Himachal: हिमाचल के शहरी निकायों में लगेंगे भूमिगत डस्टबिन, सरकार ने अधिकारियों से मांगे सुझाव
शहरी विकास विभाग ने हिमाचल के शहरी निकायों में भूमिगत (अंडरग्राउंड) डस्टबिन लगाने की कवायद शुरू कर दी है। योजना को सिरे चढ़ाने के लिए अधिकारियों से सुझाव मांगे गए हैं।
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हिमाचल प्रदेश शहरी विकास विभाग ने हिमाचल के शहरी निकायों में भूमिगत (अंडरग्राउंड) डस्टबिन लगाने की कवायद शुरू कर दी है। योजना को सिरे चढ़ाने के लिए अधिकारियों से सुझाव मांगे गए हैं। वर्ष 2017 में धर्मशाला, पांवटा साहिब और सुंदरनगर में इसका ट्रायल हुआ था, लेकिन इसके बाद योजना आगे नहीं बढ़ी। अब इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए कसरत शुरू हो गई है। हिमाचल में पांच नगर निगम समेत करीब 60 शहरी निकाय हैं। योजना के मुताबिक हर 100 मीटर की दूरी पर भूमिगत डस्टबिन लगाया जाना है। एक जगह तीन डस्टबिन लगेंगे।
एक में गलने वाला, दूसरे में जलने वाला और तीसरे डस्टबिन में रिसाइकिल न होने वाला कूड़ा डाला जाएगा। इसे सीमेंट उद्योगों में भेजा जाएगा। शहरी विकास विभाग के पूर्व निदेशक जेएम पठानिया ने कहा कि वर्ष 2017 में केंद्र ने यह योजना शुरू करने के लिए सात करोड़ की राशि जारी की थी। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत भूमिगत डस्टबिन पर यह राशि खर्च होनी थी। धर्मशाला शहर में डस्टबिन लगाने के लिए 75 साइट का चयन किया गया था। नगर निगम बनने के बाद यह साइट बढ़ाकर 225 की गई थीं। कुछ स्थानों पर भूमिगत डस्टबिन लगाए गए थे।
इन्हें भी 100 मीटर के बजाय तीन किलोमीटर दूरी पर लगा दिया था। सुंदरनगर में भी पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर डस्टबिन लगाए गए थ। मुख्य संसदीय सचिव आशीष बुटेल ने कहा कि भूमिगत डस्टबिन और पार्किंग को लेकर अधिकारियों की बैठक बुलाई है। इन योजनाओं को सिरे चढ़ाया जा रहा है। उधर, सरकार का मानना है कि शहरी निकायों में भूमिगत डस्टबिन लगाने से बंदरों और जंगली जानवरों से निजात मिलेगी। शहर भी साफ-सुथरा रहेगा।
यह है खूबी
भूमिगत डस्टबिन सड़क किनारे लगाए जाने हैं। इनके ऊपर लेटर बॉक्स की तरह एक डिब्बा दिखेगा। इसमें कूड़ा डाला जाएगा। हाइड्रोलिक क्रेन के माध्यम से इन डस्टबिन को उठाया जाना है।