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Shimla News: घर-घर दर्शन देकर गुग्गा माड़ी लौटे गुग्गा जाहरवीर
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मिडिल बाजार मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
छड़ी के दर्शन कर चढ़ाया रोट और प्रसाद
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी शिमला में सांपों के देवता के रूप में पूजे जाने वाले श्री गुग्गा जाहरवीर का जन्मोत्सव शनिवार को पूरी श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया गया।
रक्षाबंधन से लेकर कृष्ण जन्माष्टमी तक लोगों के घर-घर जाकर दर्शन देने वाले गुग्गा जाहरवीर अपने निवास गुग्गा माड़ी वापस लौट गए हैं। इस अवसर पर मिडिल बाजार स्थित गुग्गा मंदिर में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए यहां गुग्गा जाहरवीर महाराज की छड़ी रखी थी। दिनभर मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। श्रद्धालुओं ने गुग्गा महाराज को रोट और प्रसाद चढ़ाया। इसके अलावा विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया। शहर की अन्य गुग्गा माड़ियों में भी श्रद्धालुओं ने पहुंचकर गुग्गा महाराज का आशीर्वाद लिया। निवेदक महंत श्री बनारसी दास ने बताया कि चार से छह सितंबर तक गुग्गा जाहरवीर जन्मोत्सव से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। गुग्गा नवमी को लोकदेवता श्री गुग्गा जाहरवीर की जयंती के रूप में मनाया जाता है। लोकमान्यता के अनुसार गुग्गा महाराज को नागों के देवता और सर्पदंश से रक्षा करने वाले लोकदेवता के रूप में पूजा जाता है। गुग्गा नवमी के दिन श्रद्धालु उनकी पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और सर्प भय से मुक्ति की कामना करते हैं। हिमाचल समेत उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में इस पर्व का विशेष धार्मिक और लोक आस्था से जुड़ा महत्व है। इस दिन गुग्गा माड़ियों में विशेष पूजा, छड़ी के दर्शन, रोट चढ़ाने और भंडारे जैसी परंपराएं निभाई जाती हैं।
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छड़ी के दर्शन कर चढ़ाया रोट और प्रसाद
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी शिमला में सांपों के देवता के रूप में पूजे जाने वाले श्री गुग्गा जाहरवीर का जन्मोत्सव शनिवार को पूरी श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया गया।
रक्षाबंधन से लेकर कृष्ण जन्माष्टमी तक लोगों के घर-घर जाकर दर्शन देने वाले गुग्गा जाहरवीर अपने निवास गुग्गा माड़ी वापस लौट गए हैं। इस अवसर पर मिडिल बाजार स्थित गुग्गा मंदिर में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए यहां गुग्गा जाहरवीर महाराज की छड़ी रखी थी। दिनभर मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। श्रद्धालुओं ने गुग्गा महाराज को रोट और प्रसाद चढ़ाया। इसके अलावा विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया। शहर की अन्य गुग्गा माड़ियों में भी श्रद्धालुओं ने पहुंचकर गुग्गा महाराज का आशीर्वाद लिया। निवेदक महंत श्री बनारसी दास ने बताया कि चार से छह सितंबर तक गुग्गा जाहरवीर जन्मोत्सव से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। गुग्गा नवमी को लोकदेवता श्री गुग्गा जाहरवीर की जयंती के रूप में मनाया जाता है। लोकमान्यता के अनुसार गुग्गा महाराज को नागों के देवता और सर्पदंश से रक्षा करने वाले लोकदेवता के रूप में पूजा जाता है। गुग्गा नवमी के दिन श्रद्धालु उनकी पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और सर्प भय से मुक्ति की कामना करते हैं। हिमाचल समेत उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में इस पर्व का विशेष धार्मिक और लोक आस्था से जुड़ा महत्व है। इस दिन गुग्गा माड़ियों में विशेष पूजा, छड़ी के दर्शन, रोट चढ़ाने और भंडारे जैसी परंपराएं निभाई जाती हैं।
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