प्रदेश में मोहाली की तर्ज पर विकसित होंगे दो आईटी पार्क, 300 को मिलेगा स्वरोजगार
हिमाचल के आईटी पार्क मोहाली में स्थापित पार्क की तर्ज पर बनेंगे। पहले शिमला के मैहली में मोहाली स्थित आईटी पार्क का मिनी मॉडल तैयार किया जाएगा। उसके बाद केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने पर कांगड़ा के गगल में भी एक वैसा ही आईटी पार्क विकसित किया जाएगा, जैसा मोहाली में है।
यह जानकारी आईटी मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने दी। उन्होंने कहा कि अगले साल के अंत तक शिमला का मैहली स्थित पार्क बनकर तैयार हो जाएगा।
कहा कि शिमला में 1400 वर्ग मीटर क्षेत्र में आईटी पार्क बनाया जा रहा है।
इसमें 250 से 300 लोगों को अपना हुनर दिखाने और स्वरोजगार पाने का मौका मिलेगा। इसमें नए उद्यमियों को सॉफ्टवेयर विकसित करने और अन्य सुविधाएं मिलेंगी।
तैयार करने में लगेंगे करीब 18 महीने
इसे तैयार करने में करीब 18 महीने लगेंगे। यानी, इसे अगले साल के अंत तक तैयार कर लिया जाएगा। कांगड़ा के गगल में आईटी विभाग के पास करीब 27 बीघा जमीन है। यह भी एसटीपीआई को दी जा रही है।
यहां आईटी पार्क बनाने का मसौदा आगामी कैबिनेट बैठक में जाएगा। उसके बाद इसे भारत सरकार के सॉफ्टवेयर टेकभनालॉजी पार्क ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) के पास भेजा जाएगा। यहां मोहाली पार्क की तरह पास में एयरपोर्ट भी है।
गूगल, एमेजॉन जैसी कंपनियों को न्योता देंगे
इसे हूबहू मोहाली पार्क की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने कहा कि वाकनाघाट में आईटी विभाग के पास विभाग की 322 बीघा जमीन पड़ी है।
यहां गूगल, एमेजॉन जैसी कंपनियों को डाटा बैंक बनाने के विभाग जमीन देने का ऑफर दे सकता है। कहा कि कोल्ड एरिया में आईटी डाटा बैंक बनाने से कंपनियोें का कूलिंग वगैरह में बिजली और अन्य तरह का कम खर्च आएगा।