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Shimla News: चार माह से वेतन नहीं मिलने पर भड़के ग्राम रोजगार सेवक
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बोले, बच्चों की फीस देना हुआ मुश्किल
आज मुख्यमंत्री सुक्खू के समक्ष उठाएंगे मांगें
संवाद न्यूज एजेंसी शिमला। ग्राम रोजगार सेवकों (जीआरएस) को चार महीनों से वेतन नहीं मिला है। इससे जिला समेत पूरे प्रदेश में सेवाएं दे रहे ग्राम रोजगार सेवकों में सरकार के प्रति रोष बढ़ गया है। इनका कहना है कि मानदेय का भुगतान न होने से परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई का खर्च और अन्य आवश्यक जिम्मेदारियां निभाना मुश्किल हो गया है।
प्रदेश में करीब 1,034 और जिला शिमला में करीब 105 ग्राम रोजगार सेवक हैं। ग्राम स्तर पर वीबीजीरामजी योजना और अन्य ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन में इनकी भूमिका अहम है। ग्राम रोजगार सेवक संघ के अनुसार, ग्राम रोजगार सेवक गांवों में विभिन्न विकास योजनाओं के संचालन और निगरानी से जुड़े कार्य करते हैं। इनमें वीबीजीरामजी योजना, मस्टरोल तैयार करना, गांव की मांगों को दर्ज करना, युक्त धारा पोर्टल से संबंधित कार्य और जियो टैगिंग जैसे काम शामिल हैं। योजनाओं के क्रियान्वयन में उनकी जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन इसके अनुरूप सुविधाएं और समय पर मानदेय उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। ग्राम रोजगार सेवक संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिवराज ठाकुर ने बताया कि वह इस मामले को लेकर कई बार निदेशक पंचायतीराज विभाग राघव शर्मा से मिल चुके हैं। बावजूद इसके समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। उन्होंने बताया कि विभाग की ओर से कहा जाता है कि केंद्र से बजट मिलता है और बजट न आने के कारण वेतन का भुगतान नहीं हो पा रहा है। ग्राम रोजगार सेवक प्रदेश सरकार की योजनाओं के लिए काम कर रहे हैं, इसलिए सरकार को अपने फंड से कर्मचारियों को वेतन देना चाहिए। प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि इस मामले को लेकर बुधवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से विधानसभा में प्रतिनिधिमंडल मिलेगा और समस्या का समाधान करने की मांग उठाएगा। ग्राम रोजगार सेवकों ने कहा कि पूर्व में मनरेगा के दौरान उन्हें जो स्केल और सुविधाएं प्रदान की जाती थीं, वीबीजीरामजी योजना लागू होने के बाद सरकार ने उन्हें बंद कर दिया है। कर्मचारियों की मांग है कि पहले दी जा रही सुविधाओं और स्केल को दोबारा बहाल किया जाए।
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आज मुख्यमंत्री सुक्खू के समक्ष उठाएंगे मांगें
संवाद न्यूज एजेंसी शिमला। ग्राम रोजगार सेवकों (जीआरएस) को चार महीनों से वेतन नहीं मिला है। इससे जिला समेत पूरे प्रदेश में सेवाएं दे रहे ग्राम रोजगार सेवकों में सरकार के प्रति रोष बढ़ गया है। इनका कहना है कि मानदेय का भुगतान न होने से परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई का खर्च और अन्य आवश्यक जिम्मेदारियां निभाना मुश्किल हो गया है।
प्रदेश में करीब 1,034 और जिला शिमला में करीब 105 ग्राम रोजगार सेवक हैं। ग्राम स्तर पर वीबीजीरामजी योजना और अन्य ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन में इनकी भूमिका अहम है। ग्राम रोजगार सेवक संघ के अनुसार, ग्राम रोजगार सेवक गांवों में विभिन्न विकास योजनाओं के संचालन और निगरानी से जुड़े कार्य करते हैं। इनमें वीबीजीरामजी योजना, मस्टरोल तैयार करना, गांव की मांगों को दर्ज करना, युक्त धारा पोर्टल से संबंधित कार्य और जियो टैगिंग जैसे काम शामिल हैं। योजनाओं के क्रियान्वयन में उनकी जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन इसके अनुरूप सुविधाएं और समय पर मानदेय उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। ग्राम रोजगार सेवक संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिवराज ठाकुर ने बताया कि वह इस मामले को लेकर कई बार निदेशक पंचायतीराज विभाग राघव शर्मा से मिल चुके हैं। बावजूद इसके समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। उन्होंने बताया कि विभाग की ओर से कहा जाता है कि केंद्र से बजट मिलता है और बजट न आने के कारण वेतन का भुगतान नहीं हो पा रहा है। ग्राम रोजगार सेवक प्रदेश सरकार की योजनाओं के लिए काम कर रहे हैं, इसलिए सरकार को अपने फंड से कर्मचारियों को वेतन देना चाहिए। प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि इस मामले को लेकर बुधवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से विधानसभा में प्रतिनिधिमंडल मिलेगा और समस्या का समाधान करने की मांग उठाएगा। ग्राम रोजगार सेवकों ने कहा कि पूर्व में मनरेगा के दौरान उन्हें जो स्केल और सुविधाएं प्रदान की जाती थीं, वीबीजीरामजी योजना लागू होने के बाद सरकार ने उन्हें बंद कर दिया है। कर्मचारियों की मांग है कि पहले दी जा रही सुविधाओं और स्केल को दोबारा बहाल किया जाए।
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