हिमाचल की 13 जातियां केंद्र की ओबीसी सूची से बाहर
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हिमाचल की तेरह जातियों को केंद्र की ओबीसी की सूची से बाहर कर दिया है। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के चेयरमैन जस्टिस वी. ईश्वरैय्या ने सोमवार को शिमला में ओबीसी से बाहर की गई जातियों की सूची जारी की। आयोग ने सूची में शामिल प्रदेश की चार जातियों के नाम में सुधार करने का भी फैसला लिया है।
केंद्र एवं राज्य की सूची में एकरूपता लाने के लिए जातियों को सूची से बाहर किया गया है। सोमवार को राज्य अतिथिगृह पीटरहॉफ शिमला में ओबीसी की सूची से जातियों को बाहर करने के लिए आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष की मौजूदगी में जन सुनवाई हुई। इसमें जिला शिमला, सोलन, सिरमौर और किन्नौर से आए लोगों ने अपनी-अपनी आपत्तियां और सुझाव दर्ज करवाए।
चार जातियों के नाम में सुधार करने का लिया फैसला
सुनवाई के बाद राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के चेयरमैन जस्टिस वी. ईश्वरैय्या ने बताया कि हिमाचल की 13 जातियों को राज्य सूची से पहले ही बाहर किया जा चुका है। अब केंद्र की सूची से भी इन जातियों को बाहर किया जाएगा। ओबीसी में नई जातियों को शामिल करने का अभी कोई विचार नहीं है। केंद्र सरकार की ओबीसी सूची साल 1993-94 की है। ऐसे में हिमाचल और केंद्र की सूची में भिन्नता है। चार जातियों में स्पेलिंग मिस्टेक है। इसे दुरुस्त किया जाएगा।
इन जातियों को किया बाहर- तूरी, भडभूना (भड़भूजा, भरभूजा), चाहंग, चांगर, धीमार, दइया, कश्यप राजपूत, प्रजापति, कंगेहरा, कंजर (कंचन), नालबंद, रेचबंद और गुज्जर या गुजर। इन जातियों के नाम में होगा सुधार- बटेहडा, भाट या भट्टा (ब्राह्मण), गोरखा (राजपूत, ब्राह्मण, खत्री), गद्दी (राजपूत, ब्राह्मण, खत्री)।
इन गांवों को मिल सकता है ओबीसी दर्जा
कुल्लू के मलाणा और कांगड़ा के छोटा भंगाल, बड़ा भंगाल के लोगों को ओबीसी का दर्जा मिल सकता है। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की टीम इन गांवों का दौरा करने के बाद ओबीसी का दर्जा देने पर फैसला लेगी। हिमाचल सरकार ने इन क्षेत्रों को पिछड़ा घोषित करने का प्रस्ताव भेजा था। इसी कड़ी में 15 जुलाई को धर्मशाला और 17 जुलाई को कुल्लू में जन सुनवाई होगी। आयोग की टीम इन दिनों प्रदेश के दौरे पर है।
आयोग के चेयरमैन जस्टिस वी. ईश्वरैय्या ने बताया कि इन इलाकों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया जाएगा। इस दौरान लोगों का पक्ष भी सुना जाएगा। उनकी वित्तीय स्थिति का पता लगाया जाएगा। रहन-सहन, खानपान और शैक्षणिक स्तर का पता लगाया जाएगा। जस्टिस वी. ईश्वरैय्या ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट मत है कि गरीब लोगों को आरक्षण मिलना चाहिए। आरक्षण का दुरुपयोग करने वालों पर भी कड़ी नजर रखी जानी चाहिए।