{"_id":"6297acb1d4bd7f168c01c3bb","slug":"water-supply-distrub-in-shimla-panchyat-shimla-news-sml410773787","type":"story","status":"publish","title_hn":"जंगल में फेंके मलबे से पंचायत की पेयजल लाइनें टूटी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जंगल में फेंके मलबे से पंचायत की पेयजल लाइनें टूटी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ऑकलैंड टनल से सटे जंगल में फेंका जा रहा मलबा
पेयजल पाइप टूटने से केल्टी बरमू और चैड़ी में दिक्कत
बरसात में किसानों के खेतों में पहुंच सकता है यह मलबा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहर से सटे जंगलों में अवैध डंपिंग से कई पंचायतों में जलसंकट खड़ा हो गया है। ऑकलैंड टनल से सटे जंगल में कुछ दिन से लगातार मलबा फेंका जा रहा है। इससे न सिर्फ हरे भरे पेड़ दब गए हैं, बल्कि पंचायतों की पेयजल लाइनें भी टूट गईं। यही नहीं बरसात में पानी के साथ बहने से यह मलबा लोगों के खेतों तक पहुंच सकता है।
केल्टी बरमू और चैड़ी पंचायत के कई इलाकों में तीन दिन से पानी की सप्लाई ठप है। इससे दो हजार से अधिक लोगों को पीने लायक पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। केल्टी पंचायत के उपप्रधान सुदेश कुमार के अनुसार ऑकलैंड टनल से लेकर मिल्ट्री अस्पताल तक के मोड़ से आए दिन जंगल में मलबा फेंका जा रहा है। वन विभाग ने यहां पहले भी मलबा फेंकने पर चालान काटा था। लेकिन अब फिर से यहां अवैध डंपिंग हो रही है।
दो दिन पहले अवैध डंपिंग के चलते केल्टी पंचायत के लिए पानी की सप्लाई देने वाली ढाई इंच की पेयजल लाइन मलबे से टूट गई। लोग मौके पर पहुंचे तो देखा कि पाइपलाइन मलबे में दब गई है। निचली ओर कई पेयजल स्रोत भी मलबे में दब गए हैं। लोगों के अनुसार ऑकलैंड टनल से आईजीएमसी अस्पताल के गेट तक कई निर्माण कार्य चल रहे हैं। इनमें स्मार्ट सिटी से कई पार्किंग भी बन रही हैं। रात के समय कुछ लोग जंगल में ही ट्रक में भरा मलबा उडे़ल रहे हैं।
विज्ञापन
मलबे से तबाह हो रहे हैं जंगल
लोगों का कहना है कि शहर में चल रहे स्मार्ट सिटी के निर्माण कार्यों से निकलने वाला मलबा जंगलों में डंप हो रहा है। इन जंगलों के निचले इलाकों में जो नाले हैं, उससे पंचायतों को पानी जाता है। लेकिन अब जंगलों में फेंका जा रहा मलबा नालों तक पहुंच रहा है। पीने के पानी के चश्मे मलबे में दब रहे हैं।
अवैध डंपिंग पर होगी सख्त कार्रवाई : डीएफओ
अवैध डंपिंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पहले भी विभाग ने इस क्षेत्र में अवैध डंपिंग पर कई चालान काटे हैं। अब फिर से रात्रि गश्त को बढ़ाया जाएगा।
-अनीता भारद्वाज, डीएफओ शिमला शहरी
विज्ञापन
पेयजल पाइप टूटने से केल्टी बरमू और चैड़ी में दिक्कत
बरसात में किसानों के खेतों में पहुंच सकता है यह मलबा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहर से सटे जंगलों में अवैध डंपिंग से कई पंचायतों में जलसंकट खड़ा हो गया है। ऑकलैंड टनल से सटे जंगल में कुछ दिन से लगातार मलबा फेंका जा रहा है। इससे न सिर्फ हरे भरे पेड़ दब गए हैं, बल्कि पंचायतों की पेयजल लाइनें भी टूट गईं। यही नहीं बरसात में पानी के साथ बहने से यह मलबा लोगों के खेतों तक पहुंच सकता है।
केल्टी बरमू और चैड़ी पंचायत के कई इलाकों में तीन दिन से पानी की सप्लाई ठप है। इससे दो हजार से अधिक लोगों को पीने लायक पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। केल्टी पंचायत के उपप्रधान सुदेश कुमार के अनुसार ऑकलैंड टनल से लेकर मिल्ट्री अस्पताल तक के मोड़ से आए दिन जंगल में मलबा फेंका जा रहा है। वन विभाग ने यहां पहले भी मलबा फेंकने पर चालान काटा था। लेकिन अब फिर से यहां अवैध डंपिंग हो रही है।
विज्ञापन
दो दिन पहले अवैध डंपिंग के चलते केल्टी पंचायत के लिए पानी की सप्लाई देने वाली ढाई इंच की पेयजल लाइन मलबे से टूट गई। लोग मौके पर पहुंचे तो देखा कि पाइपलाइन मलबे में दब गई है। निचली ओर कई पेयजल स्रोत भी मलबे में दब गए हैं। लोगों के अनुसार ऑकलैंड टनल से आईजीएमसी अस्पताल के गेट तक कई निर्माण कार्य चल रहे हैं। इनमें स्मार्ट सिटी से कई पार्किंग भी बन रही हैं। रात के समय कुछ लोग जंगल में ही ट्रक में भरा मलबा उडे़ल रहे हैं।
विज्ञापन
मलबे से तबाह हो रहे हैं जंगल
लोगों का कहना है कि शहर में चल रहे स्मार्ट सिटी के निर्माण कार्यों से निकलने वाला मलबा जंगलों में डंप हो रहा है। इन जंगलों के निचले इलाकों में जो नाले हैं, उससे पंचायतों को पानी जाता है। लेकिन अब जंगलों में फेंका जा रहा मलबा नालों तक पहुंच रहा है। पीने के पानी के चश्मे मलबे में दब रहे हैं।
अवैध डंपिंग पर होगी सख्त कार्रवाई : डीएफओ
अवैध डंपिंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पहले भी विभाग ने इस क्षेत्र में अवैध डंपिंग पर कई चालान काटे हैं। अब फिर से रात्रि गश्त को बढ़ाया जाएगा।
-अनीता भारद्वाज, डीएफओ शिमला शहरी