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Shimla News: पोर्टमोर स्कूल की छात्राओं को राहत, दो शिफ्ट में चलेगा स्कूल
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प्रदेश सरकार का एलान, सुबह और दोपहर के सत्र में लगेंगी छात्राओं की कक्षाएं
1150 निर्धारित कर दी थी छात्राओं की संख्या, स्कूल में पढ़ रही थीं करीब 2500
इंपैक्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। पोर्टमोर स्कूल में सीबीएसई में संबद्धता के बाद सीटें घटाए जाने से पैदा हुए संकट पर प्रदेश सरकार ने अभिभावकों को राहत दी है। सीबीएसई से मंजूरी मिलने के बाद अब स्कूल को दो शिफ्ट में संचालित किया जाएगा, इससे किसी भी छात्रा को सीटों की कमी के कारण स्कूल बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बताया कि सरकार छात्राओं के भविष्य से समझौता नहीं करेगी और जो छात्राएं वर्षों से इस संस्थान में पढ़ रही हैं उनकी पढ़ाई निर्बाध जारी रहेगी। इस मामले को अखबार ने प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था।
सीबीएसई से संबद्धता मिलने के बाद स्कूल की कुल क्षमता लगभग 1150 निर्धारित कर दी गई थी। इससे पहले विद्यालय की हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबद्धता थी और यहां करीब 2500 छात्राएं पढ़ रही थीं। बोर्ड बदलने के साथ यूनिट प्रणाली और प्रत्येक कक्षा में अधिकतम छात्र संख्या की सीमा लागू होने से कई छात्राओं के सामने प्रवेश का संकट खड़ा हो गया। दूसरे स्कूलों में जाने की चिंता थी। सरकार के फैसले के अनुसार स्कूल अब सुबह और दोपहर की दो शिफ्टों में संचालित होगा। शिक्षा विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि कक्षाओं, स्टाफ और समयसारिणी का पुनर्गठन कर अतिरिक्त छात्राओं को समायोजित किया जाए। अधिकारियों के अनुसार शिफ्ट व्यवस्था का प्रारूप तैयार किया जा रहा है और इसे जल्द लागू किया जाएगा ताकि शैक्षणिक सत्र प्रभावित न हो। इसके साथ ही प्रवेश प्रक्रिया होगी।
स्कूल प्रशासन ने बताया कि प्रवेश प्रक्रिया में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक की अनिवार्यता यथावत रहेगी। पहले यह सीमा 60 प्रतिशत थी जिसे घटाकर 50 प्रतिशत किया गया है। पात्रता मानदंड में ढील नहीं दी जाएगी लेकिन केवल सीटों की कमी के कारण किसी छात्रा का भविष्य प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। प्रवेश पहले आओ पहले पाओ के आधार पर ही जारी रहेगा। इसके साथ ही फीस में भी फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।
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अभिभावकों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यदि दो शिफ्ट का विकल्प नहीं मिलता तो सैकड़ों छात्राओं को बीच सत्र में स्कूल बदलना पड़ता, जिससे उनकी पढ़ाई और मानसिक स्थिति पर असर पड़ता। शिक्षा विभाग ने संकेत दिए हैं कि अतिरिक्त व्यवस्थाओं के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। सरकार के इस फैसले से स्पष्ट है कि छात्राओं की चिंता को गंभीरता से लिया गया है। दो शिफ्ट व्यवस्था लागू होने के बाद पोर्टमोर स्कूल में पढ़ रही सभी पात्र छात्राएं अपने ही संस्थान में शिक्षा जारी रख सकेंगी।
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1150 निर्धारित कर दी थी छात्राओं की संख्या, स्कूल में पढ़ रही थीं करीब 2500
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शिमला। पोर्टमोर स्कूल में सीबीएसई में संबद्धता के बाद सीटें घटाए जाने से पैदा हुए संकट पर प्रदेश सरकार ने अभिभावकों को राहत दी है। सीबीएसई से मंजूरी मिलने के बाद अब स्कूल को दो शिफ्ट में संचालित किया जाएगा, इससे किसी भी छात्रा को सीटों की कमी के कारण स्कूल बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बताया कि सरकार छात्राओं के भविष्य से समझौता नहीं करेगी और जो छात्राएं वर्षों से इस संस्थान में पढ़ रही हैं उनकी पढ़ाई निर्बाध जारी रहेगी। इस मामले को अखबार ने प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था।
सीबीएसई से संबद्धता मिलने के बाद स्कूल की कुल क्षमता लगभग 1150 निर्धारित कर दी गई थी। इससे पहले विद्यालय की हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबद्धता थी और यहां करीब 2500 छात्राएं पढ़ रही थीं। बोर्ड बदलने के साथ यूनिट प्रणाली और प्रत्येक कक्षा में अधिकतम छात्र संख्या की सीमा लागू होने से कई छात्राओं के सामने प्रवेश का संकट खड़ा हो गया। दूसरे स्कूलों में जाने की चिंता थी। सरकार के फैसले के अनुसार स्कूल अब सुबह और दोपहर की दो शिफ्टों में संचालित होगा। शिक्षा विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि कक्षाओं, स्टाफ और समयसारिणी का पुनर्गठन कर अतिरिक्त छात्राओं को समायोजित किया जाए। अधिकारियों के अनुसार शिफ्ट व्यवस्था का प्रारूप तैयार किया जा रहा है और इसे जल्द लागू किया जाएगा ताकि शैक्षणिक सत्र प्रभावित न हो। इसके साथ ही प्रवेश प्रक्रिया होगी।
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स्कूल प्रशासन ने बताया कि प्रवेश प्रक्रिया में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक की अनिवार्यता यथावत रहेगी। पहले यह सीमा 60 प्रतिशत थी जिसे घटाकर 50 प्रतिशत किया गया है। पात्रता मानदंड में ढील नहीं दी जाएगी लेकिन केवल सीटों की कमी के कारण किसी छात्रा का भविष्य प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। प्रवेश पहले आओ पहले पाओ के आधार पर ही जारी रहेगा। इसके साथ ही फीस में भी फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।
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अभिभावकों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यदि दो शिफ्ट का विकल्प नहीं मिलता तो सैकड़ों छात्राओं को बीच सत्र में स्कूल बदलना पड़ता, जिससे उनकी पढ़ाई और मानसिक स्थिति पर असर पड़ता। शिक्षा विभाग ने संकेत दिए हैं कि अतिरिक्त व्यवस्थाओं के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। सरकार के इस फैसले से स्पष्ट है कि छात्राओं की चिंता को गंभीरता से लिया गया है। दो शिफ्ट व्यवस्था लागू होने के बाद पोर्टमोर स्कूल में पढ़ रही सभी पात्र छात्राएं अपने ही संस्थान में शिक्षा जारी रख सकेंगी।