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Himachal: वीरेंद्र चाैहान बोले- सीबीएसई स्कूलों के लिए शिक्षकों की चयन परीक्षा के निर्णय को वापस लिया जाए

Mon, 15 Dec 2025 04:07 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Mon, 15 Dec 2025 04:07 PM IST
सार

राजकीय अध्यापक संघ के राज्य प्रधान वीरेंद्र सिंह चौहान ने प्रदेश के विद्यालयों को सीबीएसई बोर्ड से जोड़ने का महत्वपूर्ण और दूरदर्शी निर्णय का अभिनंदन किया है। 

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Virender Chauhan said that the decision to conduct exams for teachers in CBSE schools should be withdrawn.
हिमाचल प्रदेश राजकीय अध्यापक संघ के राज्य प्रधान वीरेंद्र सिंह चौहान। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजकीय अध्यापक संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने कहा कि सीबीएसई स्कूलों में शिक्षक चयन को परीक्षा करना तर्कसंगत नहीं है। समाज में इसका गलत संदेश जाएगा। परीक्षा लेने से वर्तमान शिक्षकों के कमतर होने की धारणा बन जाएगी। उन्होंने कहा कि पहले से नियुक्त शिक्षकों को ही सीबीएसई पाठ्यक्रम वाले स्कूलों में पढ़ाने का मौका दिया जाए। इनमें से जाे शिक्षक सीबीएसई स्कूलों में नहीं पढ़ाना चाहते, उनकी जगह नए का चयन किया जा सकता है।

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वीरेंद्र चौहान ने प्रदेश के स्कूलों को सीबीएसई से जोड़ने का फैसला महत्वपूर्ण और दूरदर्शी है। यह कदम शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में अवश्य सहायक होगा। उन्होंने कहा कि इन स्कूलों के लिए शिक्षकों की चयन परीक्षा से करने का प्रस्ताव शिक्षक समुदाय में चिंता और असंतोष पैदा कर रहा है। वर्तमान शिक्षकों को ही उनके विद्यालयों में पढ़ने का अवसर दिया जाए और कोई चयन परीक्षा न करवाई जाए। इससे यह गलत संदेश जाएगा कि विद्यालयों के वर्तमान शिक्षक कमतर हैं और सीबीएसई के शिक्षक श्रेष्ठ हैं, जबकि दोनों ही बोर्डों में बिल्कुल एक सामान पाठ्यक्रम है, एक जैसी किताबें पढ़ाई जाती हैं।

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उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के अनुसार दोनों बोर्डों की परीक्षाएं एक जैसे ढांचे पर आधारित प्रश्न पत्र होते हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति पहले ही सरकारी नियमों के अनुसार हुई है। उन्होंने स्नातक/स्नातकोत्तर के साथ बीएड किया है, टेट उत्तीर्ण किया है। चयन आयोग की कठिन परीक्षा पास कर ही स्कूलों में नियुक्त हुए हैं। अब उनकी परीक्षा दोबारा लेना किसी तरह भी उचित नहीं है। वीरेंद्र चौहान ने कहा कि जिन स्कूलों को सीबीएसई में बदला जा रहा है, वहां आज अच्छी छात्र संख्या और अच्छे परिणाम केवल इसलिए हैं क्योंकि वर्तमान शिक्षक लगातार कठिन मेहनत कर रहे हैं। जिन शिक्षकों की मेहनत से यह स्कूल आगे बढ़े, उन्हीं को परीक्षा के माध्यम से परेशान करना उनके मनोबल को गिराने जैसा है।

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शिक्षकों के पेशे में अनुभव से ही आता है निखार
वीरेंद्र चौहान ने कहा कि अपने चयन के 20 वर्ष बाद शायद एक आईएएस अधिकारी भी यूपीएससी की परीक्षा फिर से पास ना कर पाए। न्यायाधीश, वकील या डॉक्टर भी अपनी परीक्षाएं फिर से पास नहीं कर पाएंगे तो फिर शिक्षकों से ऐसी उम्मीद क्यों की जा रही है। शिक्षा एक ऐसा पेशा है जिसमें अनुभव से निखार आता है। ऐसे में यदि चयन की कोई आवश्यकता महसूस होती है, तो पिछले 10–15 वर्षों के परिणामों को देखा जाना चाहिए। बच्चों के परिणाम ही शिक्षक की असली योग्यता का प्रमाण होते हैं।
 

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