बाबा विवाद पर सीएम ने दी सफाई, कहा- इसलिए गए थे उनके आश्रम
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने सोलन के साधुपुल स्थित रामलोक आश्रम के चर्चित बाबा अमरदेव को संरक्षण देने का आरोप सिरे से खारिज कर दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर सरकार ने उन्हें संरक्षण दिया होता तो उनके पास जाने की किसी की हिम्मत न होती।
मुख्यमंत्री ने यह बात मंगलवार को राजभवन में हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग अध्यक्ष के शपथ ग्रहण समारोह के बाद राजभवन में पत्रकारों से बातचीत में कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ समय पहले साधूपुल का पुल बह गया था, जिसे देखने वह खुद वहां गए हुए थे। उसी दौरान वह आश्रम देखने गए थे।
उस समय भी बाबा वहां मौजूद नहीं थे लेकिन मंदिर का निर्माण हो रहा था। लोगों की शिकायत पर सीएम ने कहा कि जनता को दिक्कत नहीं है लेकिन उनको भड़काया जा रहा है। कहा कि उनसे मिलने वाले लोगों में कुछ सीपीएम के भी लोग थे, जो इस विवाद को बढ़ा रहे हैं।
रामपुर में धर्म परिवर्तन के विवाद के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में किसी भी सूरत में धर्मांतरण नहीं होने दिया जाएगा। कहा कि प्रदेश सरकार ही सबसे पहले धर्मांतरण के खिलाफ कानून लेकर आई थी।
सुक्खू के अध्यक्ष बनने की इच्छा पर वीरभद्र का तंज
संगठन चुनावों और प्रदेश अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू के दोबारा अध्यक्ष बनने की इच्छा जताने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने चुटकी लेते हुए कहा कि चाहने से कुछ भी नहीं होता है, उसके लिए मेहनत करनी भी जरूरी है।
चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री का प्रदेश अध्यक्ष सुक्खू की कार्यप्रणाली पर तंज से लग रहा है कि सरकार और संगठन के बीच सब कुछ ठीक नहीं है। वहीं, पदाधिकारियों के कामकाज से संतुष्टि के सवाल पर कहा कि ये चुनाव का वक्त है और चुनाव के समय में किसी के कामकाज का पोस्टमार्टम करना अच्छी बात नहीं है।
विधानसभा चुनाव को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार चुनाव के लिए हमेशा तैयार है।