बिलासपुर में एम्स के लिए कम पड़ी जमीन, केंद्र ने हिमाचल के समक्ष रखी ये मांग
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बिलासपुर में बहु प्रतीक्षित एम्स के आधारभूत ढांचे के निर्माण के लिए एक और पेंच फंस गया है। इसके लिए जमीन और कम पड़ गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने हिमाचल सरकार को पत्र भेजकर 900 बीघा के करीब और जमीन का प्रबंध करने को कहा है।
तर्क दिया है कि एम्स के आधारभूत ढांचे के निर्माण के साथ डॉक्टरों के लिए कॉलोनियां, स्कूल और भविष्य में एम्स के विस्तार को देखते हुए अतिरिक्त जमीन जरूरी है।
प्रदेश सरकार ने एम्स के लिए आधारभूत ढांचे के निर्माण को 1229 बीघा जमीन फाइनल की है। इसमें से अधिकांश जमीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के नाम कर दी है।
जमीन का किया जा रहा इंतज
हिमाचल के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान एम्स के पहले चरण का निर्माण शुरू हो गया है। इसकी चहारदीवारी पर ही करीब 20.55 करोड़ रुपये खर्च होंगे। चहारदीवारी के निर्माण को मंत्रालय ने ऑन लाइन टेंडर भी आमंत्रित किए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 अक्तूबर 2017 को बिलासपुर के कोठीपुरा में एम्स का नींव पत्थर रखा था। एम्स के निर्माण पर 1351 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया था कि एम्स का निर्माण 48 माह में पूरा हो जाएगा।
केंद्र सरकार ने एम्स के आधारभूत ढांचे के निर्माण के लिए और जमीन मांगी है। सरकारी स्तर पर इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी है। जहां एम्स का निर्माण होना है, वहां आसपास वन विभाग और पशुपालन विभाग की और जमीन है। शीघ्र ही इन विभागों से एनओसी लेकर केंद्र को उपलब्ध कराया जाएगा। - विपिन परमार, स्वास्थ्य मंत्री हिमाचल प्रदेश