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इन तीन बैंकों में भर्तियों की होगी विजिलेंस जांच, सीएम ने दिए आदेश

Fri, 13 Jul 2018 11:46 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Updated Fri, 13 Jul 2018 11:46 AM IST
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Vigilance Probe of recruitments in three cooperative banks of himachal pradesh

हिमाचल के तीन सहकारी बैंकों में कांग्रेस कार्यकाल के दौरान हुई भर्तियों और वित्तीय अनियमितताओं की विजिलेंस जांच होगी। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने गृह विभाग को इसके आदेश जारी कर दिए हैं। पूर्व कांग्रेस सरकार के खिलाफ राज्यपाल को सौंपी गई भाजपा चार्जशीट में भी इन भर्तियों में हुई गड़बड़ियों की जांच की मांग उठाई थी।

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हालांकि, तब सत्तारूढ़ कांग्रेस ने भाजपा की चार्जशीट को ही खारिज कर दिया था। अब सत्ता में आने के छह माह बाद भाजपा सरकार ने जांच करवाने का फैसला लिया है।
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कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में तीन बैंकों राज्य सहकारी बैंक, कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक और जोगिंद्रा केंद्रीय सहकारी बैंक में विभिन्न पदों पर भर्तियां की गईं। इनमें नियमों को ताक पर रखकर अपनों को नियुक्ति देने के आरोप लगे हैं।

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जांच पर कई नपेंगे

Vigilance Probe of recruitments in three cooperative banks of himachal pradesh

विधानसभा चुनाव से साल भर पहले पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व में भाजपा ने राज्यपाल को चार्जशीट सौंप जांच की मांग की। आरोप था कि भर्तियों में भाई-भतीजावाद हावी रहा। सूत्रों की मानें तो प्रारंभिक विभागीय जांच में कई आरोपों को जायज पाया गया है। इसके बाद मुख्यमंत्री ने विजिलेंस से जांच कराने को कहा है।

तीन सहकारी बैंकों की जांच में कई रसूखदारों की गर्दन फंस सकती है। मुख्यमंत्री कार्यालय के एक सूत्र की मानें तो पूर्व सीएम के कई करीबी इस जांच की जद में आ सकते हैं। आरोप है कि इन बैंकों में कुछ ऐसे लोगों को नियुक्ति दे दी गई जो न्यूनतम योग्यता भी पूरी नहीं करते थे।

भाजपा चार्जशीट में लगे आरोपों पर हफ्ते में रिपोर्ट देने के आदेश

Vigilance Probe of recruitments in three cooperative banks of himachal pradesh

हिमाचल सरकार ने भाजपा चार्जशीट पर संबंधित विभागों के प्रमुखों को एक सप्ताह का अल्टीमेटम देते हुए बिंदुवार ब्योरा मांगा है। महकमों को यह रिपोर्ट निदेशक सतर्कता और सचिव जीएडी को देनी होगी। उन्हें बताना होगा कि किन-किन आरोपों में तथ्य हैं जिस पर विजिलेंस ब्यूरो में जांच शुरू कर मामले दर्ज किए जा सकते हैं।

वीरवार को भाजपा चार्जशीट पर मुख्य सचिव विनीत चौधरी की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें विभागीय सचिवों, विभाग प्रमुखों और विजिलेंस अधिकारियों को बुलाया गया। हालांकि, अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह बीके अग्रवाल दिल्ली में होने के कारण बैठक में नहीं थे।

चार्जशीट में कांग्रेस सरकार के मंत्रियों और तत्कालीन अधिकारियों पर लगाए गए आरोपोें पर चर्चा हुई। आखिर में तय हुआ कि विभाग चार्जशीट का अध्ययन कर इसमें हर आरोप पर बिंदुवार विवरण देंगे कि किस आरोप में कितना दम है। शुरुआती दौर में ऐसे तमाम आरोपों पर जांच बैठाकर मामले दर्ज किए जाएंगे। 

धूमल ने राज्यपाल को सौंपी थी मंत्रियों, नेताओं के खिलाफ चार्जशीट- 26 दिसंबर 2016 को पूर्व मुख्यमंत्री प्रेमकुमार धूमल के नेतृत्व में भाजपा ने राज्यपाल आचार्य देवव्रत को कांग्रेस सरकार के खिलाफ चार्जशीट सौंपी। इसमें मंत्रियों से लेकर कांग्रेस के 40 नेताओं पर घोटाले के आरोप लगाए। भाजपा ने इस चार्जशीट को ‘सरकार में अली बाबा चालीस चोर’ का नाम दिया। यह चार्जशीट 75 पृष्ठों की बनाई गई।

इस आरोपपत्र में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह समेत उनके दस मंत्रियों, छह सीपीएस और 10 बोर्डों, निगमों, बैंकों के अध्यक्षों-उपाध्यक्षों पर गंभीर आरोप लगाए गए। मंत्रियों में केवल धनी राम शांडिल पर ही कोई आरोप नहीं लगाया। तत्कालीन कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू और अन्य नेताओं पर भी कई आरोप हैं। इनमें से कई नेताओं पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं।

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