{"_id":"6a8c4b8e2bd14d15d6099644","slug":"university-develops-solar-panel-with-20-higher-efficiency-shimla-news-c-19-sml1002-775245-2026-08-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shimla News: विवि ने 20 फीसदी अधिक दक्षता वाला सौर पैनल किया विकसित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shimla News: विवि ने 20 फीसदी अधिक दक्षता वाला सौर पैनल किया विकसित
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नौणी विश्वविद्यालय में प्रारंभिक स्तर पर लगाए गए पैनल, एसजेवीएन सहयोग से आगे बढ़ेगा शोध
नौणी विवि में चल रहा है सौर पैनलों का ट्रायल
एक्सक्लूसिव
हर्षित शर्मा
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में नया पैनल विकसित किया है जिसकी दक्षता मौजूदा पैनलों की तुलना में 20 फीसदी अधिक होने का दावा किया जा रहा है।
विश्वविद्यालय ने इसके प्रारंभिक नमूने डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी में स्थापित किए हैं। अब इन पैनलों के प्रदर्शन और उपयोगिता का मैदानी स्तर पर परीक्षण किया जा रहा है। यह शोध हिमाचल में सौर ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने की दिशा में किया जा रहा है। इसका उद्देश्य कम क्षेत्र में अधिक बिजली उत्पादन करने वाले पैनल विकसित करना है। नौणी में लगाए प्रारंभिक नमूनों से वास्तविक मौसम और मैदानी परिस्थितियों में पैनल की कार्यक्षमता का आकलन किया जा रहा है।
विश्वविद्यालय के हरित ऊर्जा एवं नैनो प्रौद्योगिकी केंद्र में इस दिशा में आगे भी शोध किया जाएगा। केंद्र सौर पैनलों की क्षमता, विश्वसनीयता और लंबे समय तक प्रदर्शन से जुड़े पहलुओं का अध्ययन करेगा। शोध में पैनलों के प्रदर्शन पर तापमान, धूल, मौसम और अन्य स्थानीय परिस्थितियों के प्रभाव का भी परीक्षण किया जाएगा। इस शोध को आगे बढ़ाने के लिए हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और एसजेवीएन लिमिटेड के बीच 4.15 करोड़ रुपये का अनुसंधान सहयोग तय हुआ है। इस राशि से उन्नत सौर फोटोवोल्टिक तकनीक पर शोध, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित खराबी की पहचान और बड़े स्तर पर मैदानी परीक्षण किए जाएंगे।
विज्ञापन
परियोजना में मौजूदा सौर प्रणालियों की क्षमता बढ़ाने के साथ नए और बेहतर पैनल विकसित करने पर विशेष ध्यान रहेगा। शोध में कृषि आधारित सौर प्रणाली और तैरती सौर परियोजनाओं की तकनीक भी शामिल है। इन तकनीकों को हिमाचल की भौगोलिक और मौसम संबंधी परिस्थितियों के अनुसार विकसित करने की संभावनाएं देखी जाएंगी।
नैनो प्रौद्योगिकी केंद्र करेगा संचालन
परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. मनीष कुमार हैं। डॉ. रमेश ठाकुर और डॉ. संदीप चौहान सह-प्रधान अन्वेषक हैं। परियोजना का संचालन हरित ऊर्जा एवं नैनो प्रौद्योगिकी केंद्र में होगा। डॉ. मनीष कुमार ने बताया कि नौणी में लगाए गए पैनलों के प्रारंभिक परीक्षण से मिलने वाले आंकड़े आगे के शोध में महत्वपूर्ण रहेंगे। इन आंकड़ों के आधार पर पैनल की क्षमता, स्थिरता और वास्तविक परिस्थितियों में प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा। इसके बाद तकनीक में जरूरी सुधार कर बड़े स्तर पर उपयोग की संभावनाएं देखी जाएंगी।
विज्ञापन
नौणी विवि में चल रहा है सौर पैनलों का ट्रायल
एक्सक्लूसिव
हर्षित शर्मा
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में नया पैनल विकसित किया है जिसकी दक्षता मौजूदा पैनलों की तुलना में 20 फीसदी अधिक होने का दावा किया जा रहा है।
विश्वविद्यालय ने इसके प्रारंभिक नमूने डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी में स्थापित किए हैं। अब इन पैनलों के प्रदर्शन और उपयोगिता का मैदानी स्तर पर परीक्षण किया जा रहा है। यह शोध हिमाचल में सौर ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने की दिशा में किया जा रहा है। इसका उद्देश्य कम क्षेत्र में अधिक बिजली उत्पादन करने वाले पैनल विकसित करना है। नौणी में लगाए प्रारंभिक नमूनों से वास्तविक मौसम और मैदानी परिस्थितियों में पैनल की कार्यक्षमता का आकलन किया जा रहा है।
विज्ञापन
विश्वविद्यालय के हरित ऊर्जा एवं नैनो प्रौद्योगिकी केंद्र में इस दिशा में आगे भी शोध किया जाएगा। केंद्र सौर पैनलों की क्षमता, विश्वसनीयता और लंबे समय तक प्रदर्शन से जुड़े पहलुओं का अध्ययन करेगा। शोध में पैनलों के प्रदर्शन पर तापमान, धूल, मौसम और अन्य स्थानीय परिस्थितियों के प्रभाव का भी परीक्षण किया जाएगा। इस शोध को आगे बढ़ाने के लिए हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और एसजेवीएन लिमिटेड के बीच 4.15 करोड़ रुपये का अनुसंधान सहयोग तय हुआ है। इस राशि से उन्नत सौर फोटोवोल्टिक तकनीक पर शोध, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित खराबी की पहचान और बड़े स्तर पर मैदानी परीक्षण किए जाएंगे।
विज्ञापन
परियोजना में मौजूदा सौर प्रणालियों की क्षमता बढ़ाने के साथ नए और बेहतर पैनल विकसित करने पर विशेष ध्यान रहेगा। शोध में कृषि आधारित सौर प्रणाली और तैरती सौर परियोजनाओं की तकनीक भी शामिल है। इन तकनीकों को हिमाचल की भौगोलिक और मौसम संबंधी परिस्थितियों के अनुसार विकसित करने की संभावनाएं देखी जाएंगी।
नैनो प्रौद्योगिकी केंद्र करेगा संचालन
परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. मनीष कुमार हैं। डॉ. रमेश ठाकुर और डॉ. संदीप चौहान सह-प्रधान अन्वेषक हैं। परियोजना का संचालन हरित ऊर्जा एवं नैनो प्रौद्योगिकी केंद्र में होगा। डॉ. मनीष कुमार ने बताया कि नौणी में लगाए गए पैनलों के प्रारंभिक परीक्षण से मिलने वाले आंकड़े आगे के शोध में महत्वपूर्ण रहेंगे। इन आंकड़ों के आधार पर पैनल की क्षमता, स्थिरता और वास्तविक परिस्थितियों में प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा। इसके बाद तकनीक में जरूरी सुधार कर बड़े स्तर पर उपयोग की संभावनाएं देखी जाएंगी।