाइन में पड़ने वाले दबाव को कम करते हैं। शकरोड़ी में सतलुज नदी से शिमला तक 22 किलोमीटर लंबी मुख्य पाइपलाइन बिछी है। इसमें अब कई जगह यह वॉल्व लगाने पड़ेंगे। योजना का जिम्मा संभाल रही साईं फाउंडेशन ने यह वॉल्व बंगलूरू और इटली से मंगवा लिए हैं। इसके अलावा पंपिंग स्टेशन में भी कुछ काम किया जाना है। पंपिंग मशीनरी के संचालन को लेकर भी रिपोर्ट में कई सुझाव दिए हैं। पेयजल कंपनी ने इस पर काम शुरू कर दिया है।
सतलुज के पानी के लिए करना होगा इंतजार
शिमला शहर को 66 एमएलडी की क्षमता वाली सतलुज पेयजल योजना से अभी 15 एमएलडी पानी मिल रहा है। अगस्त से यह योजना ठप है जिससे शिमला शहर में पानी की राशनिंग करनी पड़ी है। पहले ट्रांसफार्मर की खराबी बताई गई लेकिन जब इसे दुरुस्त किया तो कंपनी ने इसे चलाने से इन्कार कर दिया। 22 केवी बिजली से 66 केवी की क्षमता वाली पंपिंग मशीनरी में बार-बार ट्रिपिंग होने का अंदेशा है। इससे पेयजल लाइन में लीकेज हो सकती है जिससे भारी तबाही का खतरा है। इसलिए कंपनी ने इसे चलाने से पहले टाटा कंसल्टेंसी से रिपोर्ट मांगी थी। अब अगले कुछ दिन योजना की पाइपलाइन से लेकर पंपिंग स्टेशन पर होने वाले काम से सतलुज का पानी शिमला नहीं आएगा। इससे शिमला शहर में सितंबर माह में भी पानी की राशनिंग जारी रहेगी।
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पाइपलाइन में किए जा रहे हैं बदलाव
टाटा कंसल्टेंसी की रिपोर्ट के अनुसार सतलुज पेयजल योजना की पाइपलाइन में बदलाव किए जा रहे हैं। वॉल्व लगाए जा रहे हैं। इससे भविष्य में यदि ट्रिपिंग की समस्या आती है तो पेयजल लाइन को खतरा नहीं होगा। 22 केवी से भी योजना सुचारू रूप से चलाई जा सकेगी।
-वीरेंद्र सिंह ठाकुर, प्रबंध निदेशक शिमला जल प्रबंधन निगम
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टाटा कंसल्टेंसी ने दी रिपोर्ट, बदलाव न किए तो पाइपलाइन को हो सकता है खतरा, राजधानी में अभी जारी रहेगी राशनिंग
22 किमी पाइपलाइन में लगाने पड़ेंगे हाई ग्रेडिंग प्रेशर वॉल्व
अशोक चौहान
शिमला। राजधानी की सबसे बड़ी सतलुज पेयजल योजना दोबारा शुरू करने में बड़ा पेच फंस गया है। तीन महीने में ही हांफी इस योजना की पाइपलाइन में बदलाव करने पर ही सतलुज नदी का पानी अब शिमला पहुंच सकेगा। यदि बदलाव न हुए तो पाइपलाइन टूटने और ग्रामीण इलाकों में नुकसान होने का अंदेशा है।
इस काम के चलते अब शहर की जनता को अगले कई दिन तक इस योजना का पानी नहीं मिलेगा। शहर में पानी की राशनिंग जारी रहेगी। 22 केवी बिजली सब स्टेशन से 66 केवी की पंपिंग मशीनरी चलाने के लिए शिमला जल प्रबंधन निगम ने टाटा कंसल्टेंसी से रिपोर्ट मांगी थी। यह रिपोर्ट अब आ गई है। रिपोर्ट के अनुसार 22 केवी सब स्टेशन से यदि योजना को दोबारा शुरू करना है तो इसमें कई बदलाव करने होंगे। रिपोर्ट में ज्यादातर बदलाव इस पेयजल लाइन से जुड़े हैं। 22 केवी सब स्टेशन से यदि दोबारा लो वोल्टेज या ट्रिपिंग की समस्या आती है तो इससे मुख्य पेयजल लाइन पर ज्यादा दबाव यानी दबाव बढ़ेगा। इससे लाइन टूटने तक का खतरा हो सकता है। इस खतरे को हाई ग्रेडिंग वॉल्व लगाकर टाला जा सकता है। यह वॉल्व अचानक पंपिंग बंद होने पर पेयजल लाइन में पड़ने वाले दबाव को कम करते हैं। शकरोड़ी में सतलुज नदी से शिमला तक 22 किलोमीटर लंबी मुख्य पाइपलाइन बिछी है। इसमें अब कई जगह यह वॉल्व लगाने पड़ेंगे। योजना का जिम्मा संभाल रही साईं फाउंडेशन ने यह वॉल्व बंगलूरू और इटली से मंगवा लिए हैं। इसके अलावा पंपिंग स्टेशन में भी कुछ काम किया जाना है। पंपिंग मशीनरी के संचालन को लेकर भी रिपोर्ट में कई सुझाव दिए हैं। पेयजल कंपनी ने इस पर काम शुरू कर दिया है।
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सतलुज के पानी के लिए करना होगा इंतजार
शिमला शहर को 66 एमएलडी की क्षमता वाली सतलुज पेयजल योजना से अभी 15 एमएलडी पानी मिल रहा है। अगस्त से यह योजना ठप है जिससे शिमला शहर में पानी की राशनिंग करनी पड़ी है। पहले ट्रांसफार्मर की खराबी बताई गई लेकिन जब इसे दुरुस्त किया तो कंपनी ने इसे चलाने से इन्कार कर दिया। 22 केवी बिजली से 66 केवी की क्षमता वाली पंपिंग मशीनरी में बार-बार ट्रिपिंग होने का अंदेशा है। इससे पेयजल लाइन में लीकेज हो सकती है जिससे भारी तबाही का खतरा है। इसलिए कंपनी ने इसे चलाने से पहले टाटा कंसल्टेंसी से रिपोर्ट मांगी थी। अब अगले कुछ दिन योजना की पाइपलाइन से लेकर पंपिंग स्टेशन पर होने वाले काम से सतलुज का पानी शिमला नहीं आएगा। इससे शिमला शहर में सितंबर माह में भी पानी की राशनिंग जारी रहेगी।
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पाइपलाइन में किए जा रहे हैं बदलाव
टाटा कंसल्टेंसी की रिपोर्ट के अनुसार सतलुज पेयजल योजना की पाइपलाइन में बदलाव किए जा रहे हैं। वॉल्व लगाए जा रहे हैं। इससे भविष्य में यदि ट्रिपिंग की समस्या आती है तो पेयजल लाइन को खतरा नहीं होगा। 22 केवी से भी योजना सुचारू रूप से चलाई जा सकेगी।
-वीरेंद्र सिंह ठाकुर, प्रबंध निदेशक शिमला जल प्रबंधन निगम