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विमल नेगी मौत मामला: तत्कालीन एमडी, निदेशक की भूमिका संदिग्ध, सीबीआई चार्जशीट ने खड़े किए कई गंभीर सवाल

Wed, 10 Jun 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 10 Jun 2026 05:00 AM IST
सार

 विमल नेगी की संदिग्ध मौत के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की चार्जशीट ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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Vimal Negi death case: Role of the then MD and Director appears suspicious; CBI charge sheet raises several se
मृतक विमल नेगी (फाइल फोटो)। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

एचपीपीसीएल के महाप्रबंधक (नवीकरणीय ऊर्जा) विमल नेगी की संदिग्ध मौत के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की चार्जशीट ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार यह मामला केवल एक अधिकारी की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे संस्थागत दबाव, उत्पीड़न, विवादित परियोजना निर्णयों और कथित आपराधिक साजिश की परतें जुड़ी हुई हैं। सीबीआई की जांच में सामने आया है कि पेखुबेला सौर ऊर्जा परियोजना से जुड़े कई फैसलों को लेकर निगम में गंभीर मतभेद थे। आरोप है कि परियोजना से संबंधित फाइलों में दर्ज आपत्तियों और तकनीकी टिप्पणियों को नजरअंदाज करने के लिए अधीनस्थ अधिकारियों पर दबाव बनाया गया। जांच एजेंसी ने चार्जशीट में तत्कालीन एमडी और निदेशक की भूमिका को संदिग्ध मानते हुए उनके खिलाफ आपराधिक साजिश के आरोप लगाए हैं।

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जांच रिपोर्ट के अनुसार विमल नेगी जून 2024 में शोंगटोंग परियोजना से स्थानांतरित होकर कॉरपोरेट कार्यालय में तैनात हुए थे। इसके बाद उन्हें परियोजना से संबंधित कई संवेदनशील मामलों की निगरानी और परीक्षण की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसी दौरान कथित तौर पर उन पर ऐसे प्रस्तावों को आगे बढ़ाने का दबाव बढ़ा, जिन पर उन्होंने तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर आपत्तियां दर्ज की थी। सीबीआई के अनुसार पेखुबेला सौर ऊर्जा परियोजना निर्धारित समय सीमा में पूरी नहीं हो सकी थी। बावजूद संबंधित ठेकेदार कंपनी को पांच बार अस्थायी समय विस्तार दिया गया। जांच एजेंसी का मानना है कि समय विस्तार और अन्य प्रशासनिक रियायतों को लेकर लिए गए निर्णयों की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। फाइलों में दर्ज आपत्तियों को दबाने और अनुकूल टिप्पणियां तैयार कराने के आरोप भी जांच के दायरे में आए हैं। एजेंसी का दावा है कि उपलब्ध साक्ष्य वरिष्ठ स्तर पर किए गए उत्पीड़न और दबाव की पुष्टि करते हैं। मामले की सबसे संवेदनशील कड़ी विमल नेगी की मौत है। 10 मार्च 2025 को उनके लापता होने के बाद 18 मार्च को शव गोबिंद सागर झील से बरामद हुआ था।

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