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कुल्लू: पहाड़ चढ़ने से कम चुनौती नहीं शाक्टी में मतदान कराना

Wed, 27 Oct 2021 11:38 AM IST
Krishan Singh रोशन ठाकुर, संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
रोशन ठाकुर, संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू Published by: Krishan Singh Updated Wed, 27 Oct 2021 11:38 AM IST
सार

कल्लू की अति दुर्गम गाड़ापारली पंचायत के शाक्टी, मरौड़ तथा शुगाड़ गांव के लिए शाक्टी प्राइमरी स्कूल में पोलिंग बूथ बनाया गया है। यह पोलिंग बूथ जिले का सबसे दुर्गम बूथ है। पोलिंग पार्टी को यहां पहुंचने के लिए चार घंटे तक का पैदल सफर करना पड़ेगा। 

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Voting in Shakti kullu is no less a challenge than climbing a mountain
शाक्टी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दुर्गम क्षेत्रों में मतदान कराना किसी पहाड़ को चढ़ने से कम चुनौती नहीं है। आजादी के 74 साल बाद भी ऐसे कई क्षेत्र हैं जहां न सड़क है और न ही बिजली। ऐसे ही क्षेत्रों में जिला कुल्लू के शाक्टी, मरौड़ व शुगाड़ गांव भी शामिल हैं। 30 अक्तूबर को मंडी संसदीय क्षेत्र के लिए हो रहे उपचुनाव में इन गांवों के 88 मतदाता भी वोट डालेंगे। लेकिन बिना सड़क वीवीपैट युक्त ईवीएम को कंधे पर उठाकर 18 किलोमीटर पैदल चलकर यहां तक पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं है। कल्लू की अति दुर्गम गाड़ापारली पंचायत के शाक्टी, मरौड़ तथा शुगाड़ गांव के लिए शाक्टी प्राइमरी स्कूल में पोलिंग बूथ बनाया गया है।

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यह पोलिंग बूथ जिले का सबसे दुर्गम बूथ है। पोलिंग पार्टी को यहां पहुंचने के लिए चार घंटे तक का पैदल सफर करना पड़ेगा। पोलिंग पार्टी को निहारनी नामक जगह से करीब 18 किलोमीटर का पैदल रास्ता पार करना है। लिहाजा, यहां भेजे जाने वाले कर्मचारियों को एक दिन पहले 27 अक्तूबर को ही रवाना कर दिया जाएगा। जिला चुनाव अधिकारी एवं उपायुक्त कुल्लू आशुतोष गर्ग ने कहा कि जिला के इस अति दुर्गम क्षेत्र में मतदान को लेकर सभी तैयारियां पूरी की जा रही हैं। वीवीपैट युक्त ईवीएम पहले से ही चार्ज होती हैं। बावजूद इसके बैकअप के लिए अतिरिक्त बैटरी भी होती है। उल्लेखनीय है कि शाक्टी बूथ में 44 महिलाएं व 44 पुरुष वोटर हैं। जिला निर्वाचन विभाग ने नई और फाइनल मतदाता सूची जारी की है। इसमें चार नए वोटर पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। 
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हेलीकॉप्टर की मदद से पहुंचाने चाहिए कर्मचारी
स्थानीय मेहर चंद, दलीप सिंह और जगदीश ठाकुर आदि का कहना है कि चुनाव आयोग को अति दुर्गम इस पोलिंग बूथ में मतदान करवाने वाली पोलिंग पार्टी को हेलीकाप्टर की मदद से पहुंचाना चाहिए। 18 किलोमीटर पैदल सफर करने में अगर कोई हादसा हो जाए तो इसका कौन जिम्मेदार होगा। 

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