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मेडिसिन वार्ड में अब मेडिसिन के मरीज ही होंगे दाखिल
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सोमवार को शिमला के आईजीएमसी में पर्ची काउटर पर लगी लोगो की भीड़ । फोटो संवाद
- फोटो : SHIMLA CITY
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शिमला। आईजीएमसी में मेडिसिन की मरीजों को अब परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी। मेडिसिन वार्ड में भर्ती श्वास रोगियों को यहां से शिफ्ट किया जाएगा। यह रोगी अब ई ब्लॉक में शिफ्ट होंगे। एक सप्ताह के भीतर यह कार्य पूरा किया जाएगा। आईजीएमसी के प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र सिंह ने इस बात की पुष्टि की है।
आईजीएमसी के मेडिसिन वार्ड में मेडिसिन और श्वास रोगियों का एक साथ उपचार चल रहा है। ऐसे में स्थिति यह बन गई है कि मौजूदा समय में एक बिस्तर पर दो-दो मरीजों को दाखिल किया जा रहा है। ऐसे में एक मरीज से दूसरे मरीज में संक्रमण फैलने का खतरा भी बना हुआ है। चूंकि यह मामला प्रबंधन के समक्ष उठा था। ऐसे में अब प्रबंधन ने यहां से श्वास रोगियों को शिफ्ट करने को कहा है। प्रबंधन का दावा है कि इससे जहां अस्पताल में 30 से 31 बिस्तर खाली हो जाएंगे तो मेडिसिन के मरीजों को परेशानी नहीं झेलनी होगी।
गौरतलब है कि रोजाना विभिन्न ओपीडी में प्रदेशभर से इलाज के लिए हजारों मरीज आते हैं। ऐसे में औसतन 100 से अधिक मरीजों को चिकित्सक रोजाना दाखिल करते हैं। इनमें मेडिसिन के मरीजों की संख्या भी अधिक रहती है।
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इस ब्लॉक में चलता था कोरोना वार्ड
कोरोना से पहले ई ब्लॉक में श्वास रोगियों के लिए अलग वार्ड था, लेकिन कोरोना महामारी के बाद इस ब्लॉक में कोविड मरीजों का उपचार शुरू किया गया। चूंकि अब कोरोना के मरीज अस्पताल में भर्ती नहीं हैं। ऐसे में प्रबंधन ने दोबारा से इस ब्लॉक में श्वास रोगियों को शिफ्ट करने का निर्णय लिया है।
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आईजीएमसी के मेडिसिन वार्ड में मेडिसिन और श्वास रोगियों का एक साथ उपचार चल रहा है। ऐसे में स्थिति यह बन गई है कि मौजूदा समय में एक बिस्तर पर दो-दो मरीजों को दाखिल किया जा रहा है। ऐसे में एक मरीज से दूसरे मरीज में संक्रमण फैलने का खतरा भी बना हुआ है। चूंकि यह मामला प्रबंधन के समक्ष उठा था। ऐसे में अब प्रबंधन ने यहां से श्वास रोगियों को शिफ्ट करने को कहा है। प्रबंधन का दावा है कि इससे जहां अस्पताल में 30 से 31 बिस्तर खाली हो जाएंगे तो मेडिसिन के मरीजों को परेशानी नहीं झेलनी होगी।
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गौरतलब है कि रोजाना विभिन्न ओपीडी में प्रदेशभर से इलाज के लिए हजारों मरीज आते हैं। ऐसे में औसतन 100 से अधिक मरीजों को चिकित्सक रोजाना दाखिल करते हैं। इनमें मेडिसिन के मरीजों की संख्या भी अधिक रहती है।
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इस ब्लॉक में चलता था कोरोना वार्ड
कोरोना से पहले ई ब्लॉक में श्वास रोगियों के लिए अलग वार्ड था, लेकिन कोरोना महामारी के बाद इस ब्लॉक में कोविड मरीजों का उपचार शुरू किया गया। चूंकि अब कोरोना के मरीज अस्पताल में भर्ती नहीं हैं। ऐसे में प्रबंधन ने दोबारा से इस ब्लॉक में श्वास रोगियों को शिफ्ट करने का निर्णय लिया है।